पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के साथ ही सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। इसी बीच, अब तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, “हमने एक बेहद मुश्किल चुनाव लड़ा है, जिसमें कथित तौर पर लगभग 30 लाख असली वोटरों को वोटर लिस्ट से बाहर कर दिया गया। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान, हमने देखा कि कई सरकारी एजेंसियों और भारत के चुनाव आयोग का रवैया कितना पक्षपातपूर्ण था।”

अभिषेक बनर्जी ने आगे लिखा, “लोकतांत्रिक संस्थाएं, जिन्हें निष्पक्ष होकर काम करना चाहिए, वे भी सवालों के घेरे में दिखीं। इससे पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता, विश्वसनीयता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वोटों की गिनती से लेकर EVM को लाने-ले जाने और उनके रखरखाव से जुड़े आरोपों तक जैसे कि कंट्रोल यूनिट का मेल न खाना कई ऐसी परेशान करने वाली घटनाएं हुईं, जिनसे लाखों लोगों के मन में यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या लोगों के असली जनादेश का सम्मान किया गया है। मैंने पहले ही वोटों की गिनती वाले केंद्रों से CCTV फुटेज जारी करने और VVPAT पर्चियों की पारदर्शी तरीके से गिनती कराने की मांग की है, ताकि सच लोगों के सामने आ सके और हर शक-शुबहे का जवाब खुले और ईमानदारी से दिया जा सके।”

तृणमूल कांग्रेस के सांसद ने लिखा, “लोकतंत्र तभी जिंदा रह सकता है, जब चुनावी संस्थाएं नागरिकों के मन में भरोसा और विश्वास जगाएं। दुर्भाग्य से, हमने जो कुछ देखा है, उसने उस भरोसे को बुरी तरह से तोड़ दिया है। इसके साथ ही, चुनाव के बाद हुई हिंसा, पार्टी दफ्तरों पर हमले, हमारे पार्टी कार्यकर्ताओं को डराना-धमकाना और समर्थकों को धमकियां देना, ये सभी बातें एक लोकतांत्रिक समाज में बेहद चिंताजनक और कतई बर्दाश्त न करने लायक हैं।”

अभिषेक बनर्जी ने चुनाव बाद हिंसा पर जताई चिंता

तृणमूल कांग्रेस नेता ने चुनाव बाद हिंसा की घटनाओं पर भी चिंता जताई। अभिषेक बनर्जी ने लिखा, “तृणमूल के कई ऐसे समर्पित कार्यकर्ता और समर्थक, जिन्होंने जमीन पर उतरकर दिन-रात मेहनत की, उन पर कथित तौर पर जान-बूझकर हमले किए गए। डर और असुरक्षा के चलते उन्हें अपने घर-बार छोड़कर भागने पर मजबूर होना पड़ा। लोकतंत्र में किसी भी राजनीतिक कार्यकर्ता को कभी भी अपनी जान की सुरक्षा और अपने राजनीतिक विचारों में से किसी एक को चुनने की मजबूरी का सामना नहीं करना पड़ना चाहिए।”

अभिषेक बनर्जी ने आगे लिखा, “इस महान राष्ट्र की लोकतांत्रिक परंपराओं को सबसे ऊपर रखते हुए, मैं और तृणमूल कांग्रेस में मेरे साथी हम सभी पश्चिम बंगाल की जनता के साथ और तृणमूल के हर उस कार्यकर्ता के साथ मजबूती से खड़े रहेंगे, जिसने उस चुनावी तंत्र के खिलाफ पूरी ताकत से लड़ाई लड़ी, जिसे हम एक ‘दागदार’ चुनावी तंत्र मानते हैं। हम दिल्ली और पश्चिम बंगाल दोनों ही जगहों पर एक मजबूत, मुखर और अपने सिद्धांतों पर अडिग विपक्ष की भूमिका निभाते रहेंगे।”

अभिषेक बनर्जी ने कहा कि ममता बनर्जी के मार्गदर्शन और नेतृत्व में, लोकतंत्र, संवैधानिक मूल्यों और लोगों के अधिकारों व सम्मान के लिए हमारी लड़ाई बिना किसी डर और बिना किसी समझौते के जारी रहेगी।

अभिषेक बनर्जी ने कार्यकर्ताओं से की अपील

अभिषेक बनर्जी ने समर्थक और कार्यकर्ताओं से अपील भी की। उन्होंने कहा, “मैं तृणमूल के हर समर्थक और कार्यकर्ता से अपील करता हूं कि इस मुश्किल घड़ी में वे मजबूत और एकजुट रहें। अगर किसी को भी चुनाव के बाद हुई हिंसा, डराने-धमकाने या धमकियों का सामना करना पड़ा है, तो मैं उनसे गुजारिश करता हूं कि वे मुझसे संपर्क करें और अपनी पूरी जानकारी मेरे साथ साझा करें या मुझे सीधे मैसेज (DM) भेजें। उनकी सुरक्षा और हिफाजत सुनिश्चित करने के लिए और हर मुमकिन कानूनी व लोकतांत्रिक रास्ता अपनाने के लिए मैं अपनी पूरी ताकत लगा दूंगा।”

जानिए किस-किस नेता ने ली मंत्री पद की शपथ

शपथ ग्रहण समारोह में कई भाजपा नेताओं ने भी मंत्री पद की शपथ ली और नई सरकार का हिस्सा बने। इनमें सबसे प्रमुख नाम निशीथ प्रमाणिक का रहा, जो पहले केंद्रीय स्तर पर भी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। उनके साथ दिलीप घोष ने भी मंत्री पद की शपथ ली, जो लंबे समय तक पश्चिम बंगाल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं और संगठन में मजबूत पकड़ रखते हैं। पढ़ें पूरी खबर…