West Bengal News: भारतीय जनता पार्टी के नेता स्वपन दासगुप्ता ने गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस के अंदर गहराते संकट पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए अपनी पार्टी को दलबदलुओं को गले लगाने के खिलाफ चेतावनी दी। ऐसा इस वजह से क्योंकि विपक्षी दल 2026 के विधानसभा चुनावों में अपनी हार के बाद अभूतपूर्व आंतरिक विद्रोह से जूझ रहा है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में दासगुप्ता ने कहा कि वह टीएमसी के भीतर की उथल-पुथल से दुखी नहीं हैं, लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बीजेपी को अवसरवादी राजनीतिक गठबंधनों के प्रति सतर्क रहना चाहिए।
टीएमसी के पतन से मुझे कोई दुख नहीं- स्वपन दासगुप्ता
स्वपन दासगुप्ता ने लिखा, “टीएमसी के इस पतन पर मुझे कोई दुख नहीं है। मेरी एकमात्र आशा यही है कि इन उपद्रवियों की राजनीतिक संस्कृति पश्चिम बंगाल भाजपा को दूषित न करे। भाजपा में हमें उन झूठे मित्रों से हमेशा सावधान रहना होगा जो आज अपने अतीत के पापों को धोने के लिए हमारे करीब आ रहे हैं। बंगाल का शुद्धिकरण अधूरा नहीं छोड़ा जा सकता।”
ऋतब्रत बनर्जी को टीएमसी के 58 विधायकों ने चुना विपक्ष का नेता
पश्चिम बंगाल में 15 साल सत्ता में रहने के बाद सत्ता गंवाने के कुछ ही दिनों बाद टीएमसी विधायक दल में नाटकीय विभाजन के बीच उनकी ये टिप्पणियां सामने आईं। पार्टी नेतृत्व के लिए एक बड़ा झटका देते हुए टीएमसी के 80 विधायकों में से 58 ने कथित तौर पर विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्रनाथ बोस से संपर्क किया और टीएमसी विधायक दल पर अपना दावा पेश करते हुए हाल ही में निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता चुना।
इस घटनाक्रम ने डायमंड हार्बर के सांसद अभिषेक बनर्जी को प्रभावी रूप से अलग-थलग कर दिया है और बागी विधायकों ने सार्वजनिक रूप से घोषणा कर दी है कि आगे चलकर उनकी न तो विधानमंडल दल में और न ही संगठनात्मक संरचना में कोई भूमिका होगी।
विद्रोह के बावजूद बागी गुट का कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी उनकी नेता बनी रहेंगी। गुट ने प्रस्ताव दिया है कि वे विधानसभा में विपक्ष का मार्गदर्शन करने के लिए मुख्य सलाहकार के रूप में कार्य करें। इस बीच, टीएमसी हाईकमान ने स्पीकर को सौंपे गए हस्ताक्षरों में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए इस कदम की वैधता को चुनौती दी है। पार्टी के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने दावा किया कि दोनों गुटों द्वारा प्रस्तुत किए गए अलग-अलग पत्रों पर कई विधायकों के हस्ताक्षर थे और कहा कि इस मामले की कानूनी जांच की जरूरत होगी।
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पश्चिम बंगाल चुनाव में बीजेपी से करारी हार के एक महीने के अंदर ही तृणमूल कांग्रेस (TMC) में बगावत हो गई है। टीएमसी में हुई टूट ने ना केवल संगठनात्मक नेतृत्व को हिला दिया है बल्कि पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के साथ अब कुछ ही नेता बचे हैं। इनमें से अधिकतर टीएमसी मुखिया के पुराने वफादार माने जाते हैं। यहां क्लिक कर पढे़ं पूरी खबर…
