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दिल्ली मेरी दिल्ली: राजधानी की गतिविधियां

पत्रकारिता धर्म दिल्ली नगर निगम का एक आला अधिकारी इन दिनों पत्रकारों को भी कई मायने में पीछे छोड़ रहा है। निगम के बंटवारे से पहले से ही बेदिल को इस अधिकारी के बारे में सारी जानकारी है। अब बंटवारे के बाद जब उनकी तैनाती पूर्वी निगम में हुई तो वे प्रतिदिन निगम का एक […]

दिल्ली मेरी दिल्ली

पत्रकारिता धर्म
दिल्ली नगर निगम का एक आला अधिकारी इन दिनों पत्रकारों को भी कई मायने में पीछे छोड़ रहा है। निगम के बंटवारे से पहले से ही बेदिल को इस अधिकारी के बारे में सारी जानकारी है। अब बंटवारे के बाद जब उनकी तैनाती पूर्वी निगम में हुई तो वे प्रतिदिन निगम का एक आर्डर किसी ना किसी ग्रुप पर डालकर खुद को पत्रकार की श्रेणी में लाने को आतुर हैं। बेदिल ने जब उनसे इस मामले में कारण पूछा तो उनका जवाब था कि हम पत्रकार नहीं बन सके, लेकिन पत्रकारों को खुफिया जानकारी देकर पत्रकारिता धर्म तो निभा ही रहे हैं।

अजीबोगरीब नियम
यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के भूखंड हस्तांतरण का एक नियम चर्चा का विषय बना हुआ है। यह नियम है कि ब्लड रिलेशन यानी पहली पीढ़ी के परिवार के सदस्य के नाम पर हस्तांतरण होने पर ट्रांसफर शुल्क नहीं लगेगा, लेकिन अगर हस्तारंण उसी परिवार के दूसरी पीढ़ी के सदस्य के नाम होगा, तो हस्तांतरण शुल्क देय होगा। इस नियम को भले ही प्राधिकरण के अधिकारी भी संशय जताते हुए संशोधन की बात तो कहते हैं, लेकिन राजस्व बढ़ाने की मजबूरी बताकर पहल करने को तैयार नहीं हैं।

नोएडा एक्सप्रेस वे स्थित जेपी को आबंटित सेक्टर- 131 में एक महिला के नाम 175 मीटर का भूखंड आबंटित हुआ था। महिला ने अपनी मृत्यु से पहले यह भूखंड अपने बेटे और पोते के नाम करने की पंजीकृत वसीयत की थी। अब उस वसीयत के आधार पर जब महिला के बेटे भूखंड को स्वयं और अपने बेटे के नाम कराने पहुंचे, तो प्राधिकरण कर्मियों ने उनसे सर्कल दर के आधार पर आधा हस्तांतरण शुल्क अदा करने को कहा। तर्क दिया कि मां से उनके नाम (बेटे) के नाम पर हस्तांतरण होने का कोई शुल्क नहीं है, लेकिन उनके बेटे (मृतका के पोते) के नाम होने पर शुल्क देना पड़ेगा।

बढ़ी सक्रियता
राजनीति में यह आम धारना है कि अगर कोई चुनाव नजदीक ना हो या फिर किसी नेता को पार्टी में कोई पदभार नहीं मिला हो तो वह प्रदेश कार्यालय या यों कहें तो क्षत्रीय पार्टी कार्यालय की ओर झांकता नहीं है। अगर नेता वरिष्ठ हों या फिर किसी पद पर रह चुके हों तो उसका रुतबा और अधिक बढ़ा होता है। इन दिनों ऐसा ही देखने को मिला रहा है। युवा राजनीति से अपने करियर की शुरूआत करने वाली प्रदेश की नवनियुक्त महिला अध्यक्ष पिछले कुछ दिनों से काफी सक्रिय दिखाई दे रही हैं।

नाम की घोषणा से पूर्व वह कभी कभार ही नजर आती थीं। भले ही प्रदेश कार्यालय में कितनी ही बड़ी बैठक हो या फिर कोई अन्य कार्यक्रम। धरना-प्रदर्शन से तो उनका दूर-दूर तक कोई नाता नहीं था। लेकिन कहते हैं ना कि पद पाने की लालसा और मिल जाने के बाद पद पर बने रहने का लालच इतनी बुरी बला होती है कि चाह कर भी पदाधिकारी अपने आप को रोक नहीं पाता। यही कारण है कि इन दिनों सभी धरना प्रदर्शन और बैठकों में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेती हुई नजर आती हैं, ताकि आलाकमान को लगे की सही कंधों पर जिम्मेदारी सौंपी गई है।

आलाकमान को ठेंगा
वो दौर चला गया जब पद से बड़ा दल हुआ करता था। बीते दिनों दिल्ली की सिख राजनीति में कम से कम ये बात सटिक बैठती दिखी। तभी तो सिख सियासत की एक पार्टी अपने लोगों से पद छोड़ने का फरमान सुना रही, लेकिन उसके पार्षदों के कान में मानो तेल पड़ा हुआ है। भाजपा की सबसे पुरानी सहयोगी रही पंजाब सियासत की इस शीर्ष पार्टी के कोटे से दिल्ली में चुनाव जीतने वाले मुश्किल दौर में अपने ही आलाकमान को ठेंगा दिखा गए। सिख सियासत में अब यह कहते और उसका समर्थन करते देखा-सुना जा सकता है कि राजनीति में कुछ भी संभव है। हर कोई आगे देख रहा है। ऐसे में कुर्सी सबसे बड़ी चीज होती है। ऐसे भी गठबंधन कृषि कानून को लेकर टूटा था और दिल्ली में खेती-किसानी से क्या लेना देना। यहां का वोट बैंक में किसान कहा।

मीडिया मोह
नेताओं का मीडिया मोह किसी से छुपा नहीं है। यह मोह इन दिनों भाजपा में लोगों के लिए चुटकी लेने की वजह बन गया है। हाल ही में पार्टी ने पुराने मीडिया प्रभारी की पदोन्नति की है और उन्हें संगठन के काम से जोड़ा है। यह घोषणा हो जाने के बाद भी मीडिया को सूचना देने का काम पुराने ही प्रभारी संभाल रहे हैं। इस पर कई नेता चुटकी ले रहे हैं कि नेता जी मीडिया मोह नहीं छोड़ पा रहे हैं।

रूठे रूठे प्रवक्ता
पार्टी की नई टीम में वापसी मिलने के बाद भी नाराजगी सामने आ रही है। लंबे समय से पार्टी में प्रवक्ता की भूमिका में सक्रिय नेता ने नाराज होकर सोशल मीडिया से अपना पद ही हटा दिया और इसकी जगह कार्यकर्ता लिख दिया। जब यह नाराजगी सार्वजनिक हुई तो पार्टी के मनाने के बाद 10 ही घंटे में प्रवक्ता बन गए। हालांकि रूठने मनाने का सिलसिला लगातार जारी है।

महकमे की बदनामी
एक के बाद एक पुलिसवाले का रिश्वतखोरी और जालसाजी में फंसने के बाद अब आला अधिकारियों को कुछ सूझ नहीं रहा है। मन में पाप रखने वाला पुलिसवाले नजरें नहीं मिला पाते हंै। उन्हें इस बात का मलाल तो है कि कुछ कर्मियों की करतूत से पूरे महकमे की बदनामी हो रही है, पर जिस तरह पुलिस प्रधान आरोपी पुलिसवाले के खिलाफ बिना देर किए कठोर कार्रवाई कर रहे हैं, उससे यह कहावत भी चरितार्थ हो रही है कि चोर की दाढ़ी में तिनका। आखिर ईमानदारी में थोड़े ना किसी की बर्खास्तगी और सस्पेंशन का इनाम मिलेगा?
-बेदिल

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