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सस्ता जूस पिलाकर खड़ी कर दी 2000 करोड़ की संपत्ति, पढ़ें धीरेंद्र सिंह की कहानी

इन दिनों उत्तर भारत में लू के थपेड़े लोगों का गला सुखा रहे हैं। लेकिन देश की एक बड़ी आबादी आज भी जूस या कोल्ड्रिंक्स पर पैसे खर्च करने की सामर्थ्य नहीं रखती है। जमीन से जुड़े शख्स धीरेंद्र सिंह को इस बात का इल्म था, इसलिए पेय पदार्थों के बड़े और महंगे ब्रांड्स को देखते हुए उन्होंने किफायती ब्रांड खड़ा कर दिया।
धीरेंद्र सिंह। (फोटो सोर्स- फेसबुक)

इन दिनों उत्तर भारत में लू के थपेड़े लोगों का गला सुखा रहे हैं। लेकिन देश की एक बड़ी आबादी आज भी जूस या कोल्ड्रिंक्स पर पैसे खर्च करने की सामर्थ्य नहीं रखती है। जमीन से जुड़े शख्स धीरेंद्र सिंह को इस बात का इल्म था, इसलिए पेय पदार्थों के बड़े और महंगे ब्रांड्स को देखते हुए उन्होंने किफायती ब्रांड खड़ा कर दिया। गांवों और कस्बों से अगर आपका वास्ता है तो ‘मनपसंद’ नाम का मैंगो जूस जरूर पिया होगा या वह आपकी नजरों से होकर गुजरा होगा। अब यह ब्रांड बड़े शहरों में भी पैर जमा रहा है। इसे शुरू करने वाले 55 वर्षीय धीरेंद्र सिंह की कहानी प्रेरित करती है। मशहूर मैगजीन फोर्ब्स इंडिया के मुताबिक धीरेंद्र सिंह ने मैंगो जूस बेचकर 2000 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति बना ली। धीरेंद्र सिंह उत्तर भारत के ग्रामीण इलाकों में पले-बढ़े हैं, लेकिन उन्होंने अपनी कंपनी मनपसंद बेवरेजेस गुजरात में शुरू की।

धीरेंद्र की कंपनी सस्ती पैकिंग में मैंगो जूस उपलब्ध कराती है। 2011 में उन्होंने 125 मिली. में मैंगो जूस निकाला जिसकी कीमत महज 6 रुपये रखी गई। इस बोतल के आने के बाद से आय 6 गुना बढ़ गई। 2017 वित्त वर्ष में यह 111 मिलियन डॉलर यानी करीब 723 करोड़ रुपये रही। आधे से ज्यादा बिक्री ग्रामीण इलाकों और छोटे शहरों में होती है। इसी अवधि में मुनाफा 1.2 मिलियन डॉलर यानी करीब 7 करोड़ 81 लाख से बढ़कर 11 मिलियन डॉलर यानी करीब 71 करोड़ 61 लाख रुपये हो गया। इससे फोर्ब्स एशिया के बेस्ट अंडर बिलियन लिस्ट में मनपसंद को एक जगह मिली। सिंह की 44 फीसदी हिस्सेदारी के साथ उनकी संपत्ति 330 मिलियन डॉलर यानी करीब 2148 करोड़ 46 लाख 50 हजार हो गई। 2018 के पहले 9 महीनों में बिक्री पहले ही 89 मिलियन डॉलर यानी करीब 579 करोड़ 43 लाख और 45 हजार रुपये की हो चुकी है और मुनाफे में तेज बृद्धि का अनुमान लगाया जा रहा है।

मुंबई ब्रोकरेज फर्म प्रभुदास लीलाधर के उपभोक्ता वस्तुओं के विश्लेषक अमनीश अग्रवाल कहते हैं- ”उनकी बैलेंस शीट कर्ज मुक्त है और वे नए भौगोलिक क्षेत्रों में आक्रामक रूप से प्रवेश करने के लिए क्षमताओं का विस्तार कर रहे हैं।” वह आगे कहते हैं- ”वे बिक्री को बढ़ावा देने के लिए अपेक्षाकृत ज्यादा व्यापार मार्जिन देते हैं। उनका उद्देश्य कोक, पेप्सी और पार्ले एग्रो जैसे बड़े ब्रांड के डिस्ट्रीब्यूशन गैप पर कब्जा करना है, इसके लिए वे छोटे कस्बों और ग्रामीण इलाकों में फोकस कर रहे हैं।” मई 2017 में महाराष्ट्र के बिस्किट ब्रांड पारले के साथ मनपसंद ने एक करार किया था, जिसके करीब साढ़े चार लाख पारले आउटलेट्स पर जूस और बिस्किट का कॉम्बो पैक बेचा जाएगा।

सिंह ने 1997 में ‘मैंगो सिप’ के साथ कंपनी शुरू की थी। जो कि अब भी कंपनी का फ्लैगशिप प्रोडक्ट है। इसकी बिक्री तीन चौथाई है। सिंह पूर्व वॉलीवॉल खिलाड़ी हैं और उत्तर प्रदेश के गोरखपुर विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन करने के बाद स्पोर्ट कोटा से गुजरात में उन्हें एक सरकारी नौकरी मिल गई। लेकिन व्यापार की ललक के आगे सरकारी नौकरी नहीं टिक सकी। उन्होंने नौकरी छोड़कर कारोबार में कदम रखा। 2003 में बड़ौदा में पहला प्लांट लगाया। 2010 में बनारस और देहरादून में एक-एक प्लांट लगाया। अब मनपसंद एग्रो फूड्स जूस बनाने वाली बड़ी कंपनियों को टक्कर दे रही है। आज सिंह एक सफल करोबारी हैं।

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