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दिल्ली मेरी दिल्ली

कोरोना संक्रमण मैदान में सक्रिय कर्मचारियों से लेकर नेताओं को अपना शिकार बना रहा है। अब तक राजनीति चमकाने के लिए आगे आ रहे नेताओं में अब इसका खौफ साफ नजर आ रहा है।

Author नई दिल्ली | Updated: September 28, 2020 5:13 AM
दिल्ली मेरी दिल्ली

सोशल भड़ास
दिल्ली कांग्रेस में उस वक्त बड़ा बदलाव देखने को मिला, जब प्रदेश की कमान एक युवा नेता को सौंप दी गई। हालांकि, इससे पहले भी जब भूतपूर्प मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को दिल्ली की कमान सौंपी गई थी तो उनके नीचे तीन युवाओं को भी प्रदेश की अतिरिक्त कमान सौंपी गई थी। पर इस बार उन युवाओं को दरकिनार करते हुए पार्टी ने एक ऐसे युवा को अपना नेतृत्व सौंपा जो नए तो नहीं थे, लेकिन किसी को इसकी उम्मीद नहीं थी। इस फैसले के बाद हमेशा पार्टी कार्यालय में बैठकों और अन्य मौके पर नजर आने वाले दिग्गजों ने कार्यालय से दूरियां बनानी शुरू कर दी हैं। इनमें उन दो नेताओं के बड़े नाम शामिल हंै, जिन्होंने भाजपा का दामन छोड़ हाथ का साथ थामा था। पर पार्टी में जब ज्यादा तव्वज्जो नहीं मिली तो अब ऐसे नेता सोशल मीडिया पर कहीं अधिक सक्रिय नजर आते हैं। दिल्ली के मुद्दे के अलावा राष्ट्रीय मुद्दों पर भी अपनी भड़ास निकालते हुए आसनी से मिल जाते हैं।

सक्रिय कारोबारी
स्वच्छता सर्वेक्षण में अव्वल आने की जद्दोजहद में लगे औद्योगिक महानगर नोएडा प्रशासन को नई तकनीक के नाम पर झांसा देने वाले कारोबारी सक्रिय है। शहर में लागू घर-घर से कूड़ा उठाने की योजना में जैविक कचरे का एक अलग वर्ग विभाजित किया गया है। जिसमें होटल, रेस्तरां, अस्पताल, बहुमंजिला अपार्टमेंट, बिल्डर सोसायटी, बड़े कारखाने आदि में निकलने वाले जैविक कचरे को कूड़ा उठाने वाली कंपनी नहीं उठाएंगी। बल्कि ऐसे जैविक कचरे का निस्तारण कर खाद बनाने की जिम्मेदारी संचालकों की होगी। इससे जैविक कचरे को खाद में बदलने के लिए आर्गेनिक वेस्ट कंपोस्टिंग मशीनों की एकाएक मांग बढ़ गई है।

इन मशीनों की आपूर्ति करने वाली कंपनियां प्राधिकरण और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्यालयों में जाकर अपने लिए ग्राहक तलाश रहे हैं। जबकि प्राधिकरण ने करीब डेढ़ साल पहले शहर की ज्यादातर नर्सरी और हरित पट्टिकाओं से निकलने वाले फूल-पत्तियों को खाद में तब्दील करने के लिए करीब दो दर्जन मशीनें लगवाई थीं। इन मशीनों को लगाने के कुछ दिनों तक ही यह क्रियाशील रहीं। उसके बाद से अब तय यह महज दिखावे के रूप में लगी हुई है। इसके बावजूद नियमों की दुहाई देकर प्राधिकरण समेत अन्य प्रशासनिक विभाग नोटिस भेजकर इन मशीनों को ना लगाने पर जुर्माने की चेतावनी दे रहे हैं।

गांजा और पुलिस
मुंबई में सुशांत सिंह राजपूत की संदिग्ध मौत के बाद रिया सहित कई लोगों को नशा के चक्कर में एनसीबी ने क्या पकड़ा कि अब एक के बाद एक कई लोग नशेड़ी गिरोह के शिकंजे में आने लगे हंै। लेकिन इसी बीच दिल्ली में तो गजब का एक मामला सामने आ गया। यहां तो 920 ग्राम गांजा हड़पने के मामले में ही चार पुलिसकर्मी शिकंजे में आ गए। अब चर्चा शुरू हो गई है कि क्या एनसीबी पुलिसवालों की भी जांच करेगी ताकि यहां भी गिरोह का पता चल सके?

