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दिल्ली दंगा: परवेज के हत्यारों ने डिलीट कर दिया मोबाइल डेटा, सीसीटीवी फुटेज भी नहीं, हथियार ढूंढ़ना मुश्किल, चार्जशीट में बोली दिल्ली पुलिस

इस मामले में पुलिस ने जिन लोगों से पूछताछ की है, उनमें विश्व हिंदू परिषद के एक पदाधिकारी भी शामिल हैं। अब इन पदाधिकारी ने एक शिकायत दर्ज करायी है, जिसमें उन्होंने 'बेकसूर हिंदुओं के खिलाफ झूठे मामले दर्ज' करने की बात कही है।

delhi riot delhi policeदिल्ली पुलिस की चार्जशीट में 16 लोगों के नाम हैं। (एक्सप्रेस फोटो)

‘आर्म्स एक्ट की धाराएं हटा दी गई हैं। सभी आरोपियों ने दंगे होने पर अपने मोबाइल फोन डाटा को डिलीट कर दिया था। घटना की सीसीटीवी फुटेज नहीं मिली हैं।’ ये कुछ खुलासे हैं, जो दिल्ली पुलिस ने परवेज हत्याकांड के मामले में अपनी चार्जशीट में किए हैं। बता दें कि उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगे के दौरान 25 फरवरी को परवेज (48 वर्ष) को छाती में गोली मारी गई थी और उसी के चलते उसकी जान चली गई थी। चार्जशीट में 16 लोगों के नाम हैं, जिन पर हत्या और दंगे भड़काने का आरोप है।

पुलिस ने कड़कड़डूमा कोर्ट के चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट के सामने यह चार्जशीट दाखिल की है। चार्जशीट के अनुसार, फोरेंसिक एक्सपर्ट मोबाइल के डिलीट डाटा और सीसीटीवी फुटेज को वापस पाने की कोशिशों में जुटे हैं। इस मामले में पुलिस ने जिन लोगों से पूछताछ की है, उनमें विश्व हिंदू परिषद के एक पदाधिकारी भी शामिल हैं। अब इन पदाधिकारी ने एक शिकायत दर्ज करायी है, जिसमें उन्होंने ‘बेकसूर हिंदुओं के खिलाफ झूठे मामले दर्ज’ करने की बात कही है।

9 अप्रैल को विश्व हिंदू परिषद के युमना विहार विभाग के उपाध्यक्ष देवेश मिश्रा समेत 22 लोगों को दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने परवेज हत्याकांड के मामले में समन भेजा था। उसी रात मिश्रा समेत 6 लोगों को पुलिस ने पूछताछ के बाद छोड़ दिया था। मिश्रा का दावा है कि पुलिस ने झूठी शिकायत के आधार पर उनसे पूछताछ की। यह शिकायत परवेज के बेटे साहिल परवेज द्वारा दर्ज करायी गई थी। शिकायत में कहा गया था कि देवेश मिश्रा उग्र भीड़ का नेतृत्व कर रहे थे।

मिश्रा का कहना है कि ‘मेरे फोन की रिकॉर्ड डिटेल्स, सीसीटीवी फुटेज बताती हैं कि मैं दिल्ली में मौजूद नहीं था। पुलिस ने मेरा फोन सीज कर लिया है, सीडीआर चेक की और फिर मुझे जाने दिया।’ परवेज हत्याकांड में पुलिस ने जिन लोगों को गिरफ्तार किया है, उनमें सुशील कुमार (40),  जयबीर सिंह (57), सुपरेम माहेश्वरी (26), अतुल चौहान (37), विरेंद्र चौहान (40),  पवन कुमार (44),  सुरेश पंडित (50), अमित कुमार (42), नरेश त्यागी (50), उत्तम त्यागी (46), दीपांशु गुप्ता (30), राजपाल सिंह (48), अखिल चौधरी (23),  उत्तम चांद मिश्रा (49), हरिओम मिश्रा (55), संदीप चावला (44) का नाम शामिल है।

देवेश मिश्रा ने 21 अप्रैल को सरकार को एक पत्र लिखा था, जिसमें दिल्ली पुलिस पर आरोप लगाया था कि पुलिस भेदभाव पूर्ण तरीके से जांच कर रही है और हिंदुओं के खिलाफ झूठे केस दर्ज कर रही है। इस शिकायत के आधार पर क्राइम ब्रांच ने मिश्रा से अपने दावे के पक्ष में सबूत पेश करने को कहा है लेकिन मिश्रा ने सबूत होने से इंकार कर दिया है और इसी के चलते मामले की दोबारा जांच करने की अपील की है।

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