ताज़ा खबर
 

दिल्ली मेरी दिल्ली

कोरोना काल में निजी व सरकारी अस्पतालों की लापरवाही से जहां लोगों की मौत होने का सिलसिला जारी है। वहीं, ऐसे मामलों की हकीकत लोगों के सामने आने से रोकने के लिए प्रशासनिक अमला पूरी तरह से सक्रिय है।

Author Published on: July 6, 2020 6:38 AM
health worke,TV anchors,TV debatesकोरोना के संदिग्ध मरीजों की जांच करता स्वास्थ्यकर्मी।

नेतागिरी से बैल थका
दिल्ली में कोरोना काल में राजनीति चमकाने का दौर जारी रही है। सभी दल अपने-अपने तरीके से यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि वे जनता के कितने करीब हैं। ऐसी ही एक पहल कांग्रेस पार्टी ने पेट्रोल डीजल के दामों में बढ़ोतरी के बाद भी की थी। इसके लिए खास तौर पर संकेत के तौर पर पार्टी के नेता एक बैल पर सड़कों पर उतरे थे। लेकिन इस बैलगाड़ी पर फोटो खिंचवाने वाले कांग्रेसी नेताओं की इतनी लंबी कतार हो गई कि बैल ही थक गया। इस गाड़ी प्रदर्शन के लिए बड़ी संख्या में कांग्रेस के नेता चढ़ गए। आखिरकार बैल ने भी घुटने टेक दिए। इसके बाद कांग्रेस के कई नेताओं को नीचे उतार कर कांग्रेस को अपना यह प्रदर्शन आगे बढ़ाना पड़ा।

गुटबाजी चालू है
हाल ही में दिल्ली भाजपा में कई नेताओं को अहम पदों पर तैनात किया गया है। निगम के इन पदों को लेकर पार्टी के अंदर जमकर घमासान जारी रहा। इस वजह से पार्टी के नए अध्यक्ष को भी पार्टी की अंदुरूनी गुटबाजी का सामना करना पड़ा। इस वजह से पार्टी अपनी रणनीति के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी। हालत यहां तक आ गई कि पार्टी के नेता कारण को बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगना पड़ा। इस गुटबाजी का नुकसान ही भाजपा बीते कई सालों से उठा रही है। नए कमान के बाद भी इस फटे हाल स्थिति में कोई बदलाव नजर नहीं आ रहा है। यह गुटबाजी आने वाले दिनों में पार्टी के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर सकती है।

घर जाने को आतुर
कोरोना के कहर से डरे लोग कई बार अनाप-शनाप करतूत कर पुलिस वालों को भी मुश्किल में डाल रहे हंै। गाजियाबाद इलाके में एक महिला अपने पति और तीन बच्चों सहित सामान का भारी कट्टा लेकर दोपहिया स्कूटी पर जा रही थी। पुलिस ने इन्हें रोका और नियमानुसार चालान भरने का फरमान सुनाया। चालान की बात सुनते ही तीनों बच्चे पुलिस वाले के हाथ पांव पकड़ने लगे और यह कहने लगे कि उनके मम्मी-पापा इस समय बेरोजगार हैं और वे परिवार सहित उत्तरप्रदेश अपने घर जा रहे हैं। पुलिस वाले जब तक कुछ और बोलते वे सभी लोग स्कूटी छोड़कर पैदल ही निकल पड़े। यह दृश्य देख वहां भीड़ जुट गई और फिर पुलिस के जवान ने कहा कि अपना स्कूटी मत छोड़ो, साथ लेकर जाओ।

