ताज़ा खबर
 

दिल्‍ली मेरी दिल्‍ली

हमेशा की तरह यहां अस्थायी लाइसेंस लेकर तीन दिनों के लिए दुकान लगाने वाले कारोबारी दिल्ली गाजियाबाद के थोक पटाखा कारोबारियों से करीब एक महीने पहले खरीदकर अपने घरों में लाकर रखते हैं। पुलिस प्रशासनिक साठगांठ के जरिए इन्हीं पटाखे की दुकान के आवेदकों ने छुड़ाने वालों की राह आसान की है।

दिल्ली मेरी दिल्ली।

खूब छूटे पटाखे

रोक के बावजूद औद्योगिक महानगर में बड़ी मात्रा में चले पटाखों ने प्रशासनिक रोकथाम व्यवस्था की पोल खोल दी है। हालांकि पुलिस कार्रवाई की आशंका से डरे लोगों को पहले पटाखे नहीं चलने या मिलने की उम्मीद थी। लेकिन यह आशंका सही साबित नहीं हुई। बताया गया है कि शहर में दिवाली पर दुकान लगाने के इच्छुक लोगों का ब्यौरा पुलिस और दमकल विभाग के अधिकारियों के पास उपलब्ध था।

चूंकि आवेदनों के जमा होने के ठीक एक दिन बाद ही एनजीटी के आदेश पर रोक लग गई थी। हमेशा की तरह यहां अस्थायी लाइसेंस लेकर तीन दिनों के लिए दुकान लगाने वाले कारोबारी दिल्ली गाजियाबाद के थोक पटाखा कारोबारियों से करीब एक महीने पहले खरीदकर अपने घरों में लाकर रखते हैं। पुलिस प्रशासनिक साठगांठ के जरिए इन्हीं पटाखे की दुकान के आवेदकों ने छुड़ाने वालों की राह आसान की है।

कौन भरोसेमंद

अदालत की सख्ती ने सिख मतदाताओं को सजग कर दिया। हालांकि, इसके साथ उनकी यह दुविधा भी बढ़ा दी है कि वे किस पर भरोसा करें। ‘सच्चा कौन’ परखने की दुविधा। दरअसल गुरुद्वारा के चढ़ावे में घपले पर आरोप प्रत्यारोप के बीच जब अदालत ने दोनों गुट के खिलाफ प्राथमिकी के आदेश दिए तो सिख समाज में ये बहस छिड़ गई कि वे किसे सही समझें। आगामी चुनाव में वे किसे प्रधान चुनें। क्योंकि मौजूदा प्रधान और पूर्व प्रधान दोनों पर गबन में प्राथिमिकी दर्जगी के आदेश अदालत ने दिए हंै।

दिल्ली की कमेटी का सत्तारूढ़ गुट हो या सत्ता से बाहर हो चुका विरोधी गुट, दोनों हमाम में नंगे दिखाई देने लगे हैं। अब आरोप तो साबित होने में समय लगेगा, लेकिन गुरुद्वारा चुनाव तो सामने हैं। एसे में सिख वोटर ‘कौन भरोसेमंद’ के द्वंद से जूझते नजर आ रहे हंै।

कोरोना का डर

दिल्ली में दीपावली आयोजन के साथ अब लोगों का जुटना शुरू हो गया है। इसी पहल में हाल ही में भारतीय जनता पार्टी ने एक दीपावली आयोजन किया। इस आयोजन में बचाव करते हुए नेता पहुंचे तो पार्टी के एक वरिष्ठ उपाध्यक्ष बिना खाना खाए ही लौट आए। दरसअल उनको दिल्ली में तेजी से बढ़ रहे कोरोना प्रकोप का डर था। दबी आवाज में दोस्तों से इसकी चर्चा जरूर की, पर पार्टी के शीर्ष नेताओं के आगे अपने बचाव का अंदाज दबा गए।

दो गज की दूरी फेल

राजधानी में भौतिक दूरी का पालन करते हुए सरकारी एजंसियों ने सभी गतिविधियों को मंजूरी दी है। दीपावली, धनतेरस के त्योहार पर यह दूरी धरी की धरी रह गई। बाजारों में सरकारी मानदंड फेल हो गए और दिल्ली वाले बिना मास्क के बाजारों में नजर आए। यह सब कोरोना की तीसरी लहर में हुआ और सारी सरकारी व्यवस्थाओं के ही होश उड़ गए।

-बेदिल

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 Ministry of Ayush में मीडिया कंसल्टेंट के FB पर मिले हिंदू और मोदी विरोधी पोस्ट्स, फोटो शेयर बोले लोग- हाइरिंग से पहले मंत्रालय नहीं करता जांच?
2 Bihar Election Results: पहले से रची गई साजिश का शिकार हुई JDU- बोले पूर्व सांसद पवन वर्मा, जानिए क्यों
3 PM मोदी की बातों में न रहा दम? इकनॉमी, LAC, बेरोजगारी और COVID-19 पर ‘परफॉर्मेंस रिपोर्ट’ पस्त; समझें क्या कहते हैं आंकड़े
यह पढ़ा क्या?
X