दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला इमारत गिरने से सात लोगों की मौत हो गई थी। इस मामले में पुलिस ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। हादसे के बाद मौके पर पहुंचा यह शख्स वहां मौजूद छात्रों के पहचानने पर डरकर भाग गया था। पुलिस के मुताबिक, उसे डर था कि छात्र उसके साथ मारपीट कर सकते हैं।

पुलिस ने तीन दिन बाद बुधवार को उसे बुराड़ी में उसके दोस्त के घर से गिरफ्तार किया। आरोपी की पहचान 31 वर्षीय सुधांशु के रूप में हुई है। वह दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन में ‘हॉस्टल डेज़’ (Hostel Daze) नाम से पीजी चलाता था। इस मामले में अब तक पांच लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

DU से पढ़ाई के बाद शुरू किया था पीजी का कारोबार

पुलिस के मुताबिक, सुधांशु ने दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) से 2019 में ग्रेजुएशन किया था। इसके बाद 2022 में उसने अपने दोस्त शुभम त्यागी के साथ मिलकर सत्य निकेतन इलाके में ‘हॉस्टल डेज़’ के नाम से पीजी चलाना शुरू किया। उसका पीजी कारोबार मुख्य रूप से दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों के लिए था।

पुलिस का कहना है कि वर्तमान में सुधांशु इलाके में सात पीजी संचालित करता था। पिछले साल अगस्त में उसने और उसके दोस्त ने हादसे वाली इमारत की चार मंजिलें 1.05 लाख रुपये प्रतिमाह किराये पर ली थीं।

16 बेड की सुविधा तैयार कराने की जिम्मेदारी

डीसीपी अमित गोयल के मुताबिक, सुधांशु की जिम्मेदारी पीजी में 16 बेड की व्यवस्था करने के साथ-साथ जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की थी। वह बिल्डिंग के रखरखाव, मरम्मत और निर्माण से जुड़े कामों की भी निगरानी करता था।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पीजी में कमरा देखने आने वाले लोगों से भी सुधांशु ही बात करता था। अब पुलिस उससे पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हादसे के दिन वह कहां था और इमारत का संचालन किस तरह किया जा रहा था।

कम किराये के कारण ली थी जर्जर इमारत

पुलिस के मुताबिक, जिस इमारत को सुधांशु और उसके साथी ने किराये पर लिया था, उसकी हालत पहले से खराब थी। यही वजह थी कि यह इमारत इलाके में चल रहे दूसरे विकल्पों की तुलना में कम किराये पर उपलब्ध थी।

इसके बावजूद चार मंजिलों को किराये पर लेकर वहां छात्रों के लिए पीजी संचालित किया गया। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि इमारत की कमजोर स्थिति की जानकारी होने के बावजूद वहां निर्माण और पीजी संचालन क्यों किया गया।

किराये के समझौते में क्या था?

पुलिस के मुताबिक, किराये का एग्रीमेंट तैयार कराने की जिम्मेदारी भी सुधांशु की थी। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के अनुसार, समझौते में एक ऐसी शर्त शामिल थी, जिसके तहत पीजी में रहने वाले छात्रों के साथ किसी हादसे या उनकी मौत की स्थिति में पीजी मालिकों को जिम्मेदार नहीं माना गया था।

समझौते में पीजी मैनेजमेंट को यह अधिकार भी दिया गया था कि वह बिना कोई ठोस कारण बताए छात्रों से कमरा खाली करा सकता है। पुलिस अब इस दस्तावेज और हादसे से जुड़े दूसरे रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है।

पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं चार आरोपी

इस मामले में सुधांशु से पहले इमारत के मालिक हरि राम, उनके बेटे महेश, पत्नी उर्मिला और लेबर ठेकेदार सरोज को गिरफ्तार किया जा चुका है। हादसे में सात लोगों की जान गई थी।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, इमारत के मालिकों को कथित तौर पर पता था कि पुरानी इमारत चार अतिरिक्त मंजिलों का भार उठाने की स्थिति में नहीं थी। इसके बावजूद निर्माण को आगे बढ़ाने और बाद में इमारत को पीजी कंपनी को किराये पर देने का आरोप है।

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