आदर्श सोसाइटी की इमारत गिराने का आदेश - Jansatta
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आदर्श सोसाइटी की इमारत गिराने का आदेश

चार पूर्व मुख्यमंत्रियों की नींद उड़ा देनेवाले आदर्श हाउसिंग सोसाइटी घोटाले में बंबई हाई कोर्ट ने शुक्रवार को महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्रालय को 31 मंजिला ‘आदर्श’ सोसाइटी की इमारत को गिराने का आदेश दिया।

Author मुंबई | April 30, 2016 1:53 AM
अपील के लिए मिला तीन महीने का वक्त

चार पूर्व मुख्यमंत्रियों की नींद उड़ा देनेवाले आदर्श हाउसिंग सोसाइटी घोटाले में बंबई हाई कोर्ट ने शुक्रवार को महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्रालय को 31 मंजिला ‘आदर्श’ सोसाइटी की इमारत को गिराने का आदेश दिया। हालांकि आदर्श हाउसिंग सोसाइटी की अर्जी पर एक खंडपीठ ने महाराष्ट्र सरकार के विरोध के बावजूद उसके आदेश पर 12 सप्ताह के लिए रोक लगा दी ताकि वह सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सके।

करगिल में शहीद हुए सैनिकों की विधवाओं की मदद के लिए बनाई जानेवाली आदर्श इमारत के निर्माण में नियमों का जमकर उल्लंघन हुआ था। इस घोटाले ने महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण, विलासराव देशमुख, सुशील कुमार शिंदे और शिवाजीराव निलंगेकर की नींद उड़ा दी थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण को इस घोटाले के कारण अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

बंबई हाई कोर्ट ने दक्षिण मुंबई के कोलाबा इलाके में स्थित 31 मंजिला आदर्श अपार्टमेंट को गिराने का निर्देश देते हुए कहा कि इसका निर्माण अवैध तरीके से हुआ था। अदालत ने यह भी कहा कि अधिकारों के दुरूपयोग के लिए राजनीतिज्ञों और नौकरशाहों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई पर विचार हो। अदालत ने कहा कि इमारत को याचिकाकर्ताओं (आदर्श सोसाइटी) के खर्च पर गिराया जाना चाहिए।

अदालत ने साथ ही केंद्र और महाराष्ट्र सरकार से कहा कि वे नौकरशाहों, मंत्रियों और राजनीतिज्ञों के खिलाफ आदर्श सोसाइटी के लिए उक्त प्लाट प्राप्त करने में विभिन्न अपराधों के लिए एक दीवानी और आपराधिक कार्यवाही शुरू करने पर विचार करें, यदि ऐसा अभी नहीं हुआ है। इसके साथ ही उनके खिलाफ शक्तियों के दुरुपयोग के लिए भी मामला चलाया जाए। हालांकि अदालत ने कहा कि संबंधित अदालतें मामलों पर निर्णय रिकार्ड में सबूत और कानून के तहत करेंगी और इस फैसले में हाई कोर्ट की ओर से की गई टिप्पणी का कोई प्रभाव नहीं होगा।
यह आदेश एक खुली अदालत में न्यायमूर्ति आरवी मोरे और न्यायमूर्ति आरजी केतकर की एक पीठ ने आदर्श सोसाइटी की ओर से दायर कई याचिकाओं पर दिया।

केंद्रीय पर्यावरण व वन मंत्रालय के इस इमारत को गिराने और रक्षा मंत्रालय की ओर से जमीन के मालिकाना हक के लिए दायर वाद को चुनौती देते हुए आदर्श सोसाइटी ने ये याचिकाएं दायर की थीं। रक्षा मंत्रालय ने दायर वाद में दावा किया था कि जिस जमीन पर आदर्श की 31 मंजिला इमारत खड़ी की गई है, वह जमीन उसकी है।

शुक्रवार को निर्णय सुनाते हुए अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार से कहा कि वे नौकरशाहों के खिलाफ कानून के मुताबिक विभागीय कार्रवाई पर विचार करें। पीठ ने कहा, ‘अनुशासनात्मक प्राधिकार हाई कोर्ट के निष्कर्ष से प्रभावित हुए बिना कानून के मुताबिक निर्णय करेगा।
पीठ ने साथ ही शिकायतकर्ता एवं ‘नेशनल अलायंस आफ पीपुल्स मूवमेंट’ सदस्य सिमप्रीत सिंह के प्रति अपनी प्रशंसा रिकार्ड में रखी है। न्यायाधीशों ने कहा, ‘इस हस्तक्षेप के चलते शायद याचिकाकर्ताओं (आदर्श सोसाइटी) की ओर से घोर उल्लंघन होता पाया गया।’
अदालत ने इसके साथ ही आदर्श सोसाइटी से कहा कि वह छह प्रतिवादियों को एक-एक लाख रुपए का भुगतान खर्च के तौर पर करे, जिसमें पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के निदेशक भरत भूषण, सलाहकार एवं सक्षम प्राधिकार, वन एवं पर्यावरण मंत्रालय नलिनी भट्ट, बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के पूर्व आयुक्त सीताराम कुंटे एवं तीन अन्य शामिल हैं।

आदर्श हाउसिंग घोटाले ने 2010 में एक राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया था, जिसके कारण तत्कालीन कांग्रेसी मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण को पद से त्यागपत्र देने के लिए बाध्य होना पड़ा था। उक्त हाउसिंग परियोजना मुंबई में एक प्रमुख जमीन पर निर्मित है। यह जमीन भूतपूर्व सैनिकों एवं शहीद सैनिकों की पत्नियों के कल्याण के लिए थी। यद्यपि कई प्रभावशाली राजनीतिज्ञों और शीर्ष नौकरशाहों ने कथित रूप से अपने और नजदीकी रिश्तेदारों को योजना का लाभ दिलाने के लिए नियमों को पलट दिया।

महाराष्ट्र के कार्यकारी एडवोकेट जनरल रोहित देव ने राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया कि वह याचिकाकर्ता (आदर्श सोसाइटी) की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने के लिए मांगे गए स्थगन का विरोध कर रहे हैं। आदर्श सोसाइटी ने केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के ध्वस्तीकरण आदेश को चुनौती देते हुए 2011 में बंबई हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की थी।

’2011 में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने आदर्श को गिराने का आदेश दिया था क्योंकि यह इमारत सीआरजेड (कोस्टल रेगुलेशन जोन) नियमों का उल्लंघन कर बनाई गई थी। इस निर्णय के खिलाफ आदर्श सोसाइटी ने बंबई हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।
’बंबई हाई कोर्ट ने शुक्रवार को अपने निर्णय में कहा कि नियमों को ताक पर रखकर आदर्श का निर्माण गैरकानूनी तरीके से किया गया है। चूंकि नेताओं व नौकरशाहों ने अपने अधिकारों का दुरूपयोग किया है इसलिए उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई पर विचार हो। ’आदर्श हाउसिंग सोसाइटी की इमारत गिराने का खर्च रहिवासियों की जेब से वसूला जाएगा

 

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