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Maharashtra: गतिरोध के लिए शिवसेना जिम्मेदार, उद्धव ने नहीं उठाया मेरा फोन; इस्तीफा देने के बाद फडणवीस ने यूं कही ‘मन की बात’

मुख्यमंत्री ने राज्यपाल से मिलने के बाद मीडिया के सामने अपने मन की बात कही। इसमें उन्होंने साफ तौर पर महाराष्ट्र में सरकार नहीं बना पाने के लिए शिवसेना को जिम्मेदार ठहराया। कहा कि पुत्रमोह में शिवसेना ने गठबंधन में दरार लगाई। उन्होंने कहा कि शिवसेना का रवैया बहुत ही अपमानजनक रहा।

Author मुंबई | Updated: November 8, 2019 7:25 PM
देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को सीएम पद से इस्तीफा दे दिया, पर वे सूबे के कार्यवाहक CM बने रहेंगे। (फोटो सोर्स – ANI)

कई दिनों की कयासबाजी के बाद अंतत: महाराष्ट्र में बीजेपी शिवसेना के बीच दूरियां खुलकर सामने आ गईं। शुक्रवार शाम मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस राजभवन पहुंचे और राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को अपना इस्तीफा सौंप दिया। मुख्यमंत्री ने राज्यपाल से मिलने के बाद मीडिया के सामने अपने मन की बात कही। इसमें उन्होंने साफ तौर पर महाराष्ट्र में सरकार नहीं बना पाने के लिए शिवसेना को जिम्मेदार ठहराया। कहा कि पुत्रमोह में शिवसेना ने गठबंधन में दरार लगाई। उन्होंने कहा कि शिवसेना का रवैया बहुत ही अपमानजनक रहा।

देवेंद्र ने कहा, शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के साथ करीबी संबंध है : देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के साथ उनके बहुत करीबी संबंध हैं और यह जारी रहेगा। उन्होंने अपना दर्द साझा करते हुए कहा, ”  मैंने उन्हें कई बार फोन किया लेकिन उन्होंने अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है।” उन्होंने कहा कि वह बाला साहेब ठाकरे का बहुत सम्मान करते हैं। कहा कि उन्होंने कभी भी उद्धव ठाकरे के खिलाफ कुछ नहीं कहा, लेकिन पिछले 5 वर्षों में और विशेष रूप से पिछले 10 दिनों में मोदी जी सहित हमारे शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ जिस तरह के बयान दिए गए, वे बहुत ही दुखद हैं।

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ढाई-ढाई साल तक सीएम की बात नहीं हुई थी : बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “मैं फिर यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि यह कभी तय नहीं किया गया था कि ढाई-ढाई साल तक दोनों दलों का सीएम रहेगा। इस मुद्दे पर कभी फैसला नहीं हुआ। यहां तक ​​कि अमित शाह जी और नितिन गडकरी जी ने भी यह कभी नहीं कहा था। ऐसे में इस मुद्दे को लेकर सरकार गठन में बाधा पहुंचाने का कोई मतलब नहीं है।”

चुनाव के बाद ही बन गई थी गतिरोध की स्थिति : दरअसल महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के बाद से ही सरकार बनाने के लिए गतिरोध की स्थिति बन गई थी। किसी भी दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिलने से सरकार बनाने में संख्याबल की समस्या खड़ी हो गई। मतदाताओं ने बीजेपी-शिवसेना को सरकार बनाने के लिए अपना मत दिया था। दोनों दलों के बीच चुनाव पूर्व से ही गठबंधन था। शिवसेना ने बीजेपी के साथ सरकार बनाने के लिए ढाई-ढाई साल का फार्मूला रख दिया। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे का कहना था कि सरकार तभी बनेगी जब बीजेपी यह आश्वासन दे कि ढाई साल उनका मुख्यमंत्री रहेगा और ढाई साल शिवसेना का रहेगा।

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