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Delhi Riots: ब्लास्ट में गंवाया हाथ, पुलिस ने दर्ज किया दुर्घटना का केस

अकरम खान ने बताया कि वो 24 फरवरी को कसाबपुरा इज्तेमा में शामिल होने के लिए दोपहर दो बजे के करीब घर से निकले थे, मगर वो इज्तेमा में नहीं पहुंच सके क्योंकि हिंसा पहले ही शुरू हो चुकी थी।

Delhi High Courtदिल्ली दंगों में कम से कम 53 लोगों की मौत हो गई थी और करीब 200 लोग घायल हो गए थे। (पीटीआई)

दिल्ली के उत्तर पूर्व क्षेत्र में इस साल फरवरी में हुए सांप्रदायिक दंगों में पुराना मुस्तफाबाद निवासी अकरम खान (22) बुरी तरह घायल हो गए। दंगों के दौरान हुए एक धमाके में उनका दाहिना हाथ और बाएं हाथ की एक उंगली चपेट में आ गए। हालांकि पुलिस ने अपनी एफआईआर कहा है कि उन्हें ‘दुर्घटना’ के दौरान ये चोटें आईं। 25 फरवरी को गुरु तेग बहादुर हॉस्पिटल (जीटीबी) में भर्ती किए गए गारमेंट वर्कर खान ने बताया कि एफआईआर तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत करती है। इसकी कॉपी अभी भी पुलिस ने हमें उपब्ध नहीं कराई है।

अकरम के मामले से जुड़ी एफआईआर शास्त्री पार्क पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई। न्यूज18 डॉट कॉम को इसकी एक कॉपी मिली है। इसमें घटना का वर्णन एक दुर्घटना के रूप में किय गया है। इसमें पुलिस ने आईपीसी की धारा 279 और 337 के तहत मामला दर्ज किया है।

धारा 279 में अगर कोई व्यक्ति किसी वाहन को एक सार्वजनिक मार्ग पर किसी तरह की जल्दबाजी या लापरवाही से चलाता है, जिससे मानव जीवन को कोई संकट या किसी व्यक्ति को चोट या आघात पहुंचा सकता है, तो उस व्यक्ति पर इस धारा के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया जाता है। 337 में अगर किसी व्यक्ति के उतावलेपन या उपेक्षा के चलते किसी कार्य द्वारा किसी मानव जीवन या किसी कि व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरा या चोट पहुंचती है, तो उस व्यक्ति पर इस धारा के अंतर्गत मुकदमा चलता है।

अकरम खान ने न्यूज18 को बताया कि वो 24 फरवरी को कसाबपुरा इज्तेमा में शामिल होने के लिए दोपहर दो बजे के करीब घर से निकले थे, मगर वो इज्तेमा में नहीं पहुंच सके क्योंकि हिंसा पहले ही शुरू हो चुकी थी। उन्होंने बताया कि जब मैं भजनपुरा मजार के पास पहुंचा, मुझपर ‘हिंदू भीड़’ ने हमला किया। जब में अपनी जिंदगी बचाने के लिए वहां से भागा तो मोहन नर्सिंग होम के ऊपर से एक बम फेंका गया जो मेरे पास जाकर गिरा। मैं बेहोश हो गया, जब बाद में आंखें खुली तो खुद को हॉस्पिटल में पाया।

अकरम खान को प्राथमिक चिकित्सा देने के बाद जीटीबी हॉस्पिट ले जाया गया। जहां एक दिन बाद उनके दाहिने हाथ को काटकर अलग कर दिया गया। बकौल अकरम मेरे बाएं हाथ की दर्जनी उंगली भी घाव के सड़ने की वजह से काट दी गई। इधर नाम ना बताते हुए एक अधिकारी ने बताया कि जीटीबी हॉस्पिटल पहुंचने पर पुलिस अधिकारी ने देखा कि अकरम अपना बयान देने की हालत में नहीं थे, क्योंकि वो गंभीर रूप से घायल थे। इसलिए हमने एमएलसी के आधार पर एफआईआर दर्ज की।

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