इस साल भीषण गर्मी की संभावनाओं को लेकर राष्ट्रीय प्राणी उद्यान (दिल्ली चिड़ियाघर) ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। जहां नीलगाय, हिरनों व अन्य वन्यजीवों के बाड़ों में फव्वारों की संख्या बढ़ा दी गई है। वहीं वन्यजीवों के खान-पान में भी बदलाव किए गए हैं। बता दें कि चिड़ियाघर में बने सभी तालाबों को पानी से भरा जा रहा है, ताकि वन्यजीव पानी में बैठकर अपने शरीर को ठंडा रख सकें। साथ ही वन्यजीवों के नहाने के स्थानों की संख्या को बढ़ाया गया है।

जहां हाथियों को अब दिनभर में तीन बार नहलाया जा रहा है। वहीं बाघों को बाड़ों में छोड़ने से पहले व उनके कमरों में ले जाने से पहले उन्हें दिनभर में दो बार नहलाया जा रहा है। बिल्ली प्रजाति के वन्यजीवों जैसे तेंदुए व बाघ सहित पक्षियों के शेडों को ‘एग्रोनेट’ से ढंक दिया गया है ताकि सीधी धूप ना पड़े। वहीं शेर, बाघ, बंदर व गैंडों के घरों में बड़े-बड़े कूलर लगाए गए हैं ताकि उन्हें गर्मी ना लगे। इसके अलावा शाकाहारी जानवरों के खान-पान में तरबूजों, खरबूजों, खीरा व अन्य पानी वाले फलों को जोड़ा गया है।

भालू, बंदरों व ताड़बिलावों को अब ब्रेड की जगह चावल दिए जा रहे हैं। जबकि मांसाहारी वन्यजीवों के खाने पर ‘जू-कीपरों’ व चिकित्सकों द्वारा नजर रखी जा रही है। दिल्ली चिड़ियाघर के क्यूरेटर डाक्टर मनोज कुमार ने बताया कि गर्मी बढ़ने पर मांसाहारी जानवर धीरे-धीरे अपने भोजन में 20 फीसद तक की कमी कर देते हैं। इसलिए उनके दैनिक क्रियाकलाप पर नजर रखी जाती है। गर्मी में वन्यजीवों को समय-समय पर ग्लूकोज भी दिया जाता है ताकि उन्हें लू ना लगे।

वहीं अप्रैल के प्रथम सप्ताह से सभी सरीसृप शीत निद्रा से जाग गए हैं। अब रोजाना अजगरों को खरगोश खाने के लिए दिए जा रहे हैं। जबकि कोबरा, धामिन, पानी के सांप व दोमुंही सांप को सफेद चूहे व मुर्गी के चूजे दिए जा रहे है। वहीं गोह को 2-4 इंच की मछलियां खाने को दी जा रही हैं। दिल्ली चिड़ियाघर में दो तरह के उल्लू की प्रजातियां हैं ‘बान्र उल्लू’ (खेतों का उल्लू) व ‘ग्रेट हार्नड उल्लू’ (बडे सींग वाले उल्लू) हैं, जिन्हें हफ्ते में चार दिन चूजे व तीन दिन सफेद चूहे खाने के लिए दिए जा रहे हैं।