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दिल्ली मेरी दिल्ली

दिल्ली के चुनावों की वजह से राजनीतिक दलों की अदला-बदली का दौर भी शुरू हुआ है। भाजपा, कांग्रेस व आप में कई इलाकों से नए चेहरे जुड़ने के लिए सामने आए हैं। इन कोशिशों में जहां एक तरफ पार्टी में नए लोगों को जुड़ने वालों को नेता अपने इलाके में काम की कोशिशों का परिणाम बता रहे हैं। वहीं, और कांग्रेस ने ऐसे नेताओं को ही रिजेक्टिड कचरा बता दिया है। इस कचरे को स्वीकार करने के लिए आम आदमी पार्टी को बधाई भी दी है।

Author नई दिल्ली | August 24, 2020 5:40 AM
दिल्ली मेरी दिल्ली।

पुलिस का खौफ खत्म
दिल्ली में इधर उत्तर पूर्व में हुए दंगे में रोज गिरफ्तारी हो रही है तो उधर पुलिसिया खौफ को नजरअंदाज करते हुए बदमाशों का आतंक बढ़ रहा है। पुरानी दिल्ली में एक ही रात में दर्जनों घरों को निशाना बनाया गया। देर रात दर्जन भर से ज्यादा बदमाशों ने घरों में घुसकर तो घर के बाहर खड़ी गाड़ियों को निशाना बनाया। पांडव नगर में भी इसी प्रकार की वारदात हुई और फिर दिल्ली के कई अन्य इलाकों में भी ऐसी ही वारदातें सामने आईं। अब इससे तो यही कहा जा सकता है कि बदमाशों में पुलिस का खौफ समाप्त हो रहा है।

तैयारियों का ढिंढोरा
जल जनित बीमारियां हरेक साल आती है और निगम अपनी पुरानी तैयारियों का ढिंढ़ोरा पीटता है। कोरोना के बाद कई बार निगम अधिकारी इस बाबत प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुके हैं। हर कॉन्फ्रेंस में यही सूचना दी जाती है कि यह अभियान नहीं महाअभियान है। अब भला इन निगम नेताओं को कौन बताए कि डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया दिल्ली में ना तो नई बीमारी है और ना ही दिल्ली का यह बंदोबस्त नया फिर, इतनी हाय-तौबा काहे को। यह तो पुरानी बोतल में नई शराब जैसी कहावत हो गई।

आधा-अधूरा बयान
शांति, सेवा और न्याय की बात करने वाली राजधानी की सुरक्षा में तैनात सुरक्षा बल पर समय-समय पर सवाल खड़े होते रहते हैं। चाहे रिश्वत का मामला हो या फिर उगाही का। पर बीते दिनों दो ऐसे मामले सामने आए, जिसके बाद आला अधिकारियों ने काफी समय तक चुप्पी साधे रखी। पर मामला बढ़ता देख जिले के वरिष्ठ अधिकारियों ने मोर्चा संभाला और आधा-अधूरा बयान देकर अपना पीछा छुटवाया। एक मामले में जहां कई जवान और अधिकारी लूटपाट के मामले में शामिल पाए गए। वहीं, दूसरी घटना में एक जवान ने सर्विस पिस्तौल से गोली मार कर हत्या कर दी। यह घटना भले ही सुबह के वक्त घटी थी, लेकिन बयान जारी करने में जिले के अधिकारियों ने पूरा दिन निकाल दिया और जब बयान दिया गया तो वह भी आधा-अधूरा।

विरोधाभासी बयानबाजी
दिल्ली भाजपा में सबकुछ ठीक नहीं है। यही वजह है कि एक ही साथ भाजपा से विरोधाभासी बयानबाजी सामने आ रही है। इस मामले में पार्टी के नेता एक दूसरे बयान को काटते नजर आ रहे हैं। पार्टी की प्रदेश की सूची आने वाली है। इसलिए हर तरफ यह देखने को मिल रहा है। एक दूसरे को घेरने के लिए भाजपा के सक्रिय नेता वार-पलटवार की भूमिका में नजर आ रहे हैं। इन राजनीतिक हमलों की चर्चा सोशल मीडिया में भी जोरों पर है।

राजनीतिक तंज
निगम चुनाव की दस्तक में दलों ने एक बार फिर तैयारियां शुरू कर दी हैं। आम आदमी पार्टी ने अपनी टीम बना दी है और वहीं दूसरे राज्यों में भी चुनाव मैदान में उतरने की दस्तक दे दी है। इस फैसले के बाद ही दिल्ली के नेता आप पार्टी के नेताओं पर राजनीतिक तंज कसते नजर आ रहे हैं। हाल ही में सोशल मीडिया में एक आॅनलाइन सर्वेक्षण का हवाला देते हुए भाजपा नेताओं ने यह तक साबित कर दिया कि आम आदमी पार्टी यूएस में होने वाले चुनावों में भी हिस्सा ले सकती है। इसके लिए पार्टी के नेताओं ने सोशल मीडिया पर लिए जनता के पोल का सहारा लिया।

