सीरम को झटका: तीन देशों ने कोविशील्ड का इस्तेमाल रोका, कोरोना टीका लेने के बाद कुछ लोगों में बना था खून का थक्का

डेनमार्क, नॉर्वे, आइसलैंड ने गुरुवार से कोविशील्ड के इस्तेमाल को तत्काल प्रभाव से रोक दिया है। इन देशों में कोविड-19 की वैक्सीन AstraZeneca लेने के बाद कुछ लोगों में खून का थक्का बना था। उसके बाद यह फैसला लिया गया।

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महिला को कोरोना की वैक्सीन लगाते हेल्थ वर्कर (फोटोः ट्विटर@rashtrapatibhvn)

डेनमार्क, नॉर्वे, आइसलैंड ने गुरुवार से कोविशील्ड के इस्तेमाल को तत्काल प्रभाव से रोक दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन देशों में कोविड-19 की वैक्सीन AstraZeneca लेने के बाद कुछ लोगों में खून का थक्का बना था, उसके बाद यह फैसला लिया गया। हालांकि, भारत अभी भी इस वैक्सीन का इस्तेमाल कर रहा है। नेशनल एक्सपर्ट पैनल के मुताबिक, उन मामलों पर बारीकी से निगाह रखी जा रही है, जिनमें वैक्सीन लेने के बाद मरीज को अस्पताल में दाखिल कराया गया। वैक्सीन के बाद जिनकी मौत हुई उन मामलों का भी अध्ययन पैनल कर रहा है।

AstraZeneca को सीरम इंस्टीट्यूट ने तैयार किया है। AEFI पैनल के नरेंद्र अरोड़ा ने बताया कि उन्हें तीन देशों के फैसले के बारे में पता चला है। फिलहाल उन मामलों का अध्ययन किया जा रहा है, जिनमें कोविशील्ड वैक्सीन लेने के बाद खून का थक्का बना था। उधर, यूरोपियन मेडिसिन रेगुलेटर EMA का कहना है कि इस तरह के मामलों की निगरानी की जा रही है। उनका कहना है कि अभी निगरानी की जा रही है कि क्या वैक्सीन लेने वाले ज्यादा लोगों में खून का थक्का तो नहीं बन रहा है।

डेनमार्क ने वैक्सीन देने पर दो सप्ताह के लिए रोक लगाई है। वहां एक 60 साल की महिला को आस्ट्रिया बैच की वैक्सीन लगाई गई थी। महिला के खून का थक्का बना और उसकी मौत हो गई। डेनमार्क की हेल्थ मिनिस्टर मेगनस हेनिके ने ट्विटर पर लिखा, अभी यह नहीं कहा जा सकता कि वैक्सीन ही मौत के लिए जिम्मेदार है, लेकिन फिर भी वैक्सीन लगाने का काम 14 दिनों के लिए लंबित कर गिया गया है। नॉर्वे FHI के निदेशक गाइर बकहोल्म का कहना है कि फैसला एहतियात के तौर पर लिया गया है। वह नहीं कह सकते कि वैक्सीन दोबारा कब लगेंगी।

आइसलैंड ने भी वैक्सीन लगाने का काम स्थगित कर दिया है। वह EMA की रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। आस्ट्रिया पहले ही इसके इस्तेमाल पर पाबंदी लगा चुका है तो इटली भी ऐसा ही कुछ इशारा कर रहा है। AstraZeneca ने अपने स्टेटमेंट में कहा कि ह्यूमन ट्रायल के दौरान वैक्सीन की सेफ्टी को लेकर बारीकी से काम किया गया था। डेटा बताता है कि वैक्सीन के इस्तेमाल से किसी तरह का साइड इफैक्ट नहीं पैदा होता।

भारत में 1 करोड़ 80 लाख से ज्यादा लोगों को कोरोना की वैक्सीन कोविशील्ड लगाई जा चुकी है। जबकि वैश्विक स्तर पर इसे 2 करोड़ 60 लाख लोगों को दिया जा चुका है। स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि वैक्सीन लेने के बाद मौत होने का मामला अभी तक उनके सामने नहीं आया है। गौरतलब है कि पूरी दुनिया में कोरोना वायरस को खत्म करने के लिए टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। इससे पहले Pfizer और BioNTech द्वारा बनाए गए कोविड -19 टीके को लेकर भी नॉर्वे में सवाल उठे थे। कई लोगों की मौत के बाद वहां की सरकार ने वैक्सीन की पड़ताल का काम शुरू कराया था।

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