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नेहरू की धरोहर पर ‘हमले’ के खिलाफ उठी आवाज

देश की मौजूदा सरकार और देश की पहली सरकार के बीच तनातनी का रिश्ता गहराता जा रहा है। नेहरू बनाम मोदी की विचारधारा की जंग में नया नाम जुड़ा है नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी (एनएमएमएल) का....

हालांकि बाद में केंद्र सरकार और एनएमएमएल ने अपनी वेबसाइट पर कहा कि वे म्यूजियम में नेहरू के समय और प्रभाव को और प्रभावी तरीके से दिखाएंगे।

देश की मौजूदा सरकार और देश की पहली सरकार के बीच तनातनी का रिश्ता गहराता जा रहा है। मोदी सरकार के आने के बाद से नेहरू की विरासत को कमतर करने और उसे बचाने को लेकर सरकार, विपक्ष और बुद्धिजीवी आमने-सामने हैं। नेहरू बनाम मोदी की विचारधारा की जंग में नया नाम जुड़ा है नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी (एनएमएमएल) का।

उल्लेखनीय है कि केंद्रीय संस्कृति मंत्री महेश शर्मा ने हाल में कहा था कि सांस्कृतिक संगठनों व निकायों में आमूल-चूल परिवर्तन करते हुए उनके मंत्रालय ने गांधी स्मृति, नेहरू मेमोरियल म्यूजियम व लाइब्रेरी और ललित कला अकादमी सरीखी 39 संस्थाओं व म्यूजियमों में जबरदस्त फेरबदल करके उनमें मोदी सरकार के क्रिया-कलापों समेत आधुनिक भारतीय घटकों का समावेश करने का फैसला किया है। हालांकि बाद में शर्मा और एनएमएमएल ने अपनी वेबसाइट पर कहा कि वे म्यूजियम में नेहरू के समय और प्रभाव को और प्रभावी तरीके से दिखाएंगे।

केंद्रीय मंत्री का बयान बुद्धिजीवियों और कांग्रेस को नागवार गुजरा है। पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल गोपालकृष्ण गांधी और फिल्मकार गिरीश कर्नाड समेत चार प्रमुख बुद्धिजीवियों ने शनिवार को कहा कि सरकार के एक हिस्से के गैरजिम्मेदाराना बयानों से नेहरू स्मारक म्यूजियम और लाइब्रेरी की भूमिका और साख खतरे में पड़ी है। सरकार को इस संस्था में कोई भी फेरबदल करने से पहले सार्वजनिक चर्चा करानी चाहिए।

गोपालकृष्ण गांधी, गिरीश कर्नाड, इतिहासकार रोमिला थापर और शोधकर्ता अनन्या वाजपेयी ने अपने साझा बयान में कहा- ये सभी भारतीय नागरिकों के लिए खुली स्वायत्तशासी संस्थाएं और जनसंसाधन हैं, किसी राजनीतिक पार्टी, तत्कालीन सरकार, विचारधारात्मक गिरोह, या इस अथवा उस मंत्रालय के विभाग की संपत्ति या जागीर नहीं हैं।

इन बुद्धिजीवियों ने कहा कि तीनमूर्ति लाइब्रेरी के आवश्यक कार्य, हैसियत और स्वायत्तता को नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता या विकृत नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा- हमें अंदेशा है कि सरकार के कुछ हिस्सों से आने वाले गैरजिम्मेदाराना किस्म के बयानों से नेहरू मेमोरियल म्यूजियम और लाइब्रेरी की भूमिका और साख को खतरा है। इन बुद्धिजीवियों ने कहा कि उच्च शिक्षा की सर्वाधिक मूल्यवान संस्थाओं में किसी फेरबदल के लिए प्राधिकृत करने से पहले इतिहासकारों, संरक्षणकर्ताओं, शिक्षाविदों, सांस्कृति नीति-निर्माताओं और दूसरे हितग्राहियों को शामिल करते हुए सार्वजनिक चर्चा होनी चाहिए। बयान में कहा गया है कि लाइब्रेरी और म्यूजियम वामपंथ और दक्षिणपंथ के मतभेदों से ऊपर है।

इसमें कहा गया कि सरकार चाहे तो और भी ज्यादा बड़ी और बेहतर लाइब्रेरियां और नई प्रौद्योगिकियों से लैस उन्नत म्यूजियम बनाए, जिनका सभी स्वागत करेंगे। कांग्रेस ने भी इस कदम को द्वेषपूर्ण बताते हुए कहा कि पार्टी इसका विरोध करेगी। इसके पहले भी पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू के विकिपीडिया पेज में फेरबदल करने को लेकर विवाद हुआ था। नेशनल इनफॉर्मेटिक्स सेंटर (एनआइसी) ने यह सूचना देने से इनकार कर दिया था कि नेहरू को बदनाम करने वाली सूचनाएं किसने डाली थीं। एनआइसी का कहना था कि ऐसा करने से सुरक्षा को लेकर उलझाव पैदा होगा।

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