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देवरिया शेल्‍टर होम में भी ज‍िस्‍मफरोशी रैकेट, मंत्री की सफाई से कठघरे में योगी सरकार

मामले का खुलासा तब हुआ जब एक बच्‍ची किसी तरह से निकल भागी और पुलिस को पूरी बात बताई। उसने कहा कि उन्‍हें नौकरों की तरह रखा जाता था। कारें आती थीं और 15 साल से अधिक उम्र की लड़कियों को ले जाती थीं। अगले दिन लड़कियां रोती हुई वापस आती थीं।

उत्‍तर प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री रीता बहुगुणा जोशी और मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ। (Photo : Express Archive)

बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित शेल्‍टर होम में बच्चियों के यौन शोषण का मामला सामने आने के बाद उत्‍तर प्रदेश के देवरिया में भी ऐसा ही मामला सामने आ रहा है। पुलिस ने एक शेल्‍टर होम की संचालिका और उसके पति का गिरफ्तार किया है। सरकार ने कार्रवाई करते हुए डीएम सुजीत कुमार को हटा दिया है, इस‍के अलावा डीपीओ प्रभात कुमार को सस्‍पेंड कर दिया गया है। प्रमुख सचिव महिला और बाल कल्याण रेणुका कुमार को दो दिन में जांच कर रिपोर्ट देने को कहा गया है।केंद्रीय अन्‍वेषण ब्‍यूरो (सीबीआई) की जांच के बाद इस शेल्‍टर होम का लाइसेंस रद्द कर दिया गया था। हालांकि पुलिस ने जब छापेमारी की तो उसे वहां से 24 नाबालिग लड़कियां मिलीं। इसके अलावा 15 अन्‍य की तलाश की जा रही है। मामले का खुलासा तब हुआ जब एक बच्‍ची किसी तरह से निकल भागी और पुलिस को पूरी बात बताई।

एसपी रोहन कनाय ने एएनआई को बताया, ”शेल्‍टर होम से भागी एक लड़की ने हमें बताया कि उन्‍हें नौकरों की तरह रखा जाता था। उसने कहा कि कारें आती थीं और 15 साल से अधिक उम्र की लड़कियों को ले जाती थीं। अगले दिन लड़कियां रोती हुई वापस आती थीं।” मामला सामने आते ही यूपी के राजनैतिक हलकों में बवाल मच गया है। मीडिया से बातचीत में महिला एवं बाल कल्‍याण मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने कहा कि इस शेल्‍टर होम को बंद करने के आदेश दिए गए थे, मगर उसका पालन नहीं किया गया।

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जोशी ने कहा, ”पिछले साल सीबीआई जांच के बाद, यह तय हो गया था कि देवरिया शेल्‍टर होम गैरकानूनी तरीके से चल रहा था। बंदियों को दूसरी जगह शिफ्ट कर इसे बंद करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन इसका पालन नहीं हुआ।। एक अगस्‍त को, इसे बंद कराने के लिए एफआईआर दर्ज कराई गई क्‍योंकि यहां कई गलत काम हो रहे थे। रिकॉर्ड्स में मौजूद बच्‍चों में से कई यहां नहीं मिले। रविवार को एक बच्‍ची को बचाया गया जिसने शिकायत की है।”

प्रदेश के एडीजी (कानून-व्‍यवस्‍था) का कहना है कि मामले की जांच की जाएगी। उन्‍होंने कहा, ”जिला प्रशासन पहले ही इस संबंध में कार्रवाई कर रहा है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय भी इस मामले को देख रहा है। बच्‍चों को मेडिकल एग्‍जामिनेशन के लिए भेजा जाएगा।”

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