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कैलास गए श्रद्धालुओं का आरोप- मानसरोवर में डुबकी नहीं लगाने दे रहा चीन

भारत का विदेश मंत्रालय हर साल जून से सितंबर के बीच में इस पवित्र धार्मिक स्थल की यात्रा का आयोजन कराता है। यह यात्रा इस साल आठ जून से शुरू होगी। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इसी महीने कैलास मानसरोवर यात्रा को लेकर चीन के विदेश मंत्री वांग यी से वार्ता की थी, जिस पर पड़ोसी मुल्क ने नाथूला दर्रा खोला था।

कैलास की यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं के इस जत्थे ने दावा किया कि चीनी अधिकारियों ने उन्हें पवित्र झील में डुबकी नहीं लगाने दी। (फोटोः ANI)

कैलास मानसरोवर में चीन ने भारत के श्रद्धालुओं को झील में डुबकी नहीं लगाने दी। श्रद्धालुओं ने आरोप लगाया कि चीन के अधिकारियों ने उन्हें झील में पवित्र डुबकी लगाने की अनुमति नहीं दी। पीड़ित यात्रियों के जत्थे का यात्रा के दौरान का फोटो भी सामने आया है। आपको बता दें कि हर बार की तरह इस साल भी हजारों यात्री कैलास मानसरोवर की यात्रा पर जाएंगे। यह धार्मिक स्थल तिब्बत में है, जिसका रास्ता नेपाल से होकर जाता है। हालांकि, अभी इस मामले पर चीन की ओर से किसी प्रकार की टिप्पणी नहीं आई है।

भारत का विदेश मंत्रालय हर साल जून से सितंबर के बीच में इस पवित्र धार्मिक स्थल की यात्रा का आयोजन कराता है। यह यात्रा इस साल आठ जून से शुरू होगी। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इसी महीने कैलास मानसरोवर यात्रा को लेकर चीन के विदेश मंत्री वांग यी से वार्ता की थी, जिस पर पड़ोसी मुल्क ने नाथूला दर्रा खोला था।

आठ मई को विदेश मंत्री ने इस संबंध में घोषणा भी की थी। उन्होंने कहा था कि भारत के साथ विचार-विमर्श के बाद नाथूला पास को फिर से चीन ने खोल दिया है। बकौल स्वराज, “मैंने चीनी विदेश मंत्रालय से कहा था कि दोनों देशों की सरकारों के बीच संबंध तब तक नहीं सुधरेंगे, जब तक लोगों से लोगों तक के संबंधों में परिवर्तन नहीं लाया जाएगा। नाथूला पास को पिछले साल यात्रा के दौरान बंद कर दिया गया था। मुझे खुशी है कि दोबारा इसे यात्रा के लिए खोला गया है।”

बता दें कि डोकलाम विवाद के बाद चीन ने कैलास मानसरोवर यात्रा जाने वाले भारतीय श्रद्धालुओं के लिए नाथूला पास को बंद कर दिया था। सुषमा स्वराज ने उसी के बाद चीन के समकक्ष से बात की थी। विदेश मंत्रालय के अनुसार, 1580 श्रद्धालु इस साल कैलास की यात्रा पर रवाना होंगे। ये जत्थे दो रूट से यात्रा पर जाएंगे, जिनमें सिक्किम का नाथूला दर्रा और उत्तराखंड का लिपुलेख दर्रा शामिल है। यह यात्रा चार महीने तक चलेगी।

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