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महिलाओं के लिए अभी भी असुरक्षित दिल्ली, बढ़ा अपराध का आंकड़ा

स्पेशल सेल, अपराध शाखा और जिले की पुलिस की सख्त चेतावनियों और सावधानियों के बावजूद बलात्कार और हत्या जैसी गंभीर घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

Author नई दिल्ली | Updated: January 14, 2020 6:28 AM
दिल्ली पुलिस के आंकड़े बताते हैं कि महिलाओं के साथ हो रहे अपराधों में बलात्कार, महिलाओं को बुरी नजर से देखने, ससुरालियों के हाथों उत्पीड़न और दहेज हत्याओं में बढ़ोतरी तो हुई ही।

दिल्ली पुलिस की तमाम कवायदों के बाद भी राजधानी में घटित होने वाले गंभीर अपराधों जैसे हत्या के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं। राह चलते मिनट भर में हथियार के बल पर वाहन चोरी और चोरी की अन्य वारदातों में तो बढ़ोतरी ने रेकार्ड बनाना शुरू कर दिया है।
दिल्ली पुलिस के आंकड़े बताते हैं कि महिलाओं के साथ हो रहे अपराधों में बलात्कार, महिलाओं को बुरी नजर से देखने, ससुरालियों के हाथों उत्पीड़न और दहेज हत्याओं में बढ़ोतरी तो हुई ही। इससे अलग हत्या, वाहन चोरी, घर में चोरी और आइपीसी की अन्य धाराओं में दर्ज मामले की संख्या में 2018 की तुलना में 2019 में बढ़ोतरी देखी जा रही है। पुलिस के लिए खुश होने वाली बात यह है कि झपटमारी, सेंधमारी, डकैती, दंगा और लूटपाट की घटनाओं के कम मामले दर्ज हुए हैं।

स्पेशल सेल, अपराध शाखा और जिले की पुलिस की सख्त चेतावनियों और सावधानियों के बावजूद बलात्कार और हत्या जैसी गंभीर घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पुलिस के 15 नवंबर के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 2018 में जहां बलात्कार के 1921 मामले दर्ज हुए थे। वहीं, 2019 में यह आंकड़ा 1947 पर पहुंच गया है। इसी प्रकार महिलाओं के लिए विशेष प्रकोष्ठ बनाने से लेकर उनकी सुनवाई और मध्यस्थता केंद्रों के बनाने के बाद भी पति और ससुरालियों के हाथों प्रताड़ित महिलाओं की संख्या 2018 में दर्ज 2716 के मुकाबले 2019 में 3187 पर पहुंच गया है।

इसी प्रकार गंभीर अपराध की श्रेणी में हत्या के मामले जहां 2018 में 439 दर्ज थे। वहीं 2019 में यह 458 पर पहुंच चुका है। 2018 में जहां वाहन चोरी के 40073 मामले दर्ज हुए थे। वहीं, 2019 में यह आंकड़ा 40737 पर जा चुका है। दिल्ली पुलिस के तमाम जाबांजों की जांबाजी के बावजूद राजधानी में आइपीसी की अन्य वारदातों में भी पुलिस की किरकिरी दिख रही है। 2018 में यह आंकड़ा 24246 दर्ज था तो इस साल 15 नवंबर तक ही यह आंकड़ा 2019 में 27531 पर आकर रूका हुआ है।
आइपीसी के कुल मामले जहां 2018 में 214214 दर्ज थे। वहीं, यह बढ़कर 2019 में 263027 पर छलांग लगाकर पुलिस के लिए चुनौती बन गए हैं।

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