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दीपक चौरसिया ने योगेन्द्र यादव पर लगाया मुस्लिमों को भड़काने का आरोप तो मिला जवाब- लेख अंग्रेज़ी में था, पर इतना मुश्किल भी नहीं था

चौरसिया ने अपने ट्वीट में लिखा योगेन्द्र यादव का नाम जब पुलिस ने दिल्ली दंगे में लिया तो खूब हल्ला मचा। लेकिन एक बेवसाइट पर अपने लेख में उन्होंने दिल्ली पुलिस को सच साबित कर दिया।

delhi riots, deepak chaurasia, yogendra yadav, swaraj india,योंगेंद्र यादव ने दीपक चौरसिया को व्यंग्यात्मक रूप से जवाब दिया। (फाइल फोटो)

दिल्ली दंगे को लेकर सोशल मीडिया पर रोज नए-नए आरोप प्रत्यारोप देखने को मिल रहे हैं। इस क्रम में पत्रकार दीपक चौरसिया ने स्वराज इंडिया के अध्यक्ष और एक्टिविस्ट योगेंद्र यादव पर मुस्लिमों को भड़काने का आरोप लगाया।

चौरसिया ने अपने ट्वीट में लिखा योगेन्द्र यादव का नाम जब पुलिस ने दिल्ली दंगे में लिया तो खूब हल्ला मचा। लेकिन एक बेवसाइट पर अपने लेख में उन्होंने दिल्ली पुलिस को सच साबित कर दिया। उनका कहना है कि अब मुस्लिम युवकों को गैर लोकतांत्रिक तरीको का इस्तेमाल करना होगा। मतलब क्या फिर दंगे? चौरसिया के इस ट्वीट पर योगेंद्र यादव ने जवाब दिया माना कि लेख अंग्रेजी में है, लेकिन पढ़ना इतना कठिन तो नहीं होना चाहिए था दीपक भाई!

योगेंद्र यादव के इस जवाब को लेकर लोगों ने दीपक चौरसिया को खूब ट्रोल किया। एक यूजर @maulanadehlavi ने लिखा आप तो अंग्रेजी की बात कर रहे हैं इन को तो सही ढंग से हिंदी लिखना पढ़ना बोलना नहीं आता। एक अन्य यूजर ने दीपक चौरसिया पर के बारे में लिखा कि ये पत्रकार नहीं एक पार्टी विशेष का दलाल है।

वहीं, @AntiPeopleMedia ट्वीट हैंडल से दीपक चौरसिया की आलोचना करते हुए लिखा गया कि पढ़ने लिखने की आदत छूट गई है ना पिछले कई सालों से। अब तो बस दिनभर ट्विटर पर थोड़ा-बहुत कुछ भी नफरती लिख देना और रात को नफरत फैलाना। बस रोज का यही काम है साहब का। जो जनता की आवाज ना बने वो तो छोटा-मोटा पत्रकार होता है। पता नहीं क्यों ऐसों को लोग बड़ा पत्रकार क्यों कहते हैं?

वहीं, कुछ लोगों ने योगेंद्र यादव को भी ट्रोल कर दिया। एक यूजर @Pradeep24171613 ने लिखा कि यादव जी हाफिज सईद या जाकिर नाईक बनने की कोशिश न करें, वर्ना एफआईआर होगी प्रयागराज में और गाड़ी पलटेगी नोएडा में,…..और उसके बाद पता ही है सीधे जन्नत मिलेगी।

यूजर @sunnyand65 ने लिखा कि आपसे (योगेंद्र यादव), अंग्रेज़ी भाषा के ऐसे आभिजात्यवादी प्रदर्शन की अपेक्षा नहीं थी योगेन्द्र सर। आप भाषायी समानता पर लिखते बोलते आए हैं, पर ऐसा श्रेणीकरण आपत्तिजनक है। आप अपने दीपक भाई के लिए कोई और मुहावरा चुन सकते थे।

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