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कोरोना ने ली नौकरी: टीचर को पकड़नी पड़ी सिलाई मशीन, उठाना पड़ा फावड़ा

योगेश का कहना है कि उन्होंने कभी भी दिल्ली में अपने काम से छुट्टी नहीं ली थी लेकिन अब इन हालात में परिवार का पेट भरना ज्यादा अहम है।

Author Edited By नितिन गौतम नई दिल्ली | Updated: June 29, 2020 9:54 AM
lockdown, unemployment, guest teachersस्कूल बंद होने के चलते गेस्ट टीचर्स की कमाई बिल्कुल बंद हो गई है।

तीन टीचर जो कि उत्तर पश्चिमी दिल्ली के एक कमरे में साथ रहते थे, बीते दो महीने से तन्ख्वाह नहीं मिलने के बाद अपने अपने गांव लौट गए हैं। जहां वह अपने और अपने परिवार का पेट भरने के लिए मजदूरी करने को मजबूर हैं। बता दें कि सुरेंद्र सैनी (35 वर्ष), योगेश कुमार (34 वर्ष) और दीपक कुमार शुक्ला (29 वर्ष) निठारी गांव में स्थित सर्वोदय बाल विद्यालय में बतौर गेस्ट टीचर पढ़ाते हैं। हालांकि 20,000 अन्य गेस्ट टीचर्स के साथ इन्हें भी बीती 8 मई से सैलरी नहीं मिली है।

गौरतलब है कि शिक्षा विभाग ने अपने एक आदेश में कहा था कि “सभी गेस्ट टीचर्स को 8 मई 2020 तक भुगतान किया जाए और गर्मियों की छुट्टियों के दौरान अगर उनसे काम लिया जाता है तो ही भुगतान किया जाए।” अब चूंकि स्कूल पूरी तरह से बंद है, ऐसे में गेस्ट टीचर्स की कमाई बंद हो गई है।

सुरेंद्र सैनी, जो कि एक टीजीटी हिंदी टीचर हैं, उन्होंने CTET की परीक्षा पास की है और 8वीं से लेकर 10वीं तक की कक्षा के बच्चों को पढ़ाते हैं। सैनी फिलहाल राजस्थान के अलवर जिले में स्थित अपने गांव लौट चुके हैं। जहां वह नीमराना स्थित एर पीपीई किट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में काम कर रहे हैं।

सुरेन्द्र ने बताया कि उन्हें एक पीपीई किट बनाने के 25 रुपए मिलते हैं और वह दिन में 8-10 पीपीई किट बना पाते हैं। इसी तरह सुरेंद्र के दोस्त योगेश कुमार एक टीजीटी मैथ टीचर हैं, जो कि हरियाणा के रेवाड़ी स्थित अपने गांव जा चुके हैं।

योगेश अपने गांव में खेतों पर काम कर रहे हैं। योगेश का कहना है कि उन्होंने कभी भी दिल्ली में अपने काम से छुट्टी नहीं ली थी लेकिन अब इन हालात में परिवार का पेट भरना ज्यादा अहम है। योगेश का कहना है कि सैलरी ना मिलने के चलते हर माह कमरे का 5500 रुपए किराया देना उनके लिए संभव नहीं था, जिसके चलते उन्हें गांव लौटने पर मजबूर होना पड़ा।

सुरेंद्र और योगेश के दोस्त और उनके साथ किराए के कमरे में साथ रहने वाले दीपक कुमार शुक्ला एक आर्ट टीचर हैं लेकिन काम नहीं होने के चलते वह भी यूपी के शाहजहांपुर स्थित अपने गांव लौट चुके हैं। अपने गांव में दीपक गन्ने की खेती कर रहे हैं। खेती की जमीन कम होने के चलते दीपक को पैसों के लिए अन्य किसानों के खेतों पर भी काम करना पड़ता है। दीपक का कहना है कि उन्होंने अपने पांच साल के बेटे का दिल्ली के एक निजी स्कूल में एडमिशन कराया था लेकिन अब तंगी के चलते वह उसे घर पर ही पढ़ा रहे हैं।

30 जून को स्कूलों में गर्मियों की छुट्टियां समाप्त हो रही हैं। ऐसे में स्कूल खुलने पर गेस्ट टीचर्स को फिर से काम मिलने की उम्मीद है। इसी उम्मीद के सहारे सुरेंद्र, योगेश और दीपक जैसे हजारों गेस्ट टीचर्स वापस काम पर लौटने की राह देख रहे हैं।

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