Delhi SIR: अगले हफ्ते जारी होने वाली दिल्ली की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हर तीसरा नाम हटाया जा सकता है। इस बात की जानकारी सरकारी आंकड़ों से मिलती है। दिल्ली में एसआईआर के गणना फेज के आखिरी दिन सोमवार को रात आठ बजे तक, सीईओ के कार्यालय से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, केवल 97.47 लाख मतदाताओं के फॉर्म इकट्ठा किए गए थे और आधिकारिक पोर्टल पर अपलोड किए गए थे।

यह संख्या उस समय वोटर लिस्ट में मौजूद 1.45 करोड़ नामों का सिर्फ 67% है, जब दिल्ली में एसआईआर की प्रक्रिया शुरू हुई थी। बाकी बचे 47.62 लाख वोटरों को अनकलेक्टिबल यानी की जानकारी न मिल पाने वाले के तौर पर मार्क किया जाएगा। इस कैटेगरी में वे वोटर शामिल हैं जो घर पर नहीं मिले, जो कहीं और चले गए या जिनकी मौत हो गई। इनकी एंट्री डुप्लीकेट थी या फिर जानकारी ना मिल पाने के दूसरे कारण थे।

गणना फेज के दौरान, बीएलओ घर-घर गए, गणना के फॉर्म बांटे, वोटरों को उन्हें भरने में मदद की और फिर चुनाव आयोग के आधिकारिक पोर्टल पर जानकारी अपलोड की।

राजधानी में वोटर लिस्ट का तैयार होने के फेज में 33% नाम हटाए जाने की दर देश में सबसे अधिक होगी। अब तक प्रकाशित ड्राफ्ट लिस्ट में बुधवार को तेलंगाना में सबसे अधिक 21.59% नाम हटाए गए। अरुणाचल प्रदेश (19.09%) दूसरे स्थान पर है, उसके बाद उत्तर प्रदेश (18.7%) का नंबर आता है।

हालांकि, दिल्ली में नाम हटने का प्रतिशत देश के कई दूसरे शहरी इलाकों जैसा ही होगा। अधिकारियों का मानना है कि ऐसा भारत के बड़े शहरों में बड़ी संख्या में रहने वाली अस्थाई आबादी है। गुरुग्राम में 29% मतदाता मतदान से बाहर रहे। हैदराबाद जिले में 40.99% और पुणे जिले में 27.76% फॉर्म जमा नहीं हो सके।

कब प्रकाशित होगी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट

ड्राफ्ट वोटर लिस्ट 24 अगस्त को जारी की जाएगी। तब तक, पार्टियों के बूथ लेवल एजेंट्स और लोगों को लिस्ट में गलतियां बताने का मौका मिलेगा। इंडियन एक्सप्रेस ने जुलाई में रिपोर्ट दी थी कि दिल्ली के सीईओ ऑफिस के अधिकारियों को उम्मीद थी कि 30-40% नाम हटा दिए जाएंगे। ऐसा इसलिए होगा क्योंकि बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर, सरकारी कर्मचारी और प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारी अक्सर एक जगह से दूसरी जगह आते-जाते रहते हैं, लेकिन वे अपना पता अपडेट नहीं करवाते।

अधिकारियों ने बताया कि लगभग 1-2 लाख वोटर अन्य कैटेगरी में हो सकते हैं। यानी वे लोग जो गणना फॉर्म पर साइन करने या उन्हें जमा करने से इनकार करते हैं। असल में, वोटर लिस्ट से हटाए गए लोगों की अंतिम संख्या 27 अक्टूबर को ही पता चलेगी, जब आखिरी वोटर लिस्ट जारी की जाएगी।

जिन वोटरों ने अधूरी जानकारी वाले फ़ॉर्म जमा किए होंगे, उन्हें अगले दो महीनों में नोटिस भेजे जाएंगे और उनसे वोटर लिस्ट में बने रहने की पात्रता का सबूत मांगा जाएगा। उनमें से कुछ को लिस्ट में वापस जोड़ा जा सकता है। चुनाव आयोग ने यह भी कहा है कि जिन असली वोटरों के नाम ड्राफ्ट लिस्ट से हटा दिए गए होंगे, उन्हें एक महीने की ‘दावे और आपत्ति’ अवधि के दौरान नए वोटर के तौर पर आखिरी लिस्ट में जोड़ा जा सकता है।

कब तक दर्ज करवा सकते हैं दावे और आपत्तियां?

ड्राफ्ट लिस्ट प्रकाशित होने के बाद 23 सितंबर तक दावे और आपत्तियां दर्ज की जा सकती हैं। इन दावों और आपत्तियों का निपटारा 24 अगस्त से 22 अक्टूबर के बीच किया जाएगा।

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दिल्ली में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत मतदाता सूची का व्यापक सत्यापन किया जा रहा है। चुनाव अधिकारियों के अनुसार, इस प्रक्रिया के बाद मौजूदा वोटर लिस्ट से करीब 20 से 25 प्रतिशत नाम हटाए जा सकते हैं। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि यह केवल प्रारंभिक अनुमान है और सही संख्या 17 अगस्त को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…