दिल्ली के गोविंदपुरी इलाके में पांच मंजिला रिहायशी इमारत में आग लगने से एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई। वहीं, इस भीषण आग में परिवार के ही दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आशंका है कि आग शॉर्ट सर्किट के कारण लगी है।
पुलिस के मुताबिक, मृतकों की पहचान पंकज (28), उनकी मां गुड्डी (50) और बहन सोनी (20) के तौर पर हुई है। ये सभी इमारत की तीसरी मंज़िल पर रहते थे। पंकज मोबाइल मरम्मत की दुकान चलाता था जबकि उसकी मां बोलने में अक्षम हैं। उन्होंने बताया कि परिवार के दो अन्य सदस्य- पंकज की एक और बहन मोनी (18) और उनकी 70 वर्षीय नानी गंभीर रूप से घायल हो गईं और उनका इलाज हो रहा है।
इमारत में लगभग नौ परिवार रहते हैं
निवासियों ने कहा कि इमारत में लगभग नौ परिवार रहते हैं लेकिन घटना के समय उनमें से कई लोग छुट्टियों पर गए हुए थे। उन्होंने दावा किया कि पड़ोसियों और स्थानीय निवासियों की त्वरित प्रतिक्रिया की वजह से अधिक जन हानि रोकने में मदद मिली। आग लगने की घटना के संबंध में पुलिस नियंत्रण कक्ष (पीसीआर) को बृहस्पतिवार और शुक्रवार की दरमियानी रात 2 बजकर 31 मिनट पर सूचना दी गई।
शॉर्ट सर्किट के कारण दोपहिया वाहनों में आग लग गई
दक्षिण पूर्वी दिल्ली के डीसीपी हेमंत तिवारी ने कहा, ”इमारत में घना धुआं भर जाने के कारण कई निवासी अंदर फंस गए थे जिसके बाद बचाव अभियान चलाया गया। इमारत से आठ लोगों को निकालकर उन्हें उपचार के लिए सफदरजंग अस्पताल और एम्स ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया।” पुलिस ने कहा कि प्रारंभिक जांच से पता चला है कि आग इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर शॉर्ट सर्किट के कारण लगी होगी, जिसके बाद बाइक, स्कूटर और साइकिल सहित कई दोपहिया वाहनों में आग लग गई।
पड़ोसियों ने की बचाव अभियान में मदद
आपातकालीन सेवाओं के घटना स्थल पर पहुंचने से पहले स्थानीय निवासी इमारत के अंदर फंसे लोगों को निकालने में मदद के लिए मौके पर पहुंचे। स्थानीय निवासी रेनू भूटानी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ”कई लोग वीडियो रिकॉर्ड कर रहे थे। मैं उन पर रिकॉर्डिंग बंद करने और अपने घरों से बाल्टियां लाने के लिए चिल्लाया ताकि फंसे हुए लोगों को बचाया जा सके।” भूटानी ने कहा कि वह और उनका बेटा, कई अन्य लोगों के साथ, अपने घरों से बाल्टियां लेकर आए और आग की लपटों को बुझाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि आग ग्राउंड फ्लोर पर लगी और 6-7 दोपहिया वाहनों तक फैल गई।
स्थानीय निवासियों ने दावा किया कि उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर दरवाजे तोड़ दिए, आसपास के ढांचों पर चढ़ गए और दमकल कर्मियों के पहुंचने से पहले फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए अस्थायी व्यवस्था की। निवासियों ने कहा कि पड़ोसियों ने घनी आबादी वाले इलाके में तत्काल बचाव प्रयास शुरू नहीं किए होता तो मरने वालों की संख्या ज्यादा हो सकती थी।
मदद के लिए चीख-पुकार सुनकर मौके पर पहुंचे स्थानीय दुकानदार पवन ने कहा, “घना धुआं ऊपरी मंजिल की ओर बढ़ रहा था। कुछ लोगों को सामने की तरफ से बाहर लाया गया जबकि अन्य को पीछे की तरफ से निकाला गया। निवासियों ने लोगों को नीचे उतारने में मदद करने के लिए रस्सियां और यहां तक कि साड़ियां भी बांध दीं।”
बोलने में असमर्थ थीं मृतक महिला
निवासियों के अनुसार, लोगों ने पड़ोसी मकानों की छतों के बीच लकड़ी के तख्ते रखे और छतों के ऊपर से चढ़कर उन लोगों तक पहुंचे जो अंदर फंसे हुए थे। कई निवासियों ने ग्रिल तोड़ने और लोगों को निकलने का रास्ते बनाने के लिए लोहे के कटर का भी इस्तेमाल किया। पवन ने कहा कि छत का दरवाजा बंद होना बड़ी बाधाओं में से एक था। दमकल और स्थानीय निवासियों ने बुजुर्ग मां को बाहर निकाला और सीपीआर देकर उन्हें होश में लाने की कोशिश की।” निवासियों ने कहा कि पंकज का परिवार लगभग दो साल पहले इमारत में रहने आया था। उनकी मां बोलने में असमर्थ थीं और ज्यादातर इशारों के जरिए बातचीत करती थीं।
दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जिस कॉलोनी में इमारत स्थित है वह अनधिकृत बस्ती है। उन्होंने कहा कि इमारत भी बिना मंजूरी के बनाई गई है और हम मामले को देख रहे हैं और जांच जारी है।
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दक्षिणपूर्वी दिल्ली के तुगलकाबाद एक्सटेंशन इलाके में शुक्रवार तड़के एक आवासीय इमारत में भीषण आग लगने से कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई। अधिकारियों ने बताया कि कम से कम आठ घायल व्यक्तियों को इससे पहले इमारत से निकालकर इलाज के लिए एम्स ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया था। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें
(इनपुट- पीटीआई-भाषा)
