भारतीय रेलवे ने यात्री सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार के लिए सामान्य डिब्बों में भी हर घंटे सफाई करवाने की योजना तैयार की है। इस योजना के परिणाम अगले छह माह में दिखने लगेंगे। साथ ही माल परिवहन को बेहतर बनाने के लिए नई नीति तैयार की गई है। इस नई नीति की मदद से रेलवे की दक्षता में सुधार आएगा।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि योजना के तहत चलती ट्रेन में शौचालयों व धुलाई पात्रों की नियमित और प्रभावी सफाई, कचरा संग्रहण व निस्तारण, लघु मरम्मत, जलापूर्ति, सुरक्षा उपकरणों की जांच को बेहतर बनाने के लिए प्रशिक्षित कर्मचारी नियुक्त किए जाएंगे। ज्यादा भीड़ होने की स्थिति में सफाई का क्रम हर घंटे होगा। इस योजना में सेवा प्रदाताओं की स्पष्ट जवाबदेही सुनिश्चित होगी। रेलवे लंबी दूरी की ट्रेन के लिए मार्ग-विशिष्ट टीम की तैनाती करेगी। सुधारों को दो वर्षों में चरणबद्ध रूप से लागू किया जाएगा।

साथ ही नियमित समीक्षा की जाएगी। रेलवे ने माल परिवहन को आधुनिक, सक्षम और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए गति शक्ति माल टर्मिनल नीति को और मजबूत किया है। साल 2022 में लागू की गई नीति ने माल टर्मिनल क्षेत्र में बदलाव की शुरुआत की, इसमें अब और विस्तारित किया जा रहा है। पूर्व योजना के तहत टर्मिनल स्वीकृति के लिए स्पष्ट समयसीमा, सामान्य उपयोग सुविधाओं का विकास रेल व्यय, संचालकों पर कर्मचारी शुल्क समाप्त, रेल भूमि पर टर्मिनल स्थापित करने की अनुमति दी गई थी। साथ ही तीन वर्षों में 124 बहु-माध्यम माल टर्मिनलों का विकास किया गया। रेलवे ने अब पांच साल में ऐसे 500 टर्मिनल के विकास का लक्ष्य रखा है।

18 राज्यों में तैयार हुए 124 टर्मिनल की मदद से करीब 200 मिलियन टन प्रतिवर्ष की संभावित वहन क्षमता बढ़ी। इससे अनुमानित 20 हजार करोड़ रुपए के वार्षिक राजस्व की संभावना दर्ज हुई। वहीं अब लागू हुई नई नीति के तहत रेल भूमि पर गोदाम, प्रसंस्करण इकाइयां और एकत्रीकरण केंद्र विकसित करने की अनुमति दी जाएगी। कम उपयोग में आने वाले माल शेड को गति शक्ति टर्मिनल में विकसित करने का प्रावधान होगा। वहीं 50 वर्षों की दीर्घकालीन अनुबंध व्यवस्था होगी। यह पहले करीब 35 साल की थी।

रेल मंत्री ने बताया कि नई नीति के लागू होने से सड़क, बंदरगाह और औद्योगिक गलियारों के साथ रेल संपर्क को सुदृढ़ कर बहु-माध्यम माल ढुलाई को बढ़ावा दिया जा सकेगा, इससे खर्च में कमी आएगी। प्रदूषण के स्तर में भी सुधार होगा। माल गतिविधियों के एकीकरण से परिवहन लागत में कमी आएगी। सुनिश्चित माल भाड़ा के माध्यम से रेलवे राजस्व में भी वृद्धि होने का अनुमान है। बीते साल रेलवे ने थोक सीमेंट परिवहन नियम को लागू किया। इस योजना से भारी माल ढुलाई को प्रोत्साहन मिला। कई राज्यों में सीमेंट के दाम में कमी आई।