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कांग्रेस में फिर उठी बदलाव की मांग, कपिल सिब्बल ने माना, ‘देश में मजबूत राजनीतिक विकल्प की जगह खाली’

कपिल सिब्बल ने कहा कि भारत को फिर से उठ खड़ी होने वाली कांग्रेस की जरूरत है और पार्टी को अपनी चुनावी रणनीति बनाने के लिये सही लोगों को इसके लिये लगाने की जरूरत है जिससे वह सरकार की विफलता पर रणनीति तैयार कर सके।

Edited By सचिन शेखर नई दिल्ली | Updated: June 13, 2021 7:32 PM
सिब्बल पिछले साल कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पार्टी में व्यापक बदलाव के लिये पत्र लिखने वाले जी-23 नेताओं में भी शामिल थे (एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

कांग्रेस पार्टी का विवाद कम होता नजर नहीं आ रहा है। पिछले साल कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पार्टी में व्यापक बदलाव के लिये पत्र लिखने वाले जी-23 नेताओं में शामिल रहे कपिल सिब्बल ने एक बार फिर से बदलाव की मांग की है। साथ ही उन्होंने एक इंटरव्यू में इस बात को माना है कि देश में मजबूत राजनीतिक विकल्प की जगह खाली है।

कांग्रेस को भाजपा के व्यवहार्य सियासी विकल्प के तौर पर पेश करने का सुझाव देते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने रविवार को कहा कि कांग्रेस को संगठन के सभी स्तरों पर व्यापक बदलाव लाना चाहिए जिससे यह नजर आए कि वह जड़ता की स्थिति में नहीं है। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने माना कि फिलहाल भाजपा का कोई मजबूत सियासी विकल्प नहीं है लेकिन कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शासन का नैतिक अधिकार खो दिया है और देश के मौजूदा रुख को देखते हुए कांग्रेस एक विकल्प पेश कर सकती है।

उन्होंने कहा कि चुनावों में हार की समीक्षा के लिये समितियां बनाना अच्छा है, लेकिन इन का तब तक कोई असर नहीं होगा जब तक उनके द्वारा सुझाए गए उपायों पर अमल नहीं किया जाता।

एआईयूडीएफ के साथ गठबंधन पर उठाए सवाल:असम में ऑल इंडिया युनाइडेट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) और पश्चिम बंगाल में इंडियन सेक्यूलर फ्रंट (आईएसएफ) के साथ पार्टी के गठबंधन को “सुविचारित नहीं’’ बताते हुए सिब्बल ने कहा कि कांग्रेस जनता को यह समझाने में ‍विफल रही कि देश के लिये अल्पसंख्यक व बहुसंख्यक संप्रदायवाद समान रूप से खतरनाक है।

सांप्रदायिकता के सभी रूप खतरनाक हैं: सिब्बल ने कहा, “2014 के लोकसभा चुनावों के ठीक बाद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा बनाई गई एंटनी सिमिति ने सही इंगित किया था कि धर्मनिर्पेक्षता बनाम सांप्रदायिकता के मुद्दे पर चुनाव लड़ने से कांग्रेस को नुकसान हुआ, इसे अल्पसंख्यक समर्थक माना गया जिसकी वजह से भाजपा को खासा चुनावी फायदा हुआ।” उन्होंने कहा, “इतना ही नहीं कांग्रेस लोगों को यह समझाने में भी नाकाम रही कि अल्पसंख्यक या बहुसंख्यक सांप्रदायिकता देश के लिये समान रूप से खतरनाक है।

कपिल सिब्बल ने कहा कि भारत को फिर से उठ खड़ी होने वाली कांग्रेस की जरूरत है और पार्टी को अपनी चुनावी रणनीति बनाने के लिये सही लोगों को इसके लिये लगाने की जरूरत है जिससे वह सरकार की विफलता पर रणनीति तैयार कर सके। उन्होंने कहा, “हाल के विधानसभा चुनावों में गैर भाजपाई दलों की जीत ने भाजपा के अजेय न होने की बात दिखाई है और यह भी कि मजबूत विपक्ष होने पर उसकी हार की गुंजाइश है।”

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने पश्चिम बंगाल, केरल, असम और पुडुचेरी में हाल के चुनावों में पार्टी को मिली हार की समीक्षा के लिये समिति के गठन का स्वागत किया है लेकिन साथ ही वह कहते हैं, “चुनावों में खराब प्रदर्शन के विश्लेषण के लिये समितियों के गठन का स्वागत है लेकिन जब तक उनके द्वारा सुझाए गए उपायों को स्वीकार कर उन पर अमल नहीं किया जाएगा, जमीनी स्तर पर इनका कोई प्रभाव नहीं होगा।”

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