तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने गुरुवार (16 अप्रैल) को परिसीमन विधेयक की एक प्रति जलाई। तमिलनाडु के सीएम ने इस कानून को ‘काला कानून’ करार दिया और आरोप लगाया कि यह विधेयक तमिल लोगों को उनकी अपनी ही भूमि में ‘शरणार्थी’ बनाने का प्रयास है। महिला आरक्षण संशोधन अधिनियम पर संसद के बजट सत्र की विशेष बैठक से कुछ घंटे पहले स्टालिन ने काला झंडा दिखाया। केंद्र सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई परिसीमन विधेयक की एक प्रति जलाई और नारे लगाए।
तमिलनाडु के सीएम स्टालिन चुनाव प्रचार के सिलसिले में पश्चिमी तमिलनाडु के नामक्कल में हैं और वहां उन्होंने विधेयक की प्रति जलाई। स्टालिन और काले वस्त्र पहने अन्य लोगों ने इस बीच नारे लगाए। उन्होंने ”पोराडावोम, वेलवोम ओन्द्रगा” (आइए हम मिलकर संघर्ष करें, साथ मिलकर जीतें) का नारा भी लगाया।
‘तमिलों को शरणार्थी बनाने का प्रयास’
एक बयान में स्टालिन ने कहा, ”विरोध की ज्वाला पूरे तमिलनाडु में फैले। फासीवादी भाजपा का घमंड चकनाचूर हो। तब, तमिलनाडु से उठी हिंदी थोपने के खिलाफ प्रतिरोध की आग ने दिल्ली को झुलसा दिया था। वह तभी शांत हुई जब उसने दिल्ली को झुकने पर मजबूर कर दिया। उनका इशारा स्पष्ट रूप से राज्य में 1960 के दशक में हुए हिंदी विरोधी आंदोलन की ओर था।
उन्होंने कहा, ”आज मैंने इस काले कानून की प्रति जलाकर और काला झंडा दिखाकर उस आग को फिर से प्रज्वलित कर दिया है जो तमिलों को हमारी ही धरती पर शरणार्थी बनाने का प्रयास करता है। यह आग अब पूरी द्रविड़ भूमि में फैलेगी। यह भड़केगी, यह प्रचंड होगी और यह भाजपा के अहंकार को घुटने टेकने पर मजबूर कर देगी।”
पूरे तमिलनाडु में लगे काले झंडे
जैसे ही स्टालिन ने काला झंडा दिखाया वैसे ही पूरे तमिलनाडु में उनके पार्टी पदाधिकारियों, मंत्रियों और कार्यकर्ताओं ने अपने-अपने घरों में, पार्टी कार्यालयों में और सार्वजनिक स्थानों पर भी काले झंडे लगाए। चेन्नई में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) के राज्य मुख्यालय ‘अन्ना अरिवलयम’ के अलावा, कमल हासन के नेतृत्व वाले मक्कल निधि मय्यम और वाइको के नेतृत्व वाले मरुमलारची द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एमडीएमके), द्रमुक के सहयोगी दलों के चेन्नई परिसर में प्रमुख स्थानों पर काले झंडे लगाए गए।
द्रमुक के दिवंगत वरिष्ठ नेता एम. करुणानिधि के चेन्नई-गोपालपुरम स्थित आवास पर भी काला झंडा देखा गया। चेन्नई में मुख्यमंत्री के आवास और उनके मंत्रिमंडल के सहयोगियों के घरों पर भी काले झंडे लगे दिखे। केंद्र द्वारा प्रस्तावित परिसीमन का कड़ा विरोध करते हुए बुधवार को स्टालिन ने राज्य भर में काले झंडे दिखाकर प्रदर्शन का आह्वान किया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के इस कदम से तमिलनाडु के हितों को नुकसान पहुंचेगा।
(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)
