केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कहा कि दिल्ली स्लम और जेजे क्लस्टर पुनर्वास एवं स्थानांतरण नीति-2026 को अंतिम रूप दे दिया गया है। उन्होंने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि इस नीति को जल्द से जल्द अधिसूचित (नोटिफाई) किया जाए।

झुग्गी पुनर्वास की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए शाह ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) और दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी) को 45 दिनों के भीतर पांच झुग्गी-झोपड़ी (जेजे) क्लस्टरों के लिए टेंडर जारी करने के निर्देश दिए।

केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों से 50 अन्य जेजे क्लस्टरों के लिए परियोजना दस्तावेज और टेंडर फॉर्म तैयार करने को भी कहा। अधिकारियों के मुताबिक, बैठक में लिए गए फैसलों से दिल्ली की झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले करीब चार लाख परिवारों को फायदा मिलने की उम्मीद है।

काम को तय समय में पूरा करने पर जोर देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि दिल्ली सरकार को हर महीने पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत कम से कम पांच पुनर्विकास परियोजनाओं के लिए टेंडर जारी करने चाहिए।

झुग्गीवासियों को मिलेंगे सभी जरूरी सुविधाएं

उन्होंने कहा कि जिन कॉलोनियों में झुग्गीवासियों को बसाया जाएगा, वहां आंगनबाड़ी केंद्र, स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र और बच्चों के खेलने के मैदान जैसी जरूरी सामाजिक सुविधाओं की भी पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए।

अमित शाह ने यह भी कहा कि जेजे (झुग्गी-झोपड़ी) क्लस्टरों के लिए पात्रता तय करने की कट-ऑफ तारीख 1 जनवरी 2025 होगी।

इस समीक्षा बैठक में केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल, दिल्ली के उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, दिल्ली के शहरी विकास मंत्री, केंद्रीय गृह सचिव, दिल्ली के मुख्य सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार गरीबों के कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

दिल्ली में कितनी झुग्गी बस्तियां

इससे पहले आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी) के तहत कुल 675 झुग्गी बस्तियां हैं। इनमें से 376 झुग्गियां सरकारी जमीन पर स्थित हैं और दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के अधिकार क्षेत्र में आती हैं, जबकि 299 झुग्गियां डीयूएसआईबी के दायरे में हैं।

डीडीए की 2007 की झुग्गी पुनर्विकास नीति में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के जरिए झुग्गियों के पुनर्विकास का प्रावधान है। लेकिन इसका क्रियान्वयन काफी धीमा रहा है। डीडीए ने वर्ष 2022 में ऐसी छह परियोजनाओं के लिए टेंडर जारी किए थे लेकिन इनमें कोई कंपनी आगे नहीं आई।

वहीं, दिल्ली सरकार की ‘दिल्ली स्लम और झुग्गी-झोपड़ी पुनर्वास एवं स्थानांतरण नीति-2015’ के तहत झुग्गियों का उसी स्थान पर पुनर्विकास (इन-सीटू पुनर्वास) या फिर 5 किलोमीटर के दायरे में वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराने का प्रावधान है।

सूत्रों के अनुसार, पहले इस दिशा में किए गए प्रयास इसलिए सफल नहीं हो सके क्योंकि परियोजनाओं के लिए वायबिलिटी गैप फंडिंग (वित्तीय सहायता) की व्यवस्था नहीं थी। वर्ष 2022 में झुग्गी क्लस्टरों के इन-सीटू पुनर्विकास के लिए जारी किया गया आखिरी टेंडर भी इसी वजह से सफल नहीं हो पाया था।