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ढोला सादिया पुल: भारत के इंजीनियरिंग जीनियस से टेंशन में आया चीन, कहा- अरुणाचल प्रदेश में संयम और सावधानी बरते इंडिया

चीन ने कहा है कि विवादित इलाकों का संयुक्त नियंत्रण, शांति और बॉर्डर इलाकों में सौहार्द्र के लिए जरूरी है दोनों देशों के बीच विवादित मुद्दों को सुलझाया जाए।

9.2 किलोमीटर लंबे धौला-सादिया पुल का विहंगम दृश्य (Photo- PTI)

अरुणाचल प्रदेश में ढोला सदिया पुल के उद्घाटन से चीन की चिंता बढ़ गई है। चीन ने सोमवार (29 मई) को भारत से कहा कि भारत को अरुणाचल प्रदेश में सावधानी और संयम से काम लेना चाहिए। पीएम नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार (26 मई) को अरुणाचल प्रदेश में ढोला-सादिया पुल का उद्घाटन किया था। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि, ‘ हमें उम्मीद है कि अरुणाचल प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण के बारे में भारत संयमित और संतुलित रवैया अपनाएगा।’ चीन ने कहा कि विवादित इलाकों का संयुक्त नियंत्रण, शांति और बॉर्डर इलाकों में सौहार्द्र के लिए जरूरी है दोनों देशों के बीच विवादित मुद्दों को सुलझाया जाए। चीनी भाषा में जारी एक बयान में विदेश मंत्रालय ने कहा कि पूर्वी क्षेत्र में भारत-चीन संबंधों के बारे में चीन का रवैया लगातार एक जैसा और स्पष्ट रहा है।

प्रधानमंत्री ने 26 मई को रणनीतिक महत्व के इस पुल को देश को समर्पित किया था। ब्रह्मपुत्र नदी पर बने इस पुल की वजह से भारत का सभी मौसम में अरुणाचल प्रदेश के अंदरुनी इलाकों से संपर्क हो गया है। इस पुल की वजह से भारत अरुणाचल प्रदेश में चीन की सीमा पर भी जरूरत पड़ने पर रसद और युद्ध सामग्री पहुंचा सकता है। चीनी सामरिक विशेषज्ञों को ये बात नागवार गुजरी है। 9.2 किलोमीटर लंबा ये पुल आसाम और अरुणाचल प्रदेश की दूरी को 165 किलोमीटर कम कर देगा, और पहले की अपेक्षा सफर का समय भी 5 घंटा कम हो जाएगा।

बता दें कि चीन अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों पर अपना दावा जताता है और इसे दक्षिण तिब्बत का हिस्सा मानता है। भारत और चीन के बीच सीमा विवाद लंबे समय से चला रहा है। चीन के विदेश प्रवक्ता ने कहा कि, ‘चीन और भारत को सीमा विवाद बातचीत और आपसी संपर्कों के जरिये सुलझाने चाहिए।’ बता दें कि 1962 में चीन ने अरुणाचल प्रदेश में घुसपैठ की थी, भारत ने चीन की इस हिमाकत का पुरजोर जवाब दिया था। बाद चीन की सेनाएं भारतीय क्षेत्र से वापस चली गई थीं।

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