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सोशल मीडिया पर दलित समुदाय के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने पर हो जाएगी जेल

एक महिला की ओर से अपनी एक रिश्तेदार महिला के खिलाफ दर्ज कराई गई प्राथमिकी निरस्त करते हुए न्यायालय ने यह टिप्पणी की।
Author नई दिल्ल | July 5, 2017 02:55 am
दलित समुदाय के लोग। (प्रतिकात्मक फोटो)

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि फेसबुक जैसे सोशल मीडिया पर दिए गए अभद्र बयान, चाहे निजी हों या सार्वजनिक और अनुसूचित जाति (एससी) या अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदाय के किसी व्यक्ति को अपमानित करने की मंशा से दिए गए हों तो वह दंडनीय अपराध होंगे। एक महिला की ओर से अपनी एक रिश्तेदार महिला के खिलाफ दर्ज कराई गई प्राथमिकी निरस्त करते हुए न्यायालय ने यह टिप्पणी की। न्यायमूर्ति विपिन सांघी ने कहा कि सभी के खिलाफ दिया गया कोई सामान्यीकृत बयान, जो अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति समुदाय के व्यक्ति पर लक्षित नहीं हो, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (उत्पीड़न रोकथाम) कानून की धारा 3(1)(7) के तहत अपराध नहीं होगा ।

अदालत ने कहा, ‘मेरे ख्याल से इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा कि अभद्र पोस्ट लिखने वाले ने (सोशल मीडिया अकाउंट की) प्राइवेसी सेटिंग निजी कर रखी है या सार्वजनिक ।’’ न्यायमूर्ति सांघी ने कहा, ‘कानून की धारा 3(1)(7) के तहत यह जरूरी नहीं है कि अनुसूचित जनजाति समुदाय के व्यक्ति की मौजूदगी में ही जानबूझकर अपमान किया गया हो या अपमान की मंशा से धमकाया गया हो।’ हाई कोर्ट ने कहा, ‘यदि पीड़ित, जो अनुसूचित जनजाति समुदाय का व्यक्ति है, मौजूद नहीं है और उसके पीठ पीछे उसे सार्वजनिक तौर पर अपमानित करने की मंशा से टिप्पणी की गई है तो कानून लागू होगा।’

अदालत ने कहा कि सामान्यीकृत तौर पर सभी के खिलाफ दिया गया कोई बयान, जो अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के किसी व्यक्ति पर लक्षित नहीं हो, कानून की धारा 3(1)(7) के तहत अपराध नहीं होगा । एक महिला की ओर से अपनी एक रिश्तेदार महिला के खिलाफ दर्ज कराई गई प्राथमिकी निरस्त करते हुए न्यायालय ने यह टिप्पणी की। शिकायतकर्ता ने कहा था कि आरोपी महिला ने ‘धोबी’ समुदाय के खिलाफ फेसबुक पर अभद्र टिप्पणी की थी।

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