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नोटबंदी पर विपक्ष की बैठक: राहुल ने मोदी के ख़िलाफ़ ‘भ्रष्टाचार’ के जांच की मांग की, ममता ने मांगा इस्तीफ़ा

तृणमूल प्रमुख ने कहा कि नोटबंदी कोई सामान्य मुद्दा नहीं है। इस मुद्दे पर हमें जितना आगे जाना होगा... हम आगे जायेंगे।
Author नई दिल्ली | December 27, 2016 19:41 pm
नई दिल्ली में नोटबंदी के खिलाफ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी। (PTI Photo by Manvender Vashist/27 Dec, 2016)

वामदलों, जदयू, सपा, बसपा जैसे दलों के नेताओं की अनुपस्थिति से बेपरवाह कांग्रेस नेता राहुल गांधी, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी एवं कुछ अन्य क्षेत्रीय दलों ने नोटबंदी को विफल करार देते हए 50 दिन में स्थिति सामान्य नहीं होने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से इस्तीफा देने की मांग की। आठ दलों की बैठक के बाद नेताओं ने मोदी के खिलाफ ‘निजी भ्रष्टाचार’ के आरोपों की जांच कराने की मांग की और राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री पद की विश्वसनीयता को ध्यान में रखते हुए इस मामले की ‘स्वतंत्र एवं निष्पक्ष’ जांच कराने की जरूरत है। नोटबंदी के मुद्दे पर संसद में विपक्षी एकजुटता को आगे भी दर्शाने की पहल के तहत कांग्रेस ने विपक्षी दलों की बैठक बुलाई थी जहां ममता बनर्जी ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग करके बाजी मार ली।

राहुल गांधी ने खुद तो प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग नहीं की लेकिन जब उनसे ममता बनर्जी द्वारा प्रधानमंत्री से इस्तीफा मांगने के बारे में बार बार पूछा गया तो उन्होंने कहा कि यह ममताजी का सुझाव है। हम सुझाव का समर्थन करते हैं। यह पूछे जाने पर कि अगर प्रधानमंत्री ने इस्तीफा नहीं दिया तब क्या कदम उठायेंगे, कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा, ‘हम उन पर इस्तीफा देने के लिए दबाव डालेंगे।’ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में राहुल और ममता बनर्जी ने इस मुद्दे पर विपक्षी एकजुटता पर जोर देते हुए ‘साझा न्यूनतम एजेंडा’ पर सहमति की बात कही और वामदलों, जदयू, सपा, बसपा जैसे दलों के नेताओं की अनुपस्थिति को कमतर करने की कोशिश की।

राहुल गांधी ने कहा, ‘हमारा कहना है कि प्रधानमंत्री के शब्दों में वजन होना चाहिए। प्रधानमंत्री ने निजी स्तर पर देश की जनता को नोटबंदी का झटका दिया जिसके बारे में उनके मुख्य आर्थिक सलाहकार, मंत्रिमंडल को पता नहीं था। यह दुनिया में इतिहास का सबसे बड़ा अचानक किया गया वित्तीय प्रयोग है जिसका नुकसान गरीबों, मजदूरों, किसानों को उठाना पड़ा है। अगर प्रधानमंत्री अकेले और कोई नीति बनाते हैं तो देश को बताये कि इसका उद्देश्य क्या है।’ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने कहा कि मोदीजी ने 50 दिन का समय मांगा था। जनता ने मुश्किल सहने के बावजूद उन्हें समय दिया। हमारा देश 20 साल पीछे चला गया है। जीडीपी नीचे जा रहा है। अब सवाल उठता है कि 50 दिन बाद रोक नहीं वापस ली जाती है और स्थिति में कोई सुधार नहीं होता है तब क्या होगा ?

उन्होंने सवाल किया, ‘क्या प्रधानमंत्री इस्तीफा देंगे? 47 दिन गुजर चुके हैं और तीन दिनों में आप कोई जादूगर तो नहीं हैं कि स्थिति बदल दें। ऐसे में क्या आप इस्तीफा देंगे?’ बहरहाल, ममता ने कहा कि नोटबंदी के पीछे कोई छिपा एजेंडा है। ‘मुझे मालूम नहीं है लेकिन आने वाले दिनों में इसके बारे में पता चल जायेगा। अच्छे दिन के नाम पर देश के लोगों को लूट लिया गया।’ प्रधानमंत्री के कैशलेस अर्थव्यवस्था को अपनाने के सुझाव पर तीखा प्रहार करते हुए ममता ने कहा, ‘अमेरिका, जर्मनी में नकदी व्यवस्था चल रही है, कैश चल रहा है। लेकिन हमारे देश में मोदी सरकार कैशलेस के नाम पर ‘फेसलेस’ हो गई है और वह ‘बेसलेस’ भी हो गई है।’

तृणमूल प्रमुख ने कहा कि नोटबंदी कोई सामान्य मुद्दा नहीं है। इस मुद्दे पर हमें जितना आगे जाना होगा… हम आगे जायेंगे। सरकार कर संशोधन विधेयक, निशक्त जनों के सशक्तिकरण के विधेयक के विषय को आगे बढ़ाती है लेकिन नोटबंदी पर संसद में एक शब्द नहीं कहती। केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए ममता ने कहा कि देश की स्थिति काफी खराब हो गई है, कोई देखने वाला नहीं है। जब सरकार कमजोर होती है तब देश भी कमजोर हो जाता है। केंद्र की वर्तमान सरकार ने देश के संघीय ढांचे को पूरी तरह से तहस नहस कर दिया है। अगर आप असम को पैसा देते हैं तो बंगाल को क्यों नहीं देते? उत्तरप्रदेश में चुनाव है तो पैसा दे रहे हैं, फिर बिहार को क्यों नहीं देते।

ममता ने कहा कि नोटबंदी पर संसद को दरकिनार किया जा रहा है, सरकार ने इस मुद्दे पर संसद में एक शब्द नहीं कहा।‘ यह न केवल अनैतिक है बल्कि अवैध भी है। इस सरकार को किसी का भय नहीं है।’ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि यह आपातकाल नहीं बल्कि सुपर आपातकाल की स्थिति है। उन्होंने कहा कि 50 दिनों की समयसीमा तीन दिन बाद खत्म हो जायेगी, जनता से वादा किया है तो वादा निभाना पड़ेगा। प्रधानमंत्री को तीन दिन बाद इस्तीफा देना पड़ेगा। हम लोग इंतजार कर रहे हैं। अगर वादा नहीं निभाया तो जनता आपको निकाल देगी।

राजद के जयप्रकाश नारायण यादव ने कहा कि नोटबंदी के निर्णय के कारण कतार में 130 लोगों की मौत हो चुकी है। 50 दिन होने को हैं और लोगों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। संस्थाएं बर्बाद हो रही हैं, गरीब, किसान, मजदूर परेशान हैं। उद्योगपतियों को माफ किया जा रहा है और गरीबों को साफ किया जा रहा है। द्रमुक के तिरुचि शिवा ने कहा कि प्रधानमंत्री की नोटबंदी की घोषणा के बाद देश में वित्तीय संकट उत्पन्न हो गया है। लोग परेशान हैं। नोटबंदी के फैसले के 50 दिन बाद भी लोगों की परेशानियां कम नहीं हो रही हैं। लोग कतारों में खड़े हैं, एटीएम काम नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बिना सोचे विचारे और बिना तैयारी के किये गए इस फैसले के कारण लोग काफी परेशान है और ऐसी आशंका व्यक्त की जा रही है कि जीडीपी में 2 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है।

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