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Delhi Elections 2020: चुनाव में अवाम बनाम वाम

Delhi Elections 2020: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव डी राजा ने कहा कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय और जामिया मिल्लिया इस्लामिया और शाहीन बाग में जारी सीएए, एनआरसी और एनपीआर के खिलाफ चल रहे आंदोलनों का सबसे अधिक नुकसान केंद्र को होगा।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव डी राजा

Delhi Elections: दिल्ली विधानसभा चुनाव की शुुरुआत तो हुई थी मुफ्त बिजली-पानी जैसे स्थानीय मुद्दे से लेकिन चुनाव आते-आते यह नागरिकता संशोधन कानून और शाहीन बाग जैसे प्रतीकों पर केंद्रित हो गया। दिसंबर में शुरू हुआ शाहीन बाग का आंदोलन पूरी दुनिया में सुर्खियों में है तो दिल्ली में अब इसे ध्रुवीकरण का केंद्र करार दिया जा रहा है। आज के समय में इंद्रलोक मेट्रो स्टेशन से लेकर निजामुद्दीन तक 15 जगहों पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। नागरिक संगठनों के इस विरोध को किस तरह से देखा जाए?

इस सवाल के जवाब में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव डी राजा ने कहा कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय और जामिया मिल्लिया इस्लामिया और शाहीन बाग में जारी सीएए, एनआरसी और एनपीआर के खिलाफ चल रहे आंदोलनों का सबसे अधिक नुकसान केंद्र को होगा। उन्होंने कहा कि यहां सवाल यह नहीं है कि इसका लाभ किसे होगा बल्कि बड़ा प्रश्न यह है कि इसका नुकसान किसे होगा? आम आदमी पार्टी सरकार में है और अन्य धर्मनिपेक्ष लोकतांत्रिक पार्टियां भी चुनाव मैदान में हैं।

राजा ने कहा कि अब हमें यह समझना होगा कि जेएनयू, जामिया और शाहीन बाग के आंदोलन क्यों हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि जेएनयू का आंदोलन फीस वृद्धि को लेकर शुरू हुआ लेकिन इस बीच केंद्र सरकार की ओर से नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) संसद में पास करा दिया गया है और एनआरसी व एनपीआर की बातें होने लगीं। उन्होंने कहा कि सिर्फ दिल्ली में ही नहीं पूरे देश में हर वर्ग के लोग सीएए और एनआरसी के खिलाफ आंदोलन में भाग लेने के लिए सड़कों पर उतरे। हर वर्ग के सड़क पर उतरने की वजह यह है कि सीएए न केवल अल्पसंख्यकों के ही खिलाफ है बल्कि यह अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और देश के सभी गरीब लोगों के भी खिलाफ है।

उन्होंने कहा कि लोगों के बीच इस कानून को लेकर बेहतर जानकारी उपलब्ध है। दिल्ली में चल रहे विरोध प्रदर्शनों में वाम से जुड़े संगठनों की अहम भूमिका है। तो क्या आंदोलनरत अवाम का वोट वाम को मिलेगा? सीपीआइ ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में तीन उम्मीदवारों को उतारा है। इनमें पालम से दिलीप कुमार, तिमारपुर से संजीव कुमार राणा और बवाना से अभीप्सा चौहान शामिल हैं।

सीपीआइ के महासचिव डी राजा ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में बहुत तरह की विविधता देखी जा सकती है लेकिन भाजपा इस विविधता को स्वीकार नहीं करती है। भाजपा का बिलकुल अलग एजंडा है। भाजपा भारत गणराज्य को धर्मशासित देश में परिवर्तित करना चाहती है। हम भाजपा की इस सोच पर हमला कर रहे हैं और यही हमारा प्रमुख मुद्दा भी है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा दिल्ली के स्थानीय मुद्दे भी हैं जिनमें बिजली, पानी, स्वास्थ्य सेवाएं आदि शामिल हैं।

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