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हरियाणा भी कस रहा वाड्रा पर शिकंजा!

उत्तर प्रदेश व पंजाब में चुनावों के मद्देनजर केंद्र सरकार ने कांग्रेस को घेरने के लिए पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।

पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा।

उत्तर प्रदेश व पंजाब में चुनावों के मद्देनजर केंद्र सरकार ने कांग्रेस को घेरने के लिए पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। वाड्रा के बीकानेर में 14 एकड़ जमीन सौदे में प्रवर्तन निदेशालय के नोटिस के बाद अब हरियाणा में एसएन ढींगड़ा की रिपोर्ट भी इस महीने के अंत तक आने की उम्मीद है।
सूत्रों की मानें तो ढींगड़ा आयोग अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप देने में व्यस्त है। यह अलग बात है कि आयोग की नोटिसों के बाद भी न तो वाड्रा और न ही पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा ही पेश हुए। ढींगड़ा ने इस मामले में कुछ रियल एस्टेट डेवलपर्स को भी नोटिस जारी किए। लेकिन सबके जवाब वकीलों के माध्यम से ही हासिल हुए।
हाल ही में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ललकारा था कि वे वाड्रा या सोनिया गांधी के खिलाफ एफआइआर क्यों नहीं दर्ज करते। हाल ही में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित व केजरीवाल के खिलाफ एफआइआर दर्ज की है। ध्यान रहे, पिछले लोकसभा चुनाव और उसके बाद हुए हरियाणा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने वाड्रा के मुद्दे को बढ़चढ़ कर उठाया था। प्रदेश के भाजपा नेता खुलेआम कहते थे कि वाड्रा को जेल भिजवाओ। मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने करीब डेढ़ साल पहले जस्टिस एसएन ढींगड़ा की अध्यक्षता में एक सदस्यीय आयोग का गठन किया था जिसे वाड्रा समेत कुछ और कंपनियों को गुड़गांव में दिए गए लाइसेंसों की जांच का जिम्मा दिया गया था। तब कहा गया था कि रिपोर्ट छह महीने में आएगी।

मुख्यमंत्री ने तब तय किया था कि कांग्रेस सरकार के राज में हुए करोड़ों रुपए के जमीन घोटालों का पर्दाफाश किया जाएगा। लेकिन इस रिपोर्ट के आने में देरी होती चली गई। अब सरकार की तरफ से पूरा दबाव है कि रिपोर्ट इस महीने के अंत तक दी जाए। इसका कारण यह है कि रिपोर्ट में देरी के लिए सरकार को चारों तरफ से आलोचना झेलनी पड़ रही है।

जस्टिस ढींगड़ा ने इस बारे में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के तत्कालीन दो अधिकारियों धारे सिंह और जेएस रेडू के भी बयान दर्ज किए। इसके अलावा इन लाइसेंसों को देने के लिए जिम्मेदार करीब डेढ़ दर्जन अधिकारियों से भी पूछताछ की गई। गौरतलब है कि वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटिलेटी को लाइसेंस जारी करने के लिए हुड्डा पर ही आरोप मढ़े जाते हैं। आयोग ने मार्च में हुड्डा को पेश होने के लिए नोटिस जारी किया था। लेकिन हुड्डा खुद पेश नहीं हुए। जब लाइसेंस जारी किए गए तब टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग का अधिकार हुड्डा के पास ही था। हुड्डा इस बात से कई बार इनकार कर चुके हैं कि लाइसेंस देते समय कुछ भी गलत किया गया। उनका कहना है कि सब कुछ कानून के ही मुताबिक हुआ।

हुड्डा ने खुद को भेजे गए नोटिस का जवाब अपने वकील के माध्यम से दिया। बहरहाल आयोग ने भी यह साफ कर दिया था कि हुड्डा के पेश होने की सूरत में आयोग अपना फैसला अपने हिसाब से दे देगा। मसला गुड़गांव के शिकोहपुर गांव में साढ़े तीन एकड़ जमीन से जुड़ा है। इसी जमीन के लिए स्काईलाइट हास्पिटेलिटी को लाइसेंस जारी किया गया था। वाड्रा ने इस मामले में पंजाब व हरियाणा हाई कोर्ट में एक याचिका भी दायर की थी जिसमें कहा गया था कि अधिकारी व कराधान विभाग ने कंपनी को वे सभी कागजात मुहैया नहीं कराए जिसके कारण कंपनी को वैट न चुकाने का नोटिस दिया गया था।

सूत्रों का कहना है कि ढींगड़ा आयोग ने इस मसले में सबूत जुटाने और बयान दर्ज कराने का काम पूरा कर लिया है। आयोग अब अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप दे रहा है। दरअसल आयोग का काम इसलिए बढ़ गया कि इसके दायरे में गुड़गांव के एक बड़े व विकसित हिस्से में लाइसेंस जारी करने, कंपनियों को फायदा पहुंचाने, लाभार्थियों की योग्यता व दूसरे सभी मुद्दे भी जोड़ दिए गए थे। यह अलग बात है कि आयोग को मूलत: वाड्रा के लाइसेंस की जांच के लिए ही बनाया गया था। आयोग को इस मामले में न्यायोचित कार्रवाई करने के लिए अपनी सिफारिशें देने को भी कहा गया है।

यह सारा मसला तब सामने आया था जब हरियाणा के आइएएस अफसर अशोक खेमका ने चकबंदी निदेशक रहते हुए वाड्रा की ओर से शिकोहपुर गांव में साढ़े तीन एकड़ जमीन प्रदेश की प्रमुख रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ को बेचने के म्यूटेशन को रद्द कर दिया। तत्कालीन हुड्डा सरकार के दौरान ही बनाई गई एक समिति ने खेमका के आदेश को उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर का बताया। समिति का कहना था कि खेमका के आदेश पंजाब होल्डिंग्स (कंसौलिडेशन एंड प्रिवेंशन आॅफ फ्रेगमेंटेशन) कानून व पंजाब राजस्व कानून के खिलाफ हैं। इसके बाद खेमका देश भर में तो नायक बन गए पर प्रदेश में उन पर पहाड़ टूट पड़ा। तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने उन्हें चार्जशीट भी कर दिया था।

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