बुधवार शाम राजधानी दिल्ली का मौसम अचानक पूरी तरह बदल गया। दिनभर गर्मी और उमस झेलने के बाद शाम होते-होते तेज आंधी, भारी बारिश और कई इलाकों में ओलावृष्टि शुरू हो गई। मौसम में आए इस अचानक बदलाव ने लोगों को हैरान कर दिया। तेज हवाओं की रफ्तार इतनी ज्यादा थी कि कई जगह पेड़ हिलने लगे और सड़कों पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। खराब मौसम का असर सबसे ज्यादा हवाई सेवाओं पर पड़ा, जहां 500 से अधिक उड़ानें देरी से चलीं, 15 फ्लाइट्स को दूसरी जगह भेजना पड़ा और छह विमानों को लैंडिंग से पहले दोबारा चक्कर लगाने पड़े।

मौसम विभाग के अनुसार दिल्ली में शाम के समय तेज हवाएं चलीं। पालम इलाके में हवा की रफ्तार सबसे ज्यादा 98 किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज की गई। वहीं सफदरजंग और पूसा में हवा की गति 72 किलोमीटर प्रति घंटा रही। वैज्ञानिकों का कहना है कि दिनभर की तेज गर्मी और पश्चिमी विक्षोभ के कारण बनी नमी ने इस तेज बारिश और ओलावृष्टि को जन्म दिया।

इससे पहले दिन में भी दिल्ली के कुछ हिस्सों में हल्की बूंदाबांदी और तेज हवाएं चली थीं, जिससे लोगों को थोड़ी राहत जरूर मिली थी। हालांकि उमस और तेज धूप के कारण शाम तक गर्मी का एहसास करीब 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था, जबकि वास्तविक अधिकतम तापमान 40 डिग्री से कम रहा।

रात करीब 8 बजे के बाद मौसम अचानक और खराब हो गया। इसके बाद मौसम विभाग ने उत्तर, दक्षिण-पश्चिम, दक्षिण और दक्षिण-पूर्व दिल्ली के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी कर दिया। अधिकारियों के मुताबिक तेज हवाओं के कारण कई इलाकों में तापमान 10 से 11 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिली।

दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के कई इलाकों में ओले भी गिरे। धौला कुआं, मोती बाग और उत्तम नगर जैसे इलाकों से लोगों ने ओलावृष्टि की जानकारी दी। रात साढ़े आठ बजे तक पालम में 2 मिलीमीटर और सफदरजंग में 1.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।

मौसम विभाग का कहना है कि गुरुवार से बारिश की संभावना लगभग खत्म हो जाएगी और एक बार फिर शुष्क पश्चिमी हवाएं चलने लगेंगी। इसके कारण आने वाले दिनों में तापमान तेजी से बढ़ सकता है। अनुमान है कि रविवार तक दिल्ली का अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।

मौसम विभाग के मुताबिक पश्चिमी विक्षोभ कमजोर पड़ने और अरब सागर के ऊपर एंटी-साइक्लोन बनने से उत्तर-पश्चिम भारत में गर्म हवाएं बढ़ेंगी। इसका असर राजस्थान और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में दिखाई देगा, जहां भीषण गर्मी और हीटवेव की स्थिति बन सकती है। राजस्थान में तापमान पहले ही 48 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है।

इस बीच दिल्ली की वायु गुणवत्ता ‘मॉडरेट’ श्रेणी में बनी हुई है। बुधवार को दिल्ली का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी AQI 147 दर्ज किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ दिनों तक हवा की गुणवत्ता इसी स्तर पर बनी रह सकती है।

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जलवायु परिवर्तन का असर पिछले कुछ वर्षों में उच्च हिमालयी क्षेत्रों पर साफ दिखाई देने लगा है। जिन हिमनद झीलों के आसपास मनुष्यों की आवाजाही सीमित है, वहां भी अब जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम का मिजाज खतरे की घंटी बजाने लगा है। कुछ हिमनद झीलों का आकार तेजी से सिकुड़ रहा है, तो कुछ का आकार आश्चर्यजनक ढंग से बढ़ रहा है। ऐसी 130 झीलें चिह्नित की गई हैं, जो क्षमता से अधिक आकार में बढ़ने की स्थिति में विस्फोटक रूप ले सकती हैं। अगर ऐसा होता है, तो निचले क्षेत्रों की बस्तियों में तबाही मच सकती है। हिमनद झीलों के अनियंत्रित ढंग से बढ़ते आकार की सच्चाई इसरो के उपग्रहों से ली गई तस्वीरों के अध्ययन से सामने आई है। इससे वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ गई है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक