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इधर हास्य कवि सम्मेलन में शामिल हो रहे थे दिल्ली पुलिस के अफसर, उधर जमा हो गए 300-400 प्रदर्शनकारी, रोड कर दिया ब्लॉक

पुलिस के मुताबिक उत्तर-पूर्व दिल्ली में पिछले एक महीने से कुछ लोग सीएए विरोधी आंदोलन कर रहे थे, लेकिन शनिवार को इनकी संख्या अचानक बढ़ गई और जाफराबाद रोड को ब्लाक कर दिए।

पुलिस सप्ताह के मौके पर पूर्वी दिल्ली के न्यू अशोक नगर में आयोजित हास्य कवि सम्मेलन में मौजूद पुलिस अधिकारी (फोटो- इंडियन एक्सप्रेस)

नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ पिछले शनिवार को जब दिल्ली के जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के पास 300 से 400 प्रदर्शनकारी रास्ता ब्लाक कर दिए थे, उस वक्त दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी पूर्वी दिल्ली के न्यू अशोक नगर में आयोजित हास्य कवि सम्मेलन में भाग ले रहे थे। इन अफसरों में डीसीपी (उत्तर-पश्चिम) वेद प्रकाश सूर्य भी शामिल थे। वे आठ बजे कार्यक्रम से बाहर निकले और दस बजे तक प्रदर्शनकारी स्टेशन को घेर लिए थे।

पुलिस के मुताबिक उत्तर-पूर्व दिल्ली में पिछले एक महीने से कुछ लोग सीएए विरोधी आंदोलन कर रहे थे, लेकिन शनिवार को इनकी संख्या अचानक बढ़ गई और जाफराबाद रोड को ब्लाक कर दिए। इनकी प्रतिक्रिया में बीजेपी के कपिल मिश्रा ने भी रविवार को उसी क्षेत्र में सीएए के समर्थन में रैली की।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक “पुलिस सप्ताह के मौके पर न्यू अशोक नगर में ‘हास्य कवि सम्मेलन’ का आयोजन किया गया था। जेसीपी (पूर्वी क्षेत्र) आलोक कुमार मुख्य अतिथि थे। इसमें पूर्वी क्षेत्र के सभी एसएचओ को अपने स्टाफ के साथ आने को कहा गया था। कार्यक्रम में डिनर की भी व्यवस्था थी। शनिवार की रात करीब साढ़े दस बजे जब मेट्रो स्टेशन के पास प्रदर्शनकारी इकट्ठे हो गए तब आसपास के जिलों से पुलिस बल को जाफराबाद में बुलाया गया।”

इस बारे में जब डीसीपी सूर्य प्रताप से संपर्क किया गया तो वे बोले कि साढ़े सात बजे वे कार्यक्रम से निकल गए और साढ़े आठ बजे पुलिस बल को बुला लिया गया। संयोग से डीसीपी (उत्तर-पश्चिम) वेद प्रकाश सूर्य जब सीएए विरोधी आंदोलनकारियों को चेतावनी दे रहे थे, तब वे बीजेपी के कपिल मिश्रा के पास ही खड़े थे। उन्होंने पुलिस को रास्ता खोलवाने के लिए तीन दिन का समय दिया।

जेसीपी आलोक कुमार ने संडे एक्सप्रेस को बताया कि मेट्रो स्टेशन के पास प्रदर्शनकारियों के एकत्र होने की जानकारी मिलते ही डीसीपी (उत्तर-पश्चिम) वेद प्रकाश सूर्य कार्यक्रम छोड़कर चले गए थे और सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त कराई। 25 फरवरी को जिले में हिंसा फैलने के एक दिन बाद पुलिस ने जाफराबाद में धरना खत्म करा दिया था।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि “पहले हमें सूचना मिली थी कि प्रदर्शनकारी 500 मीटर दूर पुराने क्षेत्र में एकत्र होंगे, लेकिन उन्होंने जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के पास सड़क ब्लाक कर दी। बच्चों समेत करीब 500 महिलाएं और 400 पुरुष वहां जुटे थे, लेकिन अगली सुबह भीड़ में दो से तीन हजार लोग शामिल हो गए। हालात तब बिगड़ गया जब सीएए समर्थकों ने भी घोषणा कर दी कि वे मौजपुर क्षेत्र को ब्लाक कर देंगे। पुलिस ने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन वे कुछ नहीं सुन रहे थे।” एक अधिकारी ने कहा कि शाम को पत्थरबाजी शुरू हुई थी, लेकिन स्थानीय पुलिस ने उन्हें नियंत्रित कर लिया।

एक अन्य अधिकारी ने बताया, “24 फरवरी को पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। इस दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की यात्रा की वजह से पूर्वी क्षेत्र के अधिकारी मुक्त रखे गए थे। हालांकि पुलिस बल को मोबिलाइज करने में समय लगा और जरूरत के मुताबिक अफसरों को तैनात किया गया था, फिर भी डीसीपी (शाहदरा) अमित शर्मा को चांदबाग में पीट दिया गया और हेड कांस्टेबल रतन लाल को गोली मार दी गई। और समय पर पुलिस बल वहां नहीं पहुंच सकी।”

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