गांधी जयंती के दिन दिल्ली के जंतर-मंतर पर वोटर लिस्ट के एसआईआर में कथित अनियमितताओं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन के दौरान सैकड़ों लोगों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया। हालांकि प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली पुलिस पहले से ही अलर्ट थी, दिल्ली में सुरक्षा कड़ा कर दी गई थी।
शुक्रवार को दोपहर एक बजे जनपथ रोड पर दिल्ली पुलिस के जवान तैनात थे। साथ ही रास्ते को बैरिकेड्स लगाकर बंद कर गया था। करीब 50 से 60 प्रदर्शनकारी पास ही मैकडॉनल्डस आउटलेट के पास पांच या छह लोगों के बिखरे हुए समूहों से खड़े थे, कुछ नाच रहे थे और अन्य नारे लगा रहे थे।
10 से अधिक होते हैं, तो उठा लो- पुलिस
एक पुलिसकर्मी ने अपनी सीनियर अधिकारी से पूछा, “क्या इन्हें उठा ले और बस में बिठा दें?” सीनियर अधिकारी ने जवाब दिया, “रुको। अगर वे समूह में 10 से अधिक होते हैं, तो उठा लो।”
लेकिन ये छोटे ग्रुप दो माह पहले जंतर-मंतर और पास की पार्लियामेंट स्ट्रीट पर उमड़ी भीड़ से बिल्कुल अलग थे। इसी साल 25 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी के अभिजीत दीपके और सोनम वांगचुक के भूख हड़ताल शुरू करने के बाद हजारों लोग सड़कों पर आ गए थे और फिर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को कथित नीट यूजी परीक्षा लीक मामले में इस्तीफा देना पड़ा था, लेकिन इस पर पुलिस कोई जोखिम नहीं लेना चाहती थी।

सुबह तक पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस थाने और जंतर-मंतर के आसपास के इलाके को सील कर दिया गया था। अधिकारियों ने बताया कि घटनास्थल के आसपास 4000 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था, जिसे कई क्षेत्रों में बांटा गया था, इनमें से हर एक की अगुवाई डीसीपी रैंक के अधिकारी कर रहे थे।
सबसे पहले पहुंचने वाले प्रमुख नेता आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रमुख सौरभ भारद्वाज थे, जो सुबह 10.30 बजे पहुंचे, उन्हें तुरंत पुलिस ने हिरासत में लिया और बस में बिठा दिया।
अगले पांच घंटों तक पुलिस ने एक ही रणनीतिक अपनाई- अशोका रोड, जनपथ और टॉल्सटॉय रोड से आने वाले प्रदर्शनकारियों को पार्लियामेंट स्ट्रीट के पास गोलचक्कर पर रोका गया, बसों में बिठा गया और फतेहपुर बेरी और बदरपुर पुलिस थानों में ले जाया गया।
जब तक एआईएएसए की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा, स्वराज इंडिया के सदस्य योगेंद्र यादव और आरटीआई कार्यकर्ता निखिल डे के साथ नहीं पहुंची। तब तक 500 लोगों को पहले ही हिरासत में लिया जा चुका था।
लाल टी-शर्ट पहने नेहा बोरा ने अशोका रोड पार किया और पार्लियामेंट स्ट्रीट में घुसने की कोशिश की। पुलिस की ओर से धक्का देने पर वह और योगेंद्र यादव वहीं बैठ गए और फिर उनके समर्थक नारे लगाने लगे।

डीसीपी (नई दिल्ली) सचिन शर्मा बैरिकेड्स के पीछे से आगे बढ़े। फिर तीनों को चार पुलिसकर्मियों ने तुरंत उठाया और एक बस में बिठा दिया- सुबह से प्रदर्शनकारियों से भरी यह 18वीं गाड़ी थी।
इसी दौरान योगेंद्र यादव बस के अंदर से चिल्लाए, “गांधी जयंती पर गांधी के देश में जो हो रहा है आप देख रहे हैं, यह सरकार ब्रिटिश सरकार की तरह काम कर रही है और हम झंडे के साथ देश को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।”
प्रदर्शनकारियों 550 थी- दिल्ली पुलिस