कोरोना को हराएंगे
दिल्ली पुलिस के अधिकारी और जवान सबसे आगे आकर लड़ाई लड़ रहे हैं, पर कोरोना से जंग भी लड़ रहे हैं। संक्रमण की चपेट में आने से कई अधिकारी और जवान अपनी जान गंवा चुके है। उपायुक्त स्तर के अधिकारी भी चपेट में आ गए थे। पर राहत की बात यह है कि संक्रमित जवान और अधिकारियों के ठीक होने की संख्या अब बढ़ गई है। इस कारण जवानों और अधिकारियों के बीच एक आशा की उम्मीद जगी है। बीते दिनों जब पुलिसकर्मी ठीक होकर घर लौटे और जब थाने में ड्यूटी ज्वाइन करने के लिए पहुंचे तो उनका फूल-माला के साथ स्वागत किया गया। एक अधिकारी ने बताया कि डर तो अभी भी है। पर ठीक होकर लौटने वालों की संख्या अधिक है। यही कारण है कि अधिकारी और जवानों के बीच हौंसला बढ़ गया है और आज भी अपनी ड्यूटी निभाने के लिए दिल्ली पुलिस के जवान और अधिकारी फ्रंटफुट पर खड़े नजर आते हैं।

लापरवाही का आलम
कोरोना काल में निजी व सरकारी अस्पतालों की लापरवाही से जहां लोगों की मौत होने का सिलसिला जारी है। वहीं, ऐसे मामलों की हकीकत लोगों के सामने आने से रोकने के लिए प्रशासनिक अमला पूरी तरह से सक्रिय है। मीडिया या वॉट्सएप पर निजी या सरकारी अस्पतालों की लापरवाही से पीड़ित परिजनों की शिकायतों पर आनन-फानन में एक जांच कराकर मौत की वजह लापरवाही ना बताकर अन्य बीमारियों को बताया जा रहा है। मामला केवल यहीं तक नहीं रुक रहा है बल्कि बाकायदा प्रशासनिक स्तर पर ऐसे मामलों को उजागर करने के बाबत भी सचेत या चेतावनी जारी की जा रही है।

नतीजन मीडिया में अस्पतालों की लापरवाही के चलते होने वाली मौत की सूचना सार्वजनिक नहीं हो पाती है। वहीं, इसी प्रशासनिक अनुकंपा का पूरा फायदा निजी अस्पताल बढ़ चढ़कर ले रहे हैं। चूंकि सरकारी अस्पतालों में इलाज की लचर व्यवस्था है। लिहाजा मनमानी फीस लेकर रोगियों को निजी अस्पताल भर्ती कर रहे हैं। भर्ती होने के बाद डिस्चार्ज से पहले दर्जनों जांचें कर लाखों रुपए के बिल परिजनों को थमाए जा रहे हैं। कहीं सुनवाई नहीं होने से कोरोना काल में नकदी की कमी से जूझ रहा मध्यमवर्ग बेबसी के आंसू बहाने को मजबूर है।

विषाणुरोधक प्रकरण
कई बार ज्यादा उछलना सेहत के लिए हानिकारक भी साबित होता है। कोरोना से बचाव के दावे के मद्देनजर गुरुद्वारा बंगला साहिब में हुई एक पहल को लेकर ये चर्चा आम है कि कहीं सिखों की यह पहल बाबा रामदेव का कोरोनिल प्रकरण न साबित हो जाए। दरअसल, गुरुद्वारा बंगला साहिब की दीवारों पर विषाणुरोधक परत चढ़ाई गई है और यह दावा किया गया है कि यह कोरोना से बचाव की एक अनूठी पहल है।

इस विशेष परत से छह महीना तक परिसर को सैनेटाइज करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। जबकि केंद्र की ओर से धार्मिक स्थल को कोरोना से बचाव के निर्देशित उपायों को किया जाना अनिवार्य है, उनमें सुबह-शाम सेनिटाइज किया जाना भी शामिल है। जाहिर है यदि इस विशेष परत की आड़ में सरकार के निर्देशों की अनदेखी महंगी पड़ सकती है। किसी ने ठीक ही कहा यदि रोज किया जाने वाला सेनेटाइज कार्य को बंद किया तो कोरोनिल सरीखे का प्रकरण फिर होने के चांस हैं।

-बेदिल

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 संत परंपरा: वैष्णव भक्ति केंद्र गलताजी मठ
2 सीख और सिद्धियां: चमत्कार की उम्मीद न करें साधना में
3 तीज-त्योहार: खास है इस बार सावन का महीना
ये पढ़ा क्या?
X