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दो बिल्डिंग में तब्लीगी जमात के 1000 लोग सेना की निगरानी में हो रहे क्वारंटीन, नाम नहीं फ्लैट नंबर बनी उनकी पहचान

पिछले महीने मरकज से 2300 से ज्यादा लोग निकाले गए थे। इनमें से जिनमें भी कोरोना के लक्षण दिखे उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि बाकी को क्वारंटीन सेन्टर में रखा गया है।

Author Edited By प्रमोद प्रवीण नई दिल्ली | Updated: April 8, 2020 8:25 AM
नरेला के इस क्वारंटीन सेन्टर में लोगों को नाम से नहीं बल्कि फ्लैट नंबर से पुकारा जा रहा है। फिलहाल यही उनकी पहचान बन गई है। (एक्सप्रेस फोटो- गजेंद्र यादव)

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के बाहरी इलाके नरेला में बनाए गए क्वारंटीन सेन्टर पर लाउडस्पीकर से कभी भी आवाज नहीं थम रही। हमेशा कुछ न कुछ निर्देश दिए जा रहे हैं। मंगलवार (07 अप्रैल) की दोपहर 2 बजे जैसे ही लाउडस्पीकर पर निर्देश मिला वैसे ही तब्लीगी जमात के लोग फ्लैट से बाहर आकर एक लाइन में खड़े हो गए। इन सभी लोगों में कोरोनावायरस के लक्षणों की जांच होनी थी। इस तरह लाइन में खड़े होना इनकी दैनिक दिनचर्या का एक हिस्सा बन चुका है।

यहां ऐसे करीब 1000 लोगों को क्वरांटीन में रखा गया है, जो पिछले महीने निजामुद्दीन के मरकज में शामिल हुए थे। देशभर में यही मरकज फिलहाल कोरोना संक्रमण का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है, जहां से देशभर में मामले फैले हैं। पिछले महीने मरकज से 2300 से ज्यादा लोग निकाले गए थे। इनमें से जिनमें भी कोरोना के लक्षण दिखे उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि बाकी को क्वारंटीन सेन्टर में रखा गया है। नरेला के इस क्वारंटीन सेन्टर में लोगों को नाम से नहीं बल्कि फ्लैट नंबर से पुकारा जा रहा है। फिलहाल यही उनकी पहचान बन गई है।

रोजाना स्क्रीनिंग के वक्त नर्सिंग अटेंडेंट एक-एक कर फ्लैट नंबर की उद्घोषणा करती हैं। जैसे ही अटेंडेंट ने फ्लैट नंबर 218 कहा, एक शख्स ने हाथ ऊपर उठाया और अपनी पहचान बताई। इस केंद्र को सेना के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। सेना ने अधिकारियों ने सिविल अनुरोध पर इस केंद्र पर चिकित्सा जांच को संभालने का फैसला किया है, जिसमें सबसे आगे डॉक्टर, नर्सिंग अटेंडेंट, मेंटेनेंस स्टाफ और नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवक हैं।

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सेना के सूत्रों ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “हमने वहां डॉक्टरों और नर्सिंग सहायकों सहित लगभग 20 अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की है। वे लोग सिविल और चिकित्सा पेशेवरों के साथ काम कर रहे हैं, ताकि स्क्रीनिंग की प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरी हो सके। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सुविधा सुचारू रूप से चलते रहे और धीरे-धीरे अधिग्रहण की प्रक्रिया भी आगे बढ़ती रहे।”

इस सेंटर पर तीन इमारतों में करीब 1,300 लोग बंद हैं। दो इमारतों में लगभग 1,000 तब्लीगी जमात के सदस्य हैं, जबकि तीसरे घर के लोग जो पिछले महीने विदेश से आए थे और उन्हें हवाई अड्डे से क्वारंटीन के लिए भेजा गया था। उनमें से एक रुड़की के डॉक्टर ने बताया, “इससे पहले, हर दिन कमरे साफ किए जाते थे। अब एक दिन छोड़कर होता है। शुक्र है कि मेरा टेस्ट निगेटिव निकला है अब मुझे घर वापस आने का रास्ता खोजना है।”

डीडीए उपाध्यक्ष तरुण कपूर ने कहा कि लगभग 1,400 फ्लैट अधिकारियों को सौंप दिए गए हैं। प्रत्येक फ्लैट में दो लोग रहते हैं। प्रत्येक घर में दो बेड, एक मेज, एक कुर्सी और एक स्टूल दिया गया है। नॉर्थ दिल्ली के डीएम शिंदे दीपक अर्जुन ने बताया कि अब तक एक मरीज में कोरोना पॉजिटिव मिला है, जिसे अस्पताल भेजा जा चुका है। उन्होंने बताया कि अगर किसी में कोरोना के लक्षण मिलते हैं तो उन्हें तुरंत एलएनजेपी अस्पताल भेजा जाता है। सेंटर पर चार एम्बुलेन्स को तैनात कर रखा गया है। रोजोना सभी लोगों को दो बार तापमान मापा जा रहा है।
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