700 से अधिक लोगों को हिरासत में लिए जाने के दावों के बाद भी पुलिस ने कहा कि यह संख्या करीब 550 प्रदर्शनकारियों की थी। इनमें दिल्ली की पूर्व सीएम आतिशी, राज्यसभा सांसद संजय सिंह और आरजेडी के सांसद मनोज झा शामिल थे।
फतेहपुर बेरी पुलिस थाने से एक्स पर शेयर किए गए एक वीडियो में आतिशी ने कहा, “हम जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, दिल्ली पुलिस ने आप नेताओं और कार्यकर्ताओं को बर्बरता और क्रूरता तरीके से उठाया।”
वीडियो में हिरासत में लिए गए आप कार्यकर्ताओं को ज्ञानेश कुमार इस्तीफो दो के नारे लगाते हुए दिखाया गया। आतिशी ने अपने पोस्ट में लिखा, “फतेहपुर बेरी पुलिस थाने में भी क्रांतिकारियों में जोश बरकरार है, हम लोकतंत्र के लिए लड़ते रहेंगे। हमें मोदी जी की पुलिस से डर नहीं लगता, ज्ञानेश कुमार को जाना ही होगा।”
विरोध प्रदर्शन से पहले सौरभ भारद्वाज ने मीडिया से कहा, “विरोध करना हमारा लोकतांत्रिक हक है, लेकिन पुलिस हमें बता रही है कि प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई है, जबकि छह दिन पहले आप ने यहां शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए अनुमति मांगी थी।”
इधर जंतर-मंतर तक न पहुंच पाने के कारण प्रदर्शनकारियों के छोटे-छोटे समूह दोपहर भर जनपथ के आसपास जमा हो रहे थे। पीठ पर बैग और लाल गमछा लिए कॉलेज के छात्र, अधेड़ उम्र के पुरुषों और महिलाओं के साथ खड़े थे और कुछ-कुछ देर पर प्रधानमंत्री और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ नारे लगा रहे थे।
लाल कुर्ते पहने एक युवक ने हाथ से बनाया हुआ एक पोस्टर पकड़ रखा था, जिस पर लिखा था ज्ञानेश, काम हो गया भाई। इसके नीचे वोट चोरी और आपत्तियां शब्द लिखे थे। साथ ही एक किताब पर सर लिखा हुआ था और एक कोने में ईवीएम की तस्वीर भी थी।
आंध्र प्रदेश में रहने वाले 36 वर्षीय आईटी पेशेवर पवन (प्रदर्शनकारी) ने कहा, “यह विरोध प्रदर्शन ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के खिलाफ है, लेकिन मुझे लगता है कि इसका एक व्यापक संदर्भ है। मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग ही एकमात्र मुद्दा नहीं है। लोग एसआईआर से नाराज हैं। यह लाखों लोगों के मताधिकार का हनन है।”
मयूर विहार की रहने वाले 26 वर्षीय छाई के लिए यह विरोध प्रदर्शन चुनाव आयोग से जवाबदेही मांगने के लिए था। उन्होंने कहा, “मुझे लगा कि ऐसा करना मेरा कर्तव्य है।”
शाम 6 बजे पुलिस ने किया रिहा
शाम करीब 6 बजे पुलिस ने बताया कि सभी प्रदर्शनकारियों को रिहा कर दिया गया है। एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने कहा कि बीएनएस की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा 21 अक्टूबर तक इस इलाके में लागू रहेंगी।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि अभी तक कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है, लेकिन वे प्रदर्शनकारियों की भूमिका की जांच कर रहे हैं। पुलिस ने किसी भी प्रदर्शनकारी के साथ दुर्व्यवहार करने से भी इनकार किया।
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मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर शुक्रवार को देश में सियासी माहौल बेहद गर्म रहा। नई दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर मुंबई के शिवाजी पार्क में लोग पहुंचे और उन्होंने ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को दोहराया। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
