भगवान शिव के दर्शन के लिए उत्तराखंड के केदारनाथ आए गुजरात के एक बुजुर्ग श्रद्धालु का बुधवार को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया, लेकिन दुख में डूबे उनके परिवार को शव को वहां से 10 मिनट की दूरी पर स्थित गौरीकुंड तक ले जाने के लिए घंटों तक इंतजार करना पड़ा।

परिजनों ने दावा किया कि शव ले जाने के लिए उन्हें न केवल पांच घंटे से अधिक समय तक हेलीकाप्टर का इंतजार करना पड़ा, बल्कि उसके लिए 65 हजार रुपए भी खर्च करने पड़े। गुजरात के वडोदरा से आए 69 वर्षीय दिलीप भाई मन्नू माली अपने बेटे हेमंत तथा दो अन्य परिजनों के साथ बाबा केदारनाथ के दर्शन करने के लिए पहुंचे थे लेकिन सुबह आठ बजे मंदिर के कपाट खुलने से पहले ही वह वाइट हाउस क्षेत्र में अचानक बेहोश हो गए।

परिवार ने बताई आपबीती

हेमंत ने बताया कि बेहोश होने के बाद उनके पिता को केदारनाथ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया जहां सुबह साढ़े सात बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय प्रशासन से मदद की गुहार लगाने के बावजूद परिवार घंटों तक वहीं फंसा रहा। हेमंत ने कहा कि हमने जिलाधिकारी से पिता का शव ले जाने के लिए हेलीकाप्टर उपलब्ध कराने का अनुरोध किया जिसके लिए उन्होंने आश्वासन भी दिया, लेकिन दोपहर एक बजे हेलीकाप्टर का इंतजाम हो पाया।

हेमंत ने यह भी कहा कि केदारनाथ के आधार शिविर गौरीकुंड के पास जामू तक शव ले जाने के लिए उन्हें निजी हेलीकाप्टर कंपनी को 65 हजार रुपए का भुगतान भी करना पड़ा। हेलीकाप्टर उपलब्ध कराए जाने में देरी के संबंध में केदारनाथ यात्रा के नोडल अधिकारी और उखीमठ के उप जिलाधिकारी अनिल सिंह रावत ने कहा कि उस समय नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) द्वारा सुरक्षा निरीक्षण प्रोटोकाल के कारण हेलीकाप्टर सेवाएं अस्थायी रूप से रुकी हुई थीं। उन्होंने कहा कि उस समय कई कंपनियों के हेलीकाप्टर की परीक्षण उड़ान संचालित हो रही थी।

अधिकारियों की सफाई

एनओसी मिलने के बाद केदारनाथ के लिए हवाई सेवाएं शुरू हुर्इं। पिछले साल उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) ने एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की थी जिसमें हिमालयी तीर्थस्थल से मृत श्रद्धालुओं के हवाई परिवहन को प्राथमिकता दी गई है। रुद्रप्रयाग जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र के अधिकारियों ने बताया कि यात्रा प्रबंधन बल योजना के तहत चिकित्सा आपात स्थितियों में हेलीकाप्टर के उपयोग को प्राथमिकता दी जाती है और शव को ले जाना संसाधनों की उपलब्धता पर निर्भर करता है। रुद्रप्रयाग प्रशासन की ओर से केदारनाथ की पैदल यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं की स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था भी की गई है।

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