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क्या किसानों की आय दुगनी हुई? भाजपा अध्यक्ष से पैनलिस्ट ने पूछा सवाल तो बोले- उनके खातें में 6000 रुपए डाले हमने

आंदोलनकारी किसानों के प्रतिनिधिमंडल की बैठक बृहस्पतिवार को भी बेनतीजा रही। एक सप्ताह के भीतर सरकार और किसान नेताओं के बीच यह दूसरी बैठक हुई। लगभग आठ घंटे चली इस बैठक में किसान नेता नए कृषि कानूनों को रद्द करने पर जोर देते रहे।

किसान आंदोलनआजाद किसान संघर्ष कमेटी (पंजाब) के हरजिंदर सिंह टांडा संवाददाताओं से बातचीत करते हुए (फोटो एएनआई)

कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर की अगुवाई में तीन केंद्रीय मंत्रियों के साथ आंदोलनकारी किसानों के प्रतिनिधिमंडल की बैठक बृहस्पतिवार को भी बेनतीजा रही। एक सप्ताह के भीतर सरकार और किसान नेताओं के बीच यह दूसरी बैठक हुई। लगभग आठ घंटे चली इस बैठक में किसान नेता नए कृषि कानूनों को रद्द करने पर जोर देते रहे।

इस मुद्दे को लेकर टीवी चैनल के डिबेट में कई तरह के सवाल खड़े किए गए। रिपब्लिक भारत के कार्यक्रम “पूछता है भारत” में एंकर अर्नब गोस्वामी के साथ चर्चा के दौरान राजनीतिक विश्लेषक दुष्यंत नागर ने भाजपा के हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष ओपी धनखड़ से पूछा कि क्या किसानों की दोगुनी हुई? इस पर जवाब देते हुए ओपी धनखड़ ने कहा, साल 2014 से लेकर 2020 तक 500 रुपए से 5000 हजार तक MSP बढ़ाया गया, साथ ही किसान सम्मान निधि योजना के तहत मोदी सरकार हर साल किसानों के खातों में 6000 रुपये डालती है।” इसको लेकर दोनों के बीच जोरदार बहस हुई।

उधर, नई दिल्ली के विज्ञान भवन में किसान नेताओं ने मीटिंग के दौरान सरकार की तरफ से उपलब्ध दोपहर का भोजन, चाय और पानी लेने से भी इनकार किया। विभिन्न किसान संगठनों के लगभग 40 नेताओं के साथ बैठक के दौरान सरकार ने अपनी ओर से उनकी सभी वैध चिंताओं पर ध्यान दिये जाने का आश्वासन दिया और कहा कि उनपर खुले दिमाग से विचार किया जायेगा। लेकिन किसान नेताओं ने कृषि कानूनों में कई खामियों और विसंगतियों को उजागर किया। किसान नेताओं का कहना था कि इन कानूनों को जल्दबाजी में पारित किया गया।

कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने विज्ञान भवन में किसान नेताओं के साथ चौथे दौर की बातचीत के बाद संवाददाताओं से कहा कि अगले दौर की बातचीत शनिवार को दोपहर दो बजे होगी। उन्होंने कहा कि इसमें ‘किसी तरह का अहंकार नहीं है’ और सरकार तीन नये कृषि कानूनों के बारे में किसानों की आशंकाओं के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं पर खुले दिमाग से बातचीत करने और विचार करने को सहमत है। इन बिंदुओं में कृषि उपज विपणन समितियों (एपीएमसी) को मजबूत करना, प्रस्तावित निजी मंडियों के साथ कर समानता और किसी विवाद की स्थिति में विवाद निपटान के लिए किसानों को ऊंची अदालतों में जाने की स्वतंत्रता दिये जाने जैसे पहलु भी शामिल हैं।

तोमर ने कहा कि सरकार फसल अवशेषों को जलाये जाने और बिजली संबंधी कानून पर जारी अध्यादेश से जुड़ी किसानों की चिंताओं पर भी गौर करने के लिए तैयार है। एक सरकारी सूत्र ने कहा कि बैठक शनिवार को फिर होगी क्योंकि समय की कमी के कारण कोई अंतिम नतीजा नहीं निकल सका। किसान नेता सभा स्थल से नारेबाजी करते हुये बाहर निकले और उन्होंने कहा कि वार्ता में गतिरोध बना हुआ है। किसान नेताओं में से कुछ ने धमकी दी कि बृहस्पतिवार की बैठक का कोई समाधान नहीं निकला तो आगे की बैठकों का बहिष्कार किया जायेगा।

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) के कार्य समूह सदस्य तथा महाराष्ट्र और गुजरात के किसानों का प्रतिनिधित्व करने वाले लोक संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष प्रतिभा शिंदे ने कहा, ‘‘हमारी ओर से वार्ता पूरी हो चुकी है। हमारे नेताओं ने कहा है कि अगर सरकार द्वारा आज कोई समाधान नहीं दिया जाता है तो वे आगे की बैठकों में भाग नहीं लेंगे।’’ वहीं, एक अन्य किसान नेता कुलवंत सिंह संधू ने कहा कि सरकार ने एमएसपी और खरीद प्रणाली सहित कई प्रस्ताव रखे हैं, जिन पर शनिवार को सरकार के साथ अगली बैठक से पहले किसान संगठनों के साथ चर्चा की जायेगी।

एआईकेएससीसी के महासचिव हन्नान मोल्लाह ने कहा कि यूनियनों की मुख्य मांग तीन नये कृषि कानूनों को निरस्त करने की है और सरकार ने किसान नेताओं द्वारा बताई गई 8-10 विशिष्ट कमियों को भी सुना है। उन्होंने कहा, ‘‘हमें कोई संशोधन नहीं चाहिये। हम चाहते हैं कि इन कानूनों को निरस्त किया जाए।’’ मोल्लाह ने कहा कि सरकार के साथ अगले दौर की बातचीत से पहले सभी किसान संगठन शुक्रवार को सुबह 11 बजे बैठक करेंगे।

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