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नोटबंदी पर वायरल होने वाली तस्‍वीर में दिख रहे बुजुर्ग ने अब किया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन

बिना परिवार के जिंदगी गुजारने वाले नंदलाल को कान से सुनने में थोड़ी परेशानी होती है।

नोदबंदी की घोषणा के बाद पुराने नोट बदलने के लिए बैंक लाइन में खड़े इन बुजुर्ग की तस्वीर वायरल हुई थी। (फोटो सोर्स सोशल मीडिया)

नोटबंदी के दौरान घंटों बैंक लाइन में खड़े रहने के बाद भी पैसे ना मिलने पर एक बुजुर्ग फूट-फूटकर रोने लगे थे। उन दिनों बुजुर्ग की एक तस्वीर ने पूरे देश को झकजोर कर रख दिया। बाद में उनकी पहचान आर्मी से रिटायर्ड जवान नंदलाल (80) के रूप में की गई। तब नोटबंदी का विरोध कर रही विपक्षी पार्टियों ने तस्वीर में नजर आ रहे नंदलाल को नोटबंदी का पीड़ित बताया और केंद्र सरकार से जवाब मांगा। दरअसल नोटबंदी के दौरान नंदलाल गुरुग्राम के एक बैंक से पैसे निकालने के लिए पहुंचे थे। हालांकि नोटबंदी के एक साल बाद जब एक चैनल ने उनकी प्रतिक्रिया जानना चाही तो उन्होंने सरकार के इस फैसले को बिल्कुल सही बताया है। उन्होंने कहा कि अब सब ठीक है। शुरू में परेशानी हुई लेकिन अब कोई परेशानी नहीं। नंदलाल कहते हैं, ‘नोटबंदी से किस को क्या फायदा हुआ ये मुझे नहीं पता। पर पहले मुझे कोई नहीं पूछता था। अब सब पूछते हैं। बैंकवाले भी मेरी बात सुनते हैं। हालांकि अब मैं अपनी मेड को बैंक भेज देता हूं। वो पैसा उसे ही दे देते हैं।’ नंदलाल आगे कहते हैं, ‘सरकार जो भी फैसले करती है वो जनता के हित में करती हैं। मैं सरकार के हर फैसले के साथ खड़ा हूं।’

नंदलाल पिछले साल नोटबंदी के दौरान बैंक लाइन में खड़े थे तब इन्हें किसी ने धक्का दे दिया था। यही नहीं किसी महिला ने उनका पैर भी कुचल दिया। इस बाद भी जब पैसे नहीं मिले तो नंदलाल फूट-फूटकर रोए थे। नोटबंदी आलोचकों ने 80 साल के नंदलाल को अपना पोस्टर ब्यॉय बनाकर खूब हो हल्ला मचाया था।

जानकारी के लिए बता दें कि नंदलाल पाकिस्तान के डेरा गाजी खान से भारत आए थे। साल 1991 में आर्मी से रिटायरमेंट होने वाले नंदलाल के साथ रहने वाला कोई नहीं है। उन्होंने एक बेटी गोद ली थी जिसकी शादी हो चुकी है। यह बेटी नंदलाल से मिलने के लिए कभी कभार आती है। कान से कम सुनने वाले नंदलाल को अपने देश सेवा पर गर्व है। बुजुर्ग नंदलाल गुरुग्राम के भीम नगर इलाके में 8×10 के किराए के कमरे में रहते हैं।

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