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बीजेपी शासित राज्य के उपमुख्यमंत्री बोले- नए कृषि कानूनों में काफी संशोधन की है जरूरत, किसानों से मांगे सुझाव

हरियाणा के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला का कहना है कि नए कृषि कानूनों में कई संशोधनों की जरूरत है और किसानों से अपील है कि इस मामले में अहम सुझाव दें।

farmers protestहरियाणा के उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला। (ANI)

हरियाणा के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला का कहना है कि नए कृषि कानूनों में कई संशोधनों की जरूरत है और किसानों से अपील है कि इस मामले में अहम सुझाव दें। उन्होंने कहा कि कृषि कानूनों में बदलाव किए जाने की जरूरत है और इस संबंध में केंद्र सरकार को लिखित सुझाव दिए गए हैं और केंद्र ने भी इस पर सहमति जताई है।

दुष्यंत चौटाला ने कहा कि किसानों की यूनियनों को कानून में संशोधन के रास्ते को चुनना चाहिए। उन्होंने आग्रह किया कि किसान ठोस सुझाव दें। उन्होंने मामले में मध्यस्थ बनने की पेशकश भी की।

चौटाला ने “राजनीतिक फायदे के लिए किसानों का इस्तेमाल” करने के लिए विपक्षी दलों पर भी हमला किया और दोहराया कि वह उस दिन इस्तीफा दे देंगे जब उन्हें लगेगा कि वे हरियाणा में किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) सुनिश्चित करने में असमर्थ हैं।

जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) के नेता ने कहा, “कांग्रेस नेता गर्मियों और सर्दियों की फसलों के नाम नहीं जानते। वे किसानों का समर्थन करने के नाम पर राजनीति कर रहे हैं।”  “किसानों को केंद्र से बात करनी चाहिए। कोई भी बातचीत के बिना समाधान नहीं ढूंढ सकता है … मेरा मानना ​​है कि कानूनों को कई संशोधनों की आवश्यकता है। केंद्र एमएसपी (न्यूनतम समर्थन) के लिए लिखित आश्वासन देने के लिए तैयार है।”

ऐसा माना जा रहा है कि JJP पर राज्य की खट्टर सरकार से समर्थन खींचने का दबाव है। इस पर चौटाला ने गुरुवार को कहा कि वे अपने सहयोगी बीजेपी के साथ हैं। सरकार पर कोई दबाव नहीं है।

चौटाला ने गुरुवार को 40 यूनियनों के नेताओं से आग्रह किया कि वे किसानों की भलाई के बारे में सोचें और बातचीत शुरू करें। बता दें कि चौटाला को राज्य में एक यात्रा के दौरान बहिष्कार का सामना करना पड़ा। उनकी यात्रा के लिए बनाए गए हेलीपैड को किसानों ने खोद दिया था।

बता दें कि लाखों किसान पिछले 28 दिनों से दिल्ली की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और तीन कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि वे सरकार के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं लेकिन सरकार को “खुले दिमाग” के साथ आना चाहिए।

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