अदालत का सहारा
इसे विडंबना कहिये या सरकार की अक्षमता। वेतन जैसे मूलभूत उपबंधों के लिए कर्मचारियों को अदालत जाना पड़ रहा है। वो भी राजधानी दिल्ली में। बीते दिनों निगम के कर्मचारियों को वेतन अदालत की पहल पर मिला। इसी तरह डीयू के एक कॉलेज के चार महीने का बकाया वेतन कर्मचारियों को हाई कोर्ट ने दिलवाया। हद तो तब हो गई, जब अदालत की फटकार के बाद बकाया वेतन तो दे दिया, लेकिन आगे फिर पुराना अख्तियार कर लेती। पीड़ित फिर अदालत जाते और फिर राहत पाते। किसी ने ठीक ही कहा कि अब हर काम अदालत ही करेगी। कोई इसे सत्ता और नेताओं की नाकामी का नतीजा बताता तो कोई अदालत में ही केवल लोगों की बची आस्था से इसे जोड़ता। तर्क देता कि तभी तो कर्मचारियों को अपनी आधारभूत सुविधा और अधिकार के लिए बार-बार अदालत की गुहार लगानी पड़ रही है, जबकि लोकतंत्र के चारों स्तंभ के अपने-अपने कार्यक्षेत्र पूर्व निर्देशित हैं। कुछ भी हो लेकिन इतना तो तय है कि यह कहना कि अब अदालत ही एक सहारा, गलत नहीं है।

एकांतवास में भलाई
कोरोना संक्रमण मैदान में सक्रिय कर्मचारियों से लेकर नेताओं को अपना शिकार बना रहा है। अब तक राजनीति चमकाने के लिए आगे आ रहे नेताओं में अब इसका खौफ साफ नजर आ रहा है। दरअसल अब भाजपा पार्टी के सक्रिय नेता भी चाहते हैं कि 2 अक्तूबर तक के लिए तय किए गए कार्यों को किसी प्रकार टाला जाए। तभी वे खुद को संक्रमण से बचा सकेंगे। यह खौफ हाल ही में पार्टी कार्यालय में संक्रमित पाए गए नेताओं के बाद सामने आया है। इसलिए दमदार दिख रहे नेता भी घर में एकांतवास करने में ही भलाई मानते नजर आ रहे हैं।

निपटा दिए नेताजी
केंद्रीय नेतृत्व की टीम में लगातार रहने वाले भाजपा के एक बड़े नेता कुछ दिन पहले ही मजाक में यह कहते हुए नजर आए थे कि हम अब तक पांच अध्यक्षों को निपटा चुके हैं। हमारे लिए बार-बार निपटाने की बात हुई पर हमारी जगह बनी रही है। लेकिन शनिवार को जारी की गई केंद्रीय नेतृत्व की टीम में ये नेता जी भी निपटा दिए गए हैं।

कांग्रेस वाली मिठाई
भारतीय जनता पार्टी पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जंयती मना रही है। कोरोना काल में तमाम नियमों का पालन करने के बाद जब दिल्ली के एक नेता जी ने पार्टी के कार्यक्रम में हीरा स्वीट्स की मिठाई देखी तो अचानक दबी आवाज में बोल पड़े वाह कांग्रेस वालों की मिठाई। तो आसपास खड़े नेताओं की भी हवाइयां उड़ीं। वे भी हल्की मुस्कान के साथ मिठाई लेकर आगे की तरफ बढ़ गए।
-बेदिल

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