दलों की अदला-बदली
दिल्ली के चुनावों की वजह से राजनीतिक दलों की अदला-बदली का दौर भी शुरू हुआ है। भाजपा, कांग्रेस व आप में कई इलाकों से नए चेहरे जुड़ने के लिए सामने आए हैं। इन कोशिशों में जहां एक तरफ पार्टी में नए लोगों को जुड़ने वालों को नेता अपने इलाके में काम की कोशिशों का परिणाम बता रहे हैं। वहीं, और कांग्रेस ने ऐसे नेताओं को ही रिजेक्टिड कचरा बता दिया है। इस कचरे को स्वीकार करने के लिए आम आदमी पार्टी को बधाई भी दी है। इसके पीछे तर्क दिया गया है कि छह जुलाई के निलंबित किए गए पदाधिकारी को पार्टी ने सदस्यता दी।

पॉलीथीन पर फिर रार
कोरोनाकाल के दौरान सामाजिक संगठनों और दानकर्ताओं के साथ मिलकर लाखों लोगों को पॉलीथीन की थैलियों में सब्जी, रोटी, पूड़ी आदि बांटने वाले सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों के रुख में एकाएक बदलाव आने से कारोबारी सकते में आ गए हैं। करीब एक साल से पॉलीथीन के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए प्राधिकरण समेत अन्य सरकारी विभागों ने प्रचार-प्रसार के अलावा उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्ती शुरू की थी। इस बीच मार्च के अंतिम सप्ताह से कोरोना को लेकर लागू हुई पूर्णबंदी में इस अभियान के उलट कार्रवाई खुद सरकारी कर्मचारियों की मौजूदगी में शुरू हुई।

काम-धंधे बंद होने से प्रवासी श्रमिकों समेत औद्योगिक महानगर के लाखों परिवारों के आगे खाने का संकट पैदा हो गया। तब तमाम सामाजिक संगठनों ने आगे आकर सामुदायिक रसोई और भंडारे आदि के जरिए इन लोगों तक खाना पहुंचाया। खाना पहुंचाने के काम में प्राधिकरण समेत अन्य सरकारी महकमों के अधिकारी व कर्मचारी भी मुस्तैदी से लगे रहे। जिनके द्वारा पॉलीथीन की थैलियों में सब्जी, दाल, रोटी, पूड़ी आदि रखकर बांटी गई। हालांकि खाना बांटने का काम करीब दो महीने पहले बंद हो चुका है लेकिन कपड़े के थैले आदि की उपलब्धता नहीं होने के चलते अभी तक अधिकांश सामग्री पॉलीथीन में बेचनी या देने की मजबूरी बनी हुई है। लेकिन विगत दिनों से प्राधिकरण ने फिर से पॉलीथीन प्रयोग को अवैध घोषित कर एकतरफा अभियान चलाकर जुर्माना लगाना शुरू कर दिया है।

‘आप’-‘तुम’ सरकार
दिल्ली सरकार के कुछ मॉडलों की चर्चा भले देश में कहीं भी हो रही हो, लेकिन केजरीवाल के सार्वजनिक परिवहन यानि बस सुविधा की चर्चा बस स्टॉप पर जरूर होती दिख रही है। हालात ये हो गए है कि दिल्ली सरकार की साख पर बट्टा लग रहा है। बस की समुचित व्यवस्था के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। सवारी 40 तो बस में चढ़ पाते हैं एक। लोग घंटों खड़े रह रहे और बसें स्टॉप पर रुकती नहीं, क्योंकि उनमें 20 सवारी तो टर्मिनलों से ही बैठकर आ रही हैं। यात्रीगणों में भारी रोष है। एक यात्री की टिप्पणी थी कि बस स्टॉप का मतलब टर्मिनल, जहां से बसे चलना शुरू करती हंै। दूसरे की भी प्रतिक्रिया थी, मजबूरी की तरफ कोई नहीं देखता। क्या ‘आप’ सरकार क्या ‘तुम’ सरकार। पूर्णबंदी खोल दी, बस यात्रियों को छोड़ दिया राम भरोसे। कोई यात्री भड़ास निकलता तो कोई ‘सम-विषम’ जैसी व्यवस्था का सुझाव दे डालता। तो कोई यह बताता कि सवारी ट्रस्ट और सरकार मस्त है।

तंत्र का काम निराला
सरकारी तंत्र का काम करने का अंदाज निराला है। इसकी एक बानगी बेदिल को देखने को मिली। मामला एक अस्पताल में भर्ती का था। कुल 15 पदों के लिए कुल 15000 आवेदन मंगा लिए गए। हर आवेदन कर्ता को आवेदन के साथ हजार रुपए का शुल्क अदा करना पड़ा। लेकिन हुआ वही कि भर्ती तो केवल 15 की होनी थी तो उतने लोगों को ही नौकरी मिली। बाकी के पैसे तो चले गए इसका मलाल भी आवेदनकर्ताओं को कम नहीं। एक आवेदनकर्ता ने चुटकी ली सरकार को हमारी जीविका की चिंता नहीं अपनी आमदनी का जुगाड़ करना था। तभी तो एक नहीं डेढ़ करोड़ हम बेरोजगारों से ऐेंठ लिए। बहाना हमारी नौकरी का रंग चोखा सरकारी खजाने का। क्यों नौकरी न पाने वालों के पैसे वापस किए जाते।
-बेदिल

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