देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून ने तेज रफ्तार पकड़ ली है। चार जून को केरल के तट से टकराने के 72 घंटे के भीतर मानसून ने 11 राज्यों में दस्तक दे दी है। यह केरल में अपने सामान्य आगमन की तारीख से तीन दिन देरी से पहुंचा, लेकिन महाराष्ट्र में निर्धारित समय पर प्रवेश कर गया। यह इस महीने के अंत में अपने सामान्य आगमन समय के आसपास दिल्ली पहुंच सकता है।
मौसम विभाग के अनुसार, इसके 25 से 30 जून के बीच दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रवेश करने की संभावना है। नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद और उत्तरी भारत के अन्य हिस्सों जैसे आसपास के क्षेत्रों के लिए यही समय-सीमा अपेक्षित है। दिल्ली पहुंचने के बाद, मानसून के उत्तर-पश्चिम की ओर हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश, लद्दाख व जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ने की संभावना है।
पिछले साल 29 जून को दिल्ली पहुंचा दक्षिण-पश्चिम मानसून
पिछले साल, दक्षिण-पश्चिम मानसून 29 जून को दिल्ली पहुंचा, जो 1961-2019 के औसत के आधार पर इसकी सामान्य शुरुआत की तारीख 27 जून से दो दिन बाद थी। मानसून केरल में चार जून को पहुंचा, जो इसकी सामान्य शुरुआत की तारीख एक जून से देरी से और आइएमडी के 26 मई के पहले के पूर्वानुमान से लगभग एक सप्ताह पीछे था।
हालांकि, इसके बाद यह तेजी से आगे बढ़ा और पांच जून तक पश्चिमी तट के बड़े हिस्से को गोवा तक कवर कर लिया, जिसके बाद छह जून को यह महाराष्ट्र में प्रवेश कर गया। मानसून रविवार को उत्तर-पूर्वी भारत में पूरे नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम में आ गया। साथ ही असम, त्रिपुरा और अरुणाचल में कई जगहों पर मानसून की बारिश शुरू हो गई।
आइएमडी के मुताबिक, मानसून 72 घंटे में 11 राज्यों में पहुंच चुका है-केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, असम और अरुणाचल प्रदेश-इन सभी राज्यों में मानसून की बारिश दर्ज की जा रही है।
दक्षिण-पश्चिम मानसून आज पूरे नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, असम और अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ गया। मौसम विभाग ने इस साल जून से सितंबर के बीच दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान देश के अधिकतर हिस्सों में औसत से कम बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है।
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