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कोरोना काल में NREGA के तहत बढ़ी काम की मांग, पर वक्त पर दिहाड़ी न मिलने से मजदूर परेशान, बोले- और दिन ऐसे न चल सकेगा काम

ग्रामीण विकास मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि कोविड महामारी के बीच मई 2021 में अब तक महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के अंतर्गत 1.85 करोड़ लोगों को काम दिया गया।

नई दिल्ली | May 18, 2021 10:36 AM
सरकार ने कहा है कि कोविड महामारी के बीच मई 2021 में अब तक मनरेगा के अंतर्गत 1.85 करोड़ लोगों को काम दिया गया (फाइल, एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर का असर गांवों में भी होने और इसकी रोकथाम के लिये कई राज्यों में लगाये गये ‘लॉकडाउन’ के बावजूद ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून मनरेगा के तहत कार्य की मांग बढ़ रही है। लेकिन मजदूरों को वक्त पर दिहाड़ी न मिलने से वो परेशान हैं। कुछ मजदूरों का कहना है कि अधिक दिनों तक वो इस हालत में काम नहीं कर पाएंगे।

ग्रामीण विकास मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि कोविड महामारी के बीच मई 2021 में अब तक महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के अंतर्गत 1.85 करोड़ लोगों को काम दिया गया। ये मई 2019 की समान अवधि में दिये गये काम से 52 प्रतिशत ज्यादा है। उस दौरान 1.22 करोड़ लोगों को काम दिया गया था। उल्लेखनीय है कि 2019 में महामारी की स्थिति नहीं थी और कोई ‘लॉकडाउन’ नहीं था।

बयान के अनुसार वित्त वर्ष 2021-22 में 13 मई 2021 तक 2.95 करोड़ लोगों को काम दिया जा चुका है, जिसमें 5.98 लाख संपत्तियां पूरी हुईं और 34.56 करोड़ श्रमिक-दिवस कार्य उत्पन्न हुए।अग्रिम पंक्ति में काम कर रहे कर्मचारियों सहित सभी स्तरों पर कार्यरत कर्मियों के बीच संक्रमण और मौत के बावजूद ये उपलब्धि हासिल की गयी।मंत्रालय के अनुसार विकास कार्यों के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में कोविड-19 की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए राज्य, जिला और प्रखंड स्तर पर प्रमुख लोगों को प्रशिक्षित भी किया गया है।

सरकार की तरफ से रोजगार देने के दावे तो किये जा रहे हैं लेकिन टेलिग्राफ में छपी खबर के अनुसार देश के कई राज्यों में मजदूरों को समय पर मजदूरी का भुगतान नहीं किया जा रहा है। झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले की 42 वर्षीय कौशल्या हेम्ब्रम ने ग्रामीण रोजगार योजना के तहत अप्रैल में 21 दिन काम किया। लेकिन सोमवार तक उन्हें मजदूरी नहीं मिली थी। ऐसी ही हालत कई राज्यों में है।

कौशल्या ने नौ अन्य लोगों के साथ 2 से 8 अप्रैल, 10 से 16 और 21 से 27 तक तीन चरणों में भालुमारा गांव में एक तालाब नवीनीकरण परियोजना में काम किया था। 10 में से किसी को भी अभी तक भुगतान नहीं किया गया है।

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