पांच सितारा होटल के एसी में बैठ कर किसानों को दोष देना आसान है- दिल्ली प्रदूषण पर सुनावई के दौरान SC की सख्त टिप्पणी

दिल्ली प्रदूषण पर हो रही सुनवाई के दौरान सरकार का पक्ष रख रहे एसजी तुषार मेहता ने कहा कि मैं कुछ चीजें साफ करना चाहता हूं कि टेलीविजन मीडिया मेरे खिलाफ कुछ खबरें चला रहा है।

Delhi Air Pollution, Supreme Court
सुप्रीम कोर्ट दिल्ली एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को लेकर केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों को कड़ी फटकार लगा चुकी है(फोटो सोर्स: PTI)।

दिल्ली में वायु प्रदूषण के चलते लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। बता दें कि इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई याचिका पर बुधवार को सुनवाई करते हुए सर्वोच्च अदालत के जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि दिल्ली में अक्टूबर-नवंबर में चोक जैसी स्थिति हो जाती है। आखिर सालभर केंद्र और दिल्ली सरकार इसको लेकर क्या करते हैं।

पराली के मुद्दे पर सख्त टिप्पणी- कोर्ट में बुधवार को बहस के दौरान जब एक बार फिर से पराली का मुद्दा उठा तो अदालत ने कई सख्त बातें कहीं। कोर्ट ने कहा कि सब जानते हैं कि इस सीजन में किसान पराली जलाते हैं। मुद्दे घुमाने की कोशिश ना हो। हमें प्रदूषण कम करने की चिंता है। दिल्ली के पांच सितारा होटल में बैठकर किसानों को दोष देना आसान है। कोर्ट ने कहा- “दिल्ली में पांच सितारा होटलों में बैठे लोग आलोचना करते हैं कि किसान प्रदूषण में चार, 30 या 40 प्रतिशत का योगदान कैसे करते हैं। क्या आपने किसानों की कमाई देखी है? हम इस बात को नजरअंदाज करते हैं कि प्रतिबंध के बावजूद पटाखे जल रहे हैं?”

अदालत की यह टिप्पणी दिल्ली सरकार की ओर से पेश वकील अभिषेक मनु सिंघवी के उस दलील के बाद आई, जिसमें उन्होंने कहा कि नवंबर में पराली जलाने के आंकड़े बहुत अधिक होंगे और इसे नजरअंदाज किया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि पराली जलाने का काम कुछ राज्यों में है, ये हाईकोर्ट है, लेकिन हमें हर बार इसमें आना पड़ता है। किसानों को लेकर आज की सुनवाई के दौरान दिल्ली, हरियाणा और पंजाब तीनों को कोर्ट की ओर से फटकार लगी है।

टीवी डिबेट को लेकर नाराजगी: सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि, प्रदूषण की इस गंभीर स्थिति से बचने के लिए पहले ही ख्याल क्यों नहीं आता कि इससे कैसे निपटना है। वहीं न्यूज चैनलों पर हो रही डिबेट पर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा, टीवी न्यूज चैनलों पर हो रही डिबेट हर किसी से अधिक अधिक प्रदूषण फैला रहे हैं। बयानों को संदर्भ से बाहर लिया जाता है। वहां सबका अपना-अपना एजेंडा है।

दिल्‍ली की तरफ से दलील दे रहे अभिषेक मनु सिंघवी ने पराली जलाने के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि इस तथ्‍य को सुप्रीम कोर्ट को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र द्वारा बताए गए 90 फीसद सुझावों पर अमल किया गया है।

बता दें कि सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुनवाई के दौरान कहा कि मेरे खिलाफ में मीडिया गलत बयानबाजी हो रही है कि पराली जलाने को लेकर कोर्ट को मैं गुमराह कर रहा हूं। इस पर कोर्ट ने कहा कि इस तरह के बयानों पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है। कोर्ट गुमराह नहीं होने वाला है।

बता दें कि सीजेआई ने सुनवाई के दौरान केंद्र और दिल्ली सरकार से कहा कि बहुत हो गया, आखिर आप लोग कब इसको लेकर गंभीर होंगे। अदालत ने पूछा कि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। जिसपर दिल्ली सरकार ने कहा कि कंस्ट्रक्शन साइटों पर लगातार निगरानी की जा रही है। ऐंटी डस्ट कैम्पेन चलाया जा रहा है, जिसे 30 टीम देख रही है।

वर्क फ्रॉम होम मुमकिन नहीं: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में 392 पेज का हलफनामा पेश किया। इसमें दिये प्रस्ताव में कहा है कि दिल्ली के सभी स्कूल बंद रहेंगे, ऑनलाइन कक्षाओं की अनुमति होगी। वहीं केंद्र ने वर्क फ्रॉम को लेकर कहा कि वो अपने कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम कराने के पक्ष में नहीं है। केंद्र ने दलील दी कि कोरोना काल में लगे लॉकडाउन के चलते पहले से ही काम प्रभावित हुआ है। ऐसे में वर्क फ्रॉम होम मुमकिन नहीं है।

वहीं बढ़े प्रदूषण के स्तर पर सुप्रीम कोर्ट ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि जब दिवाली पर पटाखो पर बैन था तो इसके बाद भी पटाखे क्यों चले? सर्वोच्च अदालत के अन्य सवालों पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जानकारी दी कि दिल्ली के 300 किलोमीटर दायरे में 11 थर्मल प्लांटों में से, 6 को बंद कर दिया गया है, केवल 5 ही काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि जरुरत पड़ी तो इस दायरे से बाहर के संयंत्रों को भी बंद किया जा सकता है। वहीं सड़कों पर 10 साल से अधिक (पुराने डीजल या पेट्रोल से चलने वाले) कोई भी वाहन सड़क पर नहीं चलेंगे। गौरतलब है कि इस मामले की अगली सुनवाई 24 नवंबर को होगी।

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