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नोटबंदी और जीएसटी से छोटे उद्योगों पर तगड़ा असर, डिफॉल्‍टरों की संख्‍या साल भर में दोगुनी

आरटीआई से मिले जवाब में आरबीआई ने बताया है कि लोन डिफॉल्ट्स के मामले बीते साल मार्च से ज्यादा बढ़े हैं। गौरतलब है कि सूक्ष्म और लघु उद्योगों के लोन डिफॉल्ट्स में से 65.32 प्रतिशत हिस्सा सरकारी बैंकों का है।

Author September 3, 2018 1:17 PM
रिजर्व बैंक (IMAGE SOURCE-Express photo by pradip das)

George Mathew

देश के सूक्ष्म और लघु उद्योगों को नोटबंदी और बाद में जीएसटी लागू होने से तगड़ा झटका लगा है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के ताजा आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि सूक्ष्म और लघु उद्योगों का लोन डिफॉल्ट मार्जिन मार्च 2017 के 8249 करोड़ रुपए के मुकाबले मार्च 2018 तक बढ़कर 16118 करोड़ रुपए यानि कि लगभग दोगुना हो गया है। यह आंकड़ा “द इंडियन एक्सप्रेस” ने आरटीआई के तहत प्राप्त किया है। आरटीआई से यह भी पता चला है कि सूक्ष्म और लघु उद्योगों का एनपीए 82382 करोड़ रुपए से बढ़कर मार्च 2018 तक 98500 करोड़ रुपए हो गया है। बता दें कि यह लोन सूक्ष्म उद्योगों को प्लांट और मशीनरी में निवेश के लिए दिया जाता है, जो कि 25 लाख से लेकर 5 करोड़ तक हो सकता है।

आरटीआई से मिले जवाब में आरबीआई ने बताया है कि लोन डिफॉल्ट्स के मामले बीते साल मार्च से ज्यादा बढ़े हैं। गौरतलब है कि सूक्ष्म और लघु उद्योगों के लोन डिफॉल्ट्स में से 65.32 प्रतिशत हिस्सा सरकारी बैंकों का है। रिजर्व बैंक के अनुसार, छोटे उद्योगों को दिए जाने वाले आउटस्टैंडिंग एडवांस में पिछले साल के मुकाबले 6.72 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है, जो कि 9,83,655 करोड़ रुपए से बढ़कर 10,49,796 करोड़ रुपए हो गया है। बीते एक साल में छोटे उद्योगों की क्रेडिट ग्रोथ भी काफी बढ़ी है। उल्लेखनीय है कि सरकार ने 8 नवंबर, 2016 को सरकार ने 500 और 1000 के नोटों पर बैन लगा दिया था। अचानक लिए गए इस फैसले से बाजार में नकदी की किल्लत हो गई, जिस कारण देश की जीडीपी को भी 1.5 प्रतिशत का घाटा उठाना पड़ा था। नोटबंदी के इस फैसले से कई सूक्ष्म और लघु उद्योगों को तगड़ा झटका लगा था।

छोटे और मझोले उद्योगों पर की गई आरबीआई की एक स्टडी में खुलासा हुआ है कि नोटबंदी के बाद जीएसटी ने भी इन उद्योगों को काफी बड़ा झटका दिया। आरबीआई की मॉनिटरी पॉलिसी डिपार्टमेंट के हरेंद्र बेहरा और गरीमा वाही का कहना है कि नोटबंदी के बाद गारमेंट बिजनेस और जैम-ज्वैलरी बिजनेस में लगे कॉन्ट्रैक्ट लेबर को नोटबंदी के बाद पेमेंट मिलने में काफी दिक्कतें हुईं। इसी तरह जीएसटी आने के बाद छोटे और मध्यम उद्योगों में अनुपालन लागत काफी बढ़ गई और ऐसे अधिकतर उद्योग टैक्स की सीमा में आ गए।

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