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UAPA झेलने वाले आसिफ ने आपबीती सुना कहा- मुस्लिम हूं, इसलिए कहलाया दंगाई-जिहादी व देशविरोधी

एक टीवी प्रोग्राम में आसिफ ने कहा कि वो झारखंड का रहने वाला है। उसकी आरंभिक शिक्षा मदरसे में हुई और आगे की पढ़ाई के लिए वो दिल्ली आ गया। दूसरे प्रयास में एंट्रेंस क्लीयर हुआ और उसे जामिया विवि में प्रवेश मिल सका। यहीं से उसके राजनीतिक करियर की भी शुरुआत हुई।

जेल से छूटने के बाद अपने मां के गले लगा आसिफ (फोटोः स्क्रीनशॉट यूट्यूब वीडियो)

दिल्ली दंगा मामले में जमानत पर बाहर आए आसिफ तन्हा ने कहा कि मुस्लिम हूं, इसलिए कहलाया दंगाई-जिहादी व देशविरोधी। उनका कहना था कि मुसीबत के समय में जो साथ माता-पिता ने दिया वो शब्दों से परे है। पिता का कहना था कि वो कभी थाने नहीं गए। वो मानते हैं कि जेल जाना सबको नसीब नहीं होता। जबकि मां ने कहा था कि कुछ गलत नहीं किया तो वो मुझे बाहर निकालेंगे।

आसिफ जामिया मिल्लिया इस्लामिया से स्नातक के छात्र हैं। उसे मई 2020 में यूएपीए के तहत दिल्ली हिंसा के मामले में गिरफ्तार किया गया था। इस मामले के दूसरे आरोपी नताशा नरवाल और देवांगना कलिता जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में पीएचडी स्कॉलर हैं। दोनों पिंजरा तोड़ आंदोलन से जुड़ीं हुईं हैं। ये सभी लोग 2020 से UAPA के तहत हिरासत में थे। हाल ही में उन्हें कोर्ट ने जमानत पर रिहा किया है। ये मामला बीते साल हुए दिल्ली दंगों से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, तीनों आरोपियों ने कुछ अन्य लोगों सके साथ के साथ मिलकर ऐसा व्यवधान पैदा करने की साजिश रची, जिससे कानून और व्यवस्था की स्थिति बिगाड़ी जा सके।

एक टीवी प्रोग्राम में आसिफ ने कहा कि वो झारखंड का रहने वाला है। उसकी आरंभिक शिक्षा मदरसे में हुई और आगे की पढ़ाई के लिए वो दिल्ली आ गया। दूसरे प्रयास में एंट्रेंस क्लीयर हुआ और उसे जामिया विवि में प्रवेश मिल सका। यहीं से उसके राजनीतिक करियर की भी शुरुआत हुई। कैंपस में भाषण दिया था जिससे साथी प्रभावित हुए और वो लाइमलाइट में आ गया।

आसिफ का कहना है कि उसके घर की माली हालत अच्छी नहीं है। वो अपनी पढ़ाई का खर्च भी खुद ही उठा रहा था। उसे मुस्लिम होने की सजा मिली।

गौरतलब है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने बीते सप्ताह नताशा नरवाल, देवांगना कलिता और आसिफ इकबाल तन्हा को जमानत दी थी। जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति अनूप जे. भंभानी की पीठ ने कहा कि प्रथम दृष्ट्या, UAPA की धारा 15, 17 या 18 के तहत कोई भी अपराध तीनों के खिलाफ वर्तमान मामले में रिकॉर्ड की गई सामग्री के आधार पर नहीं बनता है। कोर्ट ने कई तथ्यों को ध्यान में रखते हुए माना कि विरोध जताना कोई आतंकी गतिविधि नहीं है।

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