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लंबी चलेगी मुसीबत: दो लाख एटीएम और 3000 तकनीशियन, 7 दिन में केवल 15 हजार मशीनों में हुआ बदलाव

शनिवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि एटीएम में बदलाव के काम में 2 से 3 हफ्ते लग सकते हैं, लेकिन बैंक अधिकारियों का कहना है कि यह उतना भी आसान नहीं है।
देशभर में कुल 2.20 लाख एटीएम हैं। (PTI Photo)

देशभर में 2 लाख से ज्यादा एटीएम हैं और इनमें से हर एक एटीएम में 500 और 2000 रुपए के नए नोट को अनुसार बदलाव किया जाना है। पूरे देश में इस काम के लिए 3000 तकनीशियन की टीम काम कर रही है, हालांकि लोगों को राहत मिलने में अभी काफी समय लगने वाला है। एक सूत्र ने बताया कि पिछले एक हफ्ते में 2.2 लाख में से करीब 15 हजार एटीएम में ही बदलाव किया गया है। बदलाव किए गए एटीएम भी अभी तक सिर्फ बड़े शहरों के हैं। बता दें कि शनिवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि एटीएम में बदलाव के काम में 2 से 3 हफ्ते लग सकते हैं, लेकिन बैंक अधिकारियों का कहना है कि यह उतना भी आसान नहीं है और इस काम में उन्हें कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

इस काम से जुड़े एक सूत्र ने बताया, “एटीएम में मापांकन (recalibration) करने के लिए हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर दोनों में बदलाव करना पड़ता है। वहीं पूरे देश में इस काम के लिए सिर्फ 3000 तकनीशियन लगाए गए हैं। इसके अलावा कई जगहों पर एटीएम में पैसे डालने का काम भी होने लगता है, जिससे काफी समय बर्बाद होता है। देश में अभी तक करीब 15000 या कहें तो 7-8 फीसदी एटीएम में ही बदलाव हो पाया है।” अभी तक जिस-जिस एटीएम को 2000 और नए 500 रुपए के नोट निकालने के लिए तैयार किया गया है, उनमें अभी तक सिर्फ 100 रुपए के नोट ही डाले जा रहे थे।

बैंक अधिकारियों का कहना है कि बदलाव के बाद अब एक और चुनौती सामने आ गई है। अब एटीएम लगभग दो घंटे में ही खाली हो जाता है और उनमें फिर से पैसे डालने पड़ते हैं। दरअसल एक एटीएम में एक बार में सिर्फ 2.5 लाख रुपए तक की रकम डाली जा सकती है और यदि यह 2000 रुपए के ही नोट होंगे तो सिर्फ 125 नोट ही डल सकते हैं। बता दें कि एटीएम में दो और पांच हजार नोट करेंसी रखने के लिए जरूरी बदलाव जरूरी है। नए नियम के मुताबिक एटीएम से एक दिन में प्रतिकार्ड 2500 रुपए निकाले जा सकते हैं, लेकिन यह सुविधा बदलाव किए गए एटीएम में ही मिलेगी।

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  1. M
    manoj
    Nov 16, 2016 at 7:32 am
    १५ साल पहले एटीएम नहीं थे तब देश के व्यवस्था कैसे चलती थी ? लोग समझते हैं इसलिए मोदीजी के साथ हैं ? कुछ दिनों की बात है ? काल धन पर कार्यस्वाहि जरूरी था ? इस एक फैसले से देश बदल जायेगा
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    1. Sidheswar Misra
      Nov 16, 2016 at 4:15 am
      नॉट कांड का निर्णय, इंद्रा गाँधी की याद ताजा हो जाती है. उनके काल में भी कुछ अधिकारी निर्णय लेते थे केबिनेट उसपर मोहर लगाती थी। मोदी जी भी उसी तरह काम करते है। पुरे देश में चलन में जो रुपया है ८६ % बड़ी नॉट ५०० -१००० की शेष बचा १४ % १०० ,५० ,२० १० की जब ८६ % बंद हो गया तो उसकी भर पाई १४ से कैसे होगी। कोई बताये। नए नॉट जो छपा वह भी २००० का। इसका जबाब कोई पत्रकार नहीं लिख रहा है. लालच में लेखन वचन बंद है।
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