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रिटायरमेंट के बाद भी आधिकारिक वाहनों का इस्‍तेमाल कर रहे दिल्‍ली के पुलिस अधिकारी, जानें Audit में क्‍या-क्‍या हुए खुलासे

ऑडिट में सामने आया कि सुरक्षा इकाइयों में 6,828 की स्वीकृत संख्या के मुकाबले 5,465 कर्मी ही थे। इसमें कम से कम 535 पुलिसकर्मी ऐसे थे जो पूर्व पुलिस कमिश्नरों, सेवानिवृत्त जजों और सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारियों के साथ जुड़े हुए थे।

Rakesh Asthana, IPS Rakesh Asthana
दिल्ली पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना(फोटो सोर्स: एक्सप्रेस)।

एक ताजा ऑडिट में सामने आया है कि दिल्ली पुलिस के कई वरिष्ठ अधिकारी सेवानिवृत्त होने या स्थानांतरित होने के बाद भी अपने आधिकारिक वाहनों का प्रयोग कर रहे हैं। इन अधिकािरयों को वाहनों को वापस करने के लिए कहा गया था। द इंडियन एक्सप्रेस को मिली जानकारी के मुताबिक सेवानिवृत्त या ट्रांसफर हो चुके आईपीएस अधिकारी अभी भी सरकारी गाड़ी का इस्तेमाल कर रहे थे।

कई ने अभी तक नहीं लौटाए वाहन: इनमें सियाज, एर्टिगा, इनोवा और एसएक्स-4 जैसे 40 वाहन शामिल हैं। हालांकि लाभ उठाने वाले अधिकारियों से संपर्क करने के बाद कई अधिकारियों ने अपने आधिकारिक वाहन तो लौटा दिये लेकिन लगभग 10 आईपीएस ने अभी तक इन वाहनों को लौटाया नहीं है। बता दें कि पुलिस आयुक्त राकेश अस्थाना ने सभी पुलिस स्टेशनों और इकाइयों में कर्मचारियों और संसाधनों को लेकर एक ऑडिट कराया था।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने जानकारी दी कि, “सामान्य प्रशासन विभाग को एक ऑडिट करने के लिए कहा गया था। इसमें सभी जिलों और इकाइयों से उन वाहनों की जानकारी देने को कहा गया था जिनका वे उपयोग कर रहे हैं।” ऑडिट में यह पता चला है कि कई अधिकारी तो ऐसे भी हैं जो तीन या उससे अधिक वाहनों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

इस ऑडिट में सामने आया कि सुरक्षा इकाइयों में 6,828 की स्वीकृत संख्या के मुकाबले 5,465 कर्मी ही थे। इसमें कम से कम 535 पुलिसकर्मी ऐसे थे जो पूर्व पुलिस कमिश्नरों, सेवानिवृत्त जजों और सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारियों के साथ जुड़े हुए थे।

एक अधिकारी ने बताया कि दिल्ली पुलिस के पास 2,568 एलएमवी (हल्के मोटर वाहन) हैं। ऐसे में पता चला कि कई वरिष्ठ अधिकारी जिसमें जेसीपी, डीसीपी, यहां तक ​​कि पुलिस आयुक्त जो सेवानिवृत्ति हो चुके हैं या फिर उनका स्थानांतरण हो चुका है, वो भी आधिकारिक वाहन नहीं लौटा रहे थे।

बता दें कि तीन साल पहले डीसीपी रैंक के एक अधिकारी का तबादला हुआ था लेकिन उन्हें आधिकारिक तौर पर मिला वाहन अभी भी उनके घर में था। अधिकारी ने कहा कि “फैसला लिया गया है कि ट्रांसफर होने पर, अधिकारी अपने वाहन को उस जिले / इकाई को लौटा दें जिसने उन्हें वाहन आवंटित किया था। इसके अलावा एक से अधिक वाहनों की अनुमति नहीं दी जाएगी।

बता दें कि यह ऑडिट धनबाद के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश उत्तम आनंद की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों को सुरक्षा मुहैया कराने के फैसले के बाद किया गया था।

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