ताज़ा खबर
 

फेरबदल से पुलिस की शक्ल बदलने की कवायद

भीमसेन बस्सी ने पुलिस आयुक्त रहते जिस तरह दिल्ली सरकार से पंगा लिया उसका संदेश पूरे देश में यह गया कि सब कुछ केंद्र सरकार के इशारे पर हो रहा है। नतीजतन बस्सी सूचना आयुक्त बनते-बनते रह गए। बस्सी के मामले से सबक ले मंत्रालय के निर्देश पर ही मौजूदा आयुक्त आलोक कुमार वर्मा विभागीय कार्यों और दिल्ली की कानून व्यवस्था में सुधार पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं और बयानबाजी से बच रहे हैं। (फाइल फोटो में बाएं आलोक कुमार और दाएं बस्सी)

Author नई दिल्ली | April 8, 2016 4:08 AM

दिल्ली पुलिस के आला अधिकारियों में हुए फेरबदल से कई संकेत मिले हैं। गृह मंत्रालय ने दिल्ली की कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए जहां दो विशेष आयुक्तों का पद बनाया है। वहीं अगले साल खाली होने वाले पुलिस आयुक्त के पद पर भी संभावित नाम की हरी झंडी दे दी है। इस फेरबदल से यह भी संदेश है कि जिले में वही अधिकारी रहेंगे जो दिल्ली की कानून व्यवस्था पर रोक लगाने में सक्षम हैं।

सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्रालय के विभागीय प्रोन्नति समिति (डीपीसी) का मानना है कि दिल्ली में बेतरतीब बढ़ रही जनसंख्या और देश के दूर-दराज के क्षेत्रों से आजीविका के लिए आने वाले लोगों की सुरक्षा एक बहुत बड़ी चुनौती बन गई है। अनधिकृत कालोनियों और झुग्गी झोपड़ी में रह रहे लोगों को बुनियादी सुविधाएं न दे पाने से जितनी किरकिरी केंद्र सरकार की नहीं होती उससे ज्यादा राजधानी में घटने वाली आपराधिक घटनाओं से छवि खराब होती है। सारे केंद्रीय पुलिस बलों, अर्द्धसैनिक बलों के मुख्यालय और दिल्ली पुलिस की भारीभरकम फौज के बाद भी दिल्ली में आए दिन होने वाली वारदातों से राजधानी की छवि खराब होती है। दिल्ली वाले सुरक्षा के मामले में कम से कम निश्चिंत रहे इसलिए दिल्ली पुलिस को मजबूत और पुख्ता करने की जरूरत है।

डीपीसी ने पुलिस आयुक्त के बाद तीसरे-चौथे नंबर पर तैनात विशेष आयुक्त कानून व्यवस्था के एक पद को दो पदों में विभाजित करने का फैसला किया। इन्हें दक्षिणी और उत्तरी में बांटा गया। दक्षिणी में दक्षिण-पूर्व, दक्षिण-पश्चिम और रेलवे, मेट्रो सहित नई दिल्ली क्षेत्र को जबकि उत्तरी में मध्य, उत्तरी और पूर्वी क्षेत्र को जोड़ा गया। इन पदों पर 1987 बैच के पी कामराज और 1988 बैच के एबीके सिंह को तैनात किया गया है। इन्हें डीजी स्केल दिया गया है कि नहीं यह अभी पता नहीं है।

सूत्रों के मुताबिक, इस फेरबदल से जो बड़े संकेत दिए गए हैं उनमें अगले साल खाली होने वाले आयुक्त की कुर्सी का भी है। यह कुर्सी कांटों भरी होती है। भीमसेन बस्सी ने पुलिस आयुक्त रहते जिस तरह दिल्ली सरकार से पंगा लिया उसका संदेश पूरे देश में यह गया कि सब कुछ केंद्र सरकार के इशारे पर हो रहा है। नतीजतन बस्सी सूचना आयुक्त बनते-बनते रह गए। बस्सी के मामले से सबक ले मंत्रालय के निर्देश पर ही मौजूदा आयुक्त आलोक कुमार वर्मा विभागीय कार्यों और दिल्ली की कानून व्यवस्था में सुधार पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं और बयानबाजी से बच रहे हैं।

सूत्रों का कहना है कि अगले साल जुलाई में आलोक कुमार सेवानिवृत्त होंगे। तब आयुक्त की कुर्सी किसे मिले यह भी डीपीसी ने अभी से संकेत दे दिया है। इस पद के प्रबल दावेदारों में दीपक मिश्रा का नाम सामने आ गया है। मिश्रा 1984 बैच के आइपीएस हैं और दिल्ली पुलिस में लंबे समय से कार्यरत हैं। कयास लगा था कि वर्मा के आयुक्त बनने के बाद मिश्रा को केंद्रीय डिपुटेशन पर बीपीआरएनडी या गृह मंत्रालय में कोई ओहदा दिया जा सकता है। पिछले महीने की 31 तारीख को डीपीसी की बैठक होनी थी। लेकिन केंद्रीय गृह सचिव के दिल्ली से बाहर रहने के कारण यह बैठक एक फरवरी को हुई और इसमें दिल्ली के बारे में गहन विचार-विमर्श हुआ।

मौजूदा केंद्र सरकार से बेहतर तालमेल और दिल्ली की अच्छी समझ के कारण उनके बारे में तय किया गया कि उन्हें केंद्रीय डिपुटेशन पर लेने के बजाए अगले साल खाली हो रहे आयुक्त की कुर्सी पर बैठाने के संदेश देकर दिल्ली पुलिस में ही उन्हें रोक लिया जाए। इंसपेक्टर से लेकर उपायुक्त तक के बारे में और सीलमपुर, पुरानी दिल्ली दंगे सहित कई अन्य संवेदनशील मामले को बिना किसी चर्चा के निपटा चुके मिश्रा आप सरकार के गठन के बाद अपनी छवि बेहतर बनाने में कामयाब हुए हैं। हालांकि मिश्रा भी आलोक वर्मा की तरह ज्यादा दिनों तक आयुक्त पद पर नहीं रहेंगें और डेढ़ साल से कम में ही रिटायर हो जाएंगे। मिश्रा की राह में रोड़ा बनने वाले 1984 बैच के धमेंद्र कुमार को पहले ही मंत्रालय ने सीआइएसएफ में अतिरिक्त महानिदेशक के पद पर भेजकर बाकी सेवा वहीं काटने का संदेश दे दिया है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App