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नोटबंदी: राहुल गांधी ने फाइनेंसियल टाइम्‍स में लिखा लेख, नरेंद्र मोदी पर चुन-चुनकर किये वार

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने लिखा, "प्रधानमंत्री दावा कर रहे हैं कि इस फैसले का मकसद भ्रष्टाचार मिटाना था। 12 महीने बाद कोई चीज खत्म हुई है तो वो है एक समय तेजी से विकसित होती भारतीय अर्थव्यवस्था में हमारा भरोसा।"

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी (बाएं) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।

नोटबंदी के एक साल पूरे होने के मौके पर जहां नरेंद्र मोदी सरकार इसकी सफलता का जश्न मनाती दिख रही है वहीं विपक्ष इसकी विफलता को उजागर करने में लगा हुआ है। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने फाइनेंसियल टाइम्स में एक लिख लिख कर नोटबंदी और प्रधानमंत्री की जबरदस्त आलोचना की है। राहुल गांधी ने लिखा है, “एक साल पहले नरेंद्र मोदी ने भारतीय रिजर्व बैंक की अनदेखी करके, अपने मंत्रिमंडल को एक कमरे में बंद करके देश को नोटबंदी के अपने मनमाने और इकतरफा फैसला की सूचना देते हुए केवल चार घंटे की मोहलत दी। रातोरात भारत की 86 प्रतिशत नकदी बंद कर दी गयी।” राहुल ने नोटबंदी को भारतीय अर्थव्यवस्था में आई गिरावट के लिए जिम्मेदार बताया है। राहुल ने लिखा है, “नोटबंदी से भारतीय सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का दो प्रतिशत घट गया, असंगठित क्षेत्र में रोजगार खत्म हो गया, छोटे और मझोले उद्यम बर्बाद हो गये। इसने कड़ी मेहनत करने वाले लाखों गरीबों का जीवन दुश्वार कर दिया।”

राहुल ने पीएम नरेंद्र मोदी के नोटबंदी से भ्रष्टाचार खत्म होने के दावे पर सवाल उठाया। कांग्रेस उपाध्यक्ष ने लिखा, “प्रधानमंत्री दावा कर रहे हैं कि इस फैसले का मकसद भ्रष्टाचार मिटाना था। 12 महीने बाद कोई चीज खत्म हुई है तो वो है एक समय तेजी से विकसित होती भारतीय अर्थव्यवस्था में हमारा भरोसा।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर 2016 को रात आठ बजे सार्वजनिक घोषणा की थी कि उसी रात 12 बजे से उस समय प्रचलित 500 और 1000 रुपये के नोट बेकार हो जाएंगे। पीएम मोदी ने बेकार हो चुके नोटों को बैंकों और डाकघरों में जमा करने और बदलने के लिए 31 दिसंबर तक तक समय दिया था।

राहुल गांधी ने नोटबंदी के साथ ही मोदी सरकार द्वारा एक जुलाई से लागू किए गये वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की आलोचना की। राहुल ने लिखा, “इस साल जल्दबाजी में बगैर पूरी तैयारी के जीएसटी लागू करने भारतीय अर्थव्यवस्था को एक और धक्का दे दिया गया। लालफीताशाही और जटिल होने के कारण इसने रोजगार छीन लिया। इसने नए जमाने का “लाइसेंस राज” ला दिया है जिससे सरकारी अधिकारियों के हाथ में असीमित शक्ति आ गयी है।”

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने लिखा है कि मोदी सरकार ने ये दोनों फैसले ऐसे समय में लिए जब वैश्विक अर्थव्यवस्था भारत के आर्थिक मॉडल से एक खास उम्मीद कर रही थी। कांग्रेस उपाध्यक्ष ने लिखा है कि मोदी सरकार के इस फैसले से चीन को फायदा हुआ है। राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर बेरोजगारी और आर्थिक बदहाली के प्रति उपजे आक्रोश को भटकाने के लिए देश में साप्रंदायिक वैमनस्य को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है।

 

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