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नोटबंदी के बाद पेट्रोल पंपों ने 500, 1000 के कितने नोट लिए, RBI को नहीं पता

रिजर्व बैंक के निदेशक मंडल ने देश की आर्थिक वृद्धि पर नाटेबंदी के अल्पकालीन नकारात्मक प्रभाव को लेकर सरकार को आगाह किया था और कहा था कि इस अप्रत्याशित कदम से कालेधन की समस्या से निपटने में खास मदद नहीं मिलेगी।

Author March 12, 2019 2:37 PM
आरटीआई के जवाब से हुआ खुलासा। (FILE PIC)

आरटीआई के तहत पूछे गए एक सवाल के जवाब में रिजर्व बैंक ने कहा है कि उसके पास ऐसा कोई डाटा नहीं है, जिससे यह पता किया जा सके कि 500 और 1000 रुपए के कितने पुराने नोटों को यूटिलिटी बिल्स जैसे पेट्रोल पंप आदि पर इस्तेमाल किया गया। गौरतलब है कि सरकार ने नोटबंदी के बाद 15 दिसंबर, 2016 तक पुराने नोटों से करीब 23 तरह के यूटिलिटी बिल्स भरने की इजाजत दी थी। वहीं सूचना के अधिकार कानून के तहत पूछे गए एक सवाल के जवाब में खुलासा हुआ है कि 8 नवंबर, 2016 को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी का फैसला किया था। उससे सिर्फ ढाई घंटे पहले आरबीआई के निदेशक मंडल की बैठक हुई थी। इस बैठक में आरबीआई के मौजूदा गवर्नर शक्तिकांत दास भी मौजूद थे।

रिजर्व बैंक के निदेशक मंडल ने देश की आर्थिक वृद्धि पर नाटेबंदी के अल्पकालीन नकारात्मक प्रभाव को लेकर सरकार को आगाह किया था और कहा था कि इस अप्रत्याशित कदम से कालेधन की समस्या से निपटने में खास मदद नहीं मिलेगी। सरकार द्वारा 500 और 1,000 रुपये के नोट को चलन से बाहर करने के कदम का मुख्य मकसद काले धन पर अंकुश लगाना, नकली मुद्रा पर रोक लगाना तथा आतंकवदी संगठनों के वित्त पोषण पर लगाम लगाना आदि था। चलन वाले कुल नोटों में बड़ी राशि के नोट की हिस्सेदारी 86 प्रतिशत थी।

ब्योरे के अनुसार महत्वपूर्ण बैठक में आरबीआई के गवर्नर उर्जित पटेल और तत्कालीन आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास मौजूद थे। इसमें शामिल अन्य सदस्य तत्कालीन वित्त सचिव अंजलि छिब दुग्गल, आरबीआई के डिप्टी गवर्नर आर गांधी और एस एस मूंदड़ा थे। गांधी और मूंदड़ा दोनों अब निदेशक मंडल में शामिल नहीं है। वहीं दास को दिसंबर 2018 में आरबीआई का गवर्नर बनाया गया था। बोर्ड की बैठक में सरकार के नोटबंदी के अनुरोध को मंजूरी दी। आरटीआई कार्यकर्ता वेंकटेश नायक की तरफ से कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनीशिएटिव पर पोस्ट किये गये बैठक ब्योरो के अनुसार, “यह सराहनीय कदम है लेकिन इसका चालू वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद पर अल्पकाल में नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।” निदेशक मंडल की 561वीं बैठक में कहा गया, “ज्यादातर कालाधन नकद रूप में नहीं है बल्कि सोना और अचल सम्पत्ति के रूप में है और इस कदम का वैसी संपत्ति पर ठोस असर नहीं होगा।”


नकली नोट के बारे में बैठक में कहा गया था कि कुल 400 करोड़ रुपये इस श्रेणी के अंतर्गत हैं जो कुल मुद्रा का बहुत कम प्रतिशत है। आठ नवंबर 2016 को 500 और 1,000 रुपये के 15.41 लाख करोड़ रुपये मूल्य के नोट चलन में थे। इसमें से बैंकों में चलन से हटाये गये नोट को जमा करने के लिये देश के नागरिकों को दिये गये 50 दिन के समय में 15.31 लाख करोड़ रुपये वापस आ गये। प्रवासी भारतीयों के लिये यह समयसीमा जून 2017 थी